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जन्मदिवस सेलिब्रेशन संबंधी आत्मकथ्य

 🌸 भूमिका 🌸

कविता केवल कवि की नहीं होती, वह श्रोता के हृदय की भी प्रतिध्वनि होती है और पाठक की संवेदना का भी विस्तार। जब कवि बोलता है तो श्रोता सुनते हैं, और जब श्रोता तन्मय होते हैं तो शब्द अमर हो जाते हैं। यही शब्द जब लिखित रूप में पहुँचते हैं तो पाठक का मन उनसे संवाद करने लगता है। आज तकनीक के इस युग में, मेरे जैसे माध्यम (ChatGPT) के द्वारा यह आत्मकथ्य आप तक पहुँच रहा है, जहाँ कवि का अनुभव, श्रोता की स्मृति और पाठक की भावनाएँ एक सूत्र में बंध रही हैं। यह संवाद इस बात का प्रमाण है कि साहित्य हर युग में पुल का काम करता है—दिलों को जोड़ता है, पीढ़ियों को मिलाता है और विचारों को जीवित रखता है।

✍️ आत्मकथ्य 

सुमनेश 'सुमन' 

मैं सुमनेश सुमन, एक कलमकार, जिसने कविता को केवल शब्दों की बाज़ीगरी नहीं, बल्कि आत्मा का उद्गार माना है।

साहित्य मेरे लिए केवल पन्नों पर लिखी पंक्तियाँ नहीं, बल्कि समाज की नब्ज़ टटोलने का माध्यम है।

हाल ही में मुझे मेरठ के ऐतिहासिक लालकुर्ती स्थित एस.जी.एस. गार्डन में प्रतिष्ठित पंवार वाणी फाउंडेशन द्वारा आयोजित उस विराट कवि सम्मेलन में अपनी रचना प्रस्तुत करने का अवसर मिला, जो माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी के पिच्छत्तरवें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

उस मंच पर जब मैंने राष्ट्र प्रेम से ओत-प्रोत अपनी कविता सुनाई, तो लगा जैसे मेरे शब्द तिरंगे के रंगों में घुलकर श्रोताओं के दिलों तक पहुँच रहे हों।

सभा में देश भर के नामचीन कवियों का जमावड़ा था – वीर रस की ओजस्विता, हास्य का चुटीलापन और गहन संवेदनाओं की मिठास, सब एक साथ मौजूद थे।

मेरे लिए यह अवसर केवल कविता-पाठ भर नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपनी भावनाओं को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम था।

कार्यक्रम की भव्यता शब्दों से परे थी – चारों ओर तिरंगा, तालियों की गड़गड़ाहट और श्रोताओं की आँखों में चमक। जब श्रोताओं ने मेरी पंक्तियों पर ठहरकर तालियाँ बजाईं, तो मैंने महसूस किया कि कवि और समाज के बीच की डोर कितनी गहरी होती है।

इस आयोजन में माननीय सांसद, विधायकों, साहित्यकारों और हजारों श्रोताओं की गरिमामयी उपस्थिति ने इसे और विशेष बना दिया। पर मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि वही थी कि मेरी कविता ने राष्ट्रभक्ति की उस ज्वाला को और प्रज्वलित किया, जिसे हर भारतीय दिल में जीवित रखना ही मेरी साधना है।

मैं मानता हूँ –

👉 कवि होना एक जिम्मेदारी है।

👉 कवि होना समाज की आत्मा को स्वर देना है।

👉 कवि होना भविष्य को उजागर करना है।

और! इसी जिम्मेदारी को लेकर मैं अपने शब्दों से निरंतर भारत के गौरव, उसके आदर्शों और उसकी अदम्य शक्ति का गायन करता रहूँगा।




सूचना स्रोत

सुमनेश 'सुमन'

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 






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