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अभिभावकों को मिला स्वावलंबी पुत्र का साथ

भूमिका

नैनखेड़ा (रामपुर मनिहारान) निवासी श्री नवीन पवार के पुत्र कुणाल पवार ने एसएससी की स्टेनोग्राफर परीक्षा उत्तीर्ण कर कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय में चयनित होकर परिवार, गाँव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। कुणाल की इस उपलब्धि में जहाँ उसकी मेहनत और लगन शामिल है, वहीं उसके पिता नवीन पवार का मार्गदर्शन और प्रेरक पेरेंटिंग भी अहम रही। आइए, श्री नवीन पवार से पेरेंटिंग को लेकर उनके अनुभव और विचार सुनते हैं।


इंटरव्यू : श्री नवीन पवार 

            (कुणाल पवार के पिता)

प्रश्न १. सबसे पहले आपको और आपके परिवार को बहुत-बहुत बधाई। इस सफलता के बाद आपके मन में पहला भाव क्या था?

उत्तर: "धन्यवाद। मेरे लिए यह क्षण गर्व और संतोष का था। बच्चे को सही राह पर चलाकर जब वह मंज़िल पाता है, तो उससे बड़ी खुशी माता-पिता के लिए और कुछ नहीं हो सकती।"

प्रश्न २. आपने कुणाल की शिक्षा और करियर गाइडेंस में किस प्रकार भूमिका निभाई?

उत्तर: "मैंने हमेशा यही कोशिश की कि कुणाल को पढ़ाई में आज़ादी और सही वातावरण मिले। दसवीं-बारहवीं में अच्छे अंक आए तो मुझे लगा कि उसमें क्षमता है। फिर मैंने उसे ऑनलाइन कोचिंग, शॉर्टहैंड और टाइपिंग की तैयारी के लिए प्रेरित किया और आवश्यक साधन उपलब्ध कराए।"

प्रश्न ३. कुणाल ने अपनी सफलता का श्रेय समीर और मोहित सर को भी दिया है। आप इस पर क्या कहना चाहेंगे?

उत्तर: "बिल्कुल सही। समीर पवार और मोहित तंवर जैसे समर्पित ट्रेनर्स का योगदान कुणाल की सफलता में महत्वपूर्ण है। नि:शुल्क टैलेंट सर्च मिशन जैसी पहल से साधारण परिवारों के बच्चों को सुनहरा अवसर मिला। मैं उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।"

प्रश्न ४. आपने अपने बेटे को ऑनलाइन तैयारी और शॉर्टहैंड जैसे क्षेत्र की ओर क्यों प्रेरित किया?

उत्तर: "आज की प्रतिस्पर्धा में केवल किताबों से काम नहीं चलता। किसी स्किल का होना ज़रूरी है। शॉर्टहैंड एक ऐसा कौशल है जिससे सरकारी परीक्षाओं में जल्दी सफलता मिल सकती है। मैंने यह सोचा कि पढ़ाई के साथ एक ठोस स्किल भी हो, ताकि बालक का भविष्य सुरक्षित रहे। कुणाल ने भी मेरी भावना को समझा और हमको सहयोग मिला समीर का, जो शॉर्टहैंड कौशल को जानने के साथ साथ टैलेंट सर्च मिशन नामक एक मिशन से भी जुड़ा है। आगे सारी तैयारी कुणाल ने समीर के सहयोग से स्वयं की जो मेरे लिए बहुत संतोष का विषय है।"

प्रश्न ५. इस सफलता से गाँव और आसपास के युवाओं को क्या संदेश देंगे?

उत्तर: "मैं यही कहना चाहूँगा कि साधन चाहे सीमित हों, पर मेहनत और विश्वास से सब संभव है। मोबाइल और इंटरनेट का सही इस्तेमाल कर शिक्षा व तैयारी की जा सकती है। अगर बच्चे अनुशासन और धैर्य रखें तो सफलता निश्चित है।"

प्रश्न ६. एक पिता के तौर पर आपके लिए सबसे बड़ी सीख क्या रही?

उत्तर: "सबसे बड़ी सीख यह रही कि बच्चों पर विश्वास करना चाहिए। अगर हम उन्हें भरोसा और सही माहौल देते हैं, तो वे अपनी मंज़िल खुद तय कर लेते हैं। पिता का कर्तव्य है मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देना, दबाव डालना नहीं।"

👉 यह इंटरव्यू न सिर्फ नवीन जी के पितृत्व दृष्टिकोण को दर्शाता है, बल्कि हर अभिभावक को यह संदेश देता है कि विश्वास, सहयोग और सही दिशा बच्चों को मंज़िल तक पहुँचाने में सबसे बड़ी पूँजी है।

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