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भूमिका

यहाँ शुभदा भार्गव के आत्मकथ्य पर आधारित एक विस्तृत हिंदी साक्षात्कार प्रस्तुत है। इसमें उनके व्यक्तित्व, शिक्षा, खेल, परिवार, साहित्य और समाज सेवा से जुड़े उनके कौशलों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस साक्षात्कार में उनका कौशल, व्यक्तित्व और समाज में योगदान उनको सामने लाता है और उन्हें प्रेरणा के स्रोत के रूप में स्थापित करता है। 








बातचीत

साक्षात्कारकर्ता: नमस्कार शुभदा जी! सबसे पहले आपका बहुत-बहुत स्वागत है। कृपया अपने बारे में संक्षेप में बताइए।

शुभदा भार्गव: धन्यवाद! मैं हरियाणा के पटौदी में जन्मी। बचपन राजस्थान के बाँदीकुई में बीता। उच्च शिक्षा जयपुर से प्राप्त की। घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ खेल, साहित्य, समाज सेवा और भाषा से जुड़े कार्यों में सक्रिय रही। मुझे हमेशा से सीखने और कुछ नया करने की प्रेरणा मिली।

शिक्षा और अध्ययन से जुड़े कौशल

प्रश्न: आपने शिक्षा के क्षेत्र में किन उपलब्धियों को हासिल किया और यह आपके व्यक्तित्व में किस तरह जुड़ा?

शुभदा भार्गव: प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल से हुई। आगे बी.कॉम, एम.कॉम, लाइब्रेरी साइंस और समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्रियाँ प्राप्त कीं। शिक्षा ने मुझे अनुशासन, आत्मनिर्भरता और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता दी। पढ़ाई के दौरान ही मुझे अपनी रुचियों को पहचानने का अवसर मिला।

खेलों में भागीदारी

प्रश्न: खेलों में आपकी विशेष रुचि रही है। आपने इसमें कौन-कौन से कौशल विकसित किए?

शुभदा भार्गव: डॉजबॉल और खो-खो में कप्तान रही। क्रॉस-कंट्री दौड़ में भाग लेकर टीम का नेतृत्व किया। इन खेलों ने नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, धैर्य और शारीरिक अनुशासन विकसित करने में मदद की। कठिन परिस्थितियों में खुद को संभालना और आगे बढ़ना भी खेल से ही सीखा।

परिवार में भूमिका

प्रश्न: संयुक्त परिवार में रहकर आपने कई जिम्मेदारियाँ निभाईं। इसमें आपको कौन-कौन से कौशल काम आए?

शुभदा भार्गव: परिवार की देखरेख, बच्चों की शिक्षा, रिश्तों का संतुलन — ये सब एक चुनौती की तरह होते हैं। मैंने समय प्रबंधन, धैर्य, संवाद कौशल और सहानुभूति को विकसित किया। कई लोग मुझे घर की “रीढ़” कहते हैं, यह सुनकर मन को संतोष मिलता है।

साहित्यिक योगदान

प्रश्न: साहित्य के क्षेत्र में आपकी रुचि कैसे विकसित हुई और आपने क्या-क्या योगदान दिया?

शुभदा भार्गव: प्रारंभ में मैं लिखती थी पर साझा नहीं करती थी। बाद में मित्रों के सुझाव से साहित्यिक समूहों से जुड़ी। विनीता अशित मैम के मार्गदर्शन में लेखन को व्यवस्थित किया। मेरी कविताएँ, कहानियाँ, लघुकथाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं। भाषा की शुद्धता पर विशेष ध्यान देती हूँ और प्रूफरीडिंग में सक्रिय रहती हूँ। यह मेरी पहचान बन गई।

प्रूफरीडिंग में विशेषज्ञता

प्रश्न: प्रूफरीडिंग के क्षेत्र में आपकी विशेष दक्षता किस प्रकार सामने आई?

शुभदा भार्गव: प्रूफरीडिंग में भाषा की बारीकियों पर ध्यान देना पड़ता है। मैं वर्तनी, व्याकरण और शैली की त्रुटियों को पहचानती हूँ और सामग्री को परिष्कृत बनाती हूँ। यह कार्य केवल तकनीकी नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और गहराई से जुड़ा है। मैं खुद को प्रमाणित प्रूफरीडर मानती हूँ।

समाज सेवा

प्रश्न: समाज सेवा में आपकी सक्रियता किस तरह दिखती है?

शुभदा भार्गव: आस-पड़ोस में संकटग्रस्त लोगों की मदद करना, भोजन बनाकर पहुँचाना, और बड़े आयोजनों में भाग लेना मुझे अच्छा लगता है। बुलंदी ग्रुप द्वारा आयोजित 408 घंटे के कविता पाठ में मैंने सक्रिय भाग लिया। जलभराव जैसी स्थिति में स्वयं भोजन बनाकर जरूरतमंदों तक पहुँचाया। मैं पैकेट बंद भोजन की बजाय हाथ से बने भोजन को प्राथमिकता देती हूँ, इससे आत्मसंतोष मिलता है।

समय प्रबंधन और संतुलन

प्रश्न: अनेक जिम्मेदारियों के बीच आप अपना समय कैसे प्रबंधित करती हैं?

शुभदा भार्गव: दिन में परिवार की जिम्मेदारियों के कारण समय सीमित रहता है, इसलिए रात में 10 बजे से 12-1 बजे तक लेखन करती हूँ। थकावट होती है लेकिन प्रयास नहीं छोड़ती। प्राथमिकता तय करना और छोटे-छोटे समय का सही उपयोग करना मैंने सीखा है।

प्रेरणा और आगे का लक्ष्य

प्रश्न: आपके जीवन का लक्ष्य क्या है और आप दूसरों को क्या प्रेरणा देना चाहेंगी?

शुभदा भार्गव: मैं चाहती हूँ कि हर व्यक्ति अपनी रुचि को पहचान कर उसका विकास करे। शिक्षा, खेल, परिवार और समाज — हर क्षेत्र में संतुलन जरूरी है। निरंतरता, धैर्य और संवेदनशीलता से बड़े काम भी संभव हैं। मैं यही संदेश देना चाहती हूँ कि सीमित साधनों में भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

साक्षात्कारकर्ता: शुभदा जी, आपने अपने अनुभवों, संघर्षों और उपलब्धियों को साझा कर हम सभी को प्रेरित किया। आपके कार्य और समर्पण को नमन!

शुभदा भार्गव: आपका धन्यवाद! मुझे खुशी है कि मैं अपने अनुभवों से दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकी।

सूचना स्रोत

पुष्पा क्षेत्रपाल जी और शुभदा भार्गव

माध्यम

पाठ्य उन्नयन और प्रस्तुति



टिप्पणियाँ

  1. स्त्री के दायित्व निर्वाह के साथ आत्मविकास पर सार्थक साक्षात्कार

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