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साहित्य की वास्तविक सार्थकता को सिद्ध करती प्रतिभा हैं सुनीता जी

भूमिका

साहित्य किसी भी समाज की आत्मा होता है, और जब बच्चे किसी साहित्यकार से प्रेरित होकर अपने जीवन की दिशा चुनने का निश्चय करते हैं, तो यह साहित्य की वास्तविक सार्थकता को सिद्ध करता है। सुप्रसिद्ध कवयित्री एवं लेखिका सुनीता जैन ‘रूपम’ जी ने अपनी कविताओं, लघुकथाओं और लेखों के माध्यम से न केवल संवेदनाओं को शब्द दिए, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना भी जगाई। उनकी उपलब्धियों और सम्मान से प्रेरित होकर आज की नई पीढ़ी भी साहित्य को करियर और साधना दोनों के रूप में अपनाना चाहती है। प्रस्तुत संवाद इसी भावभूमि पर आधारित है, जहाँ कुछ बच्चे अपने सपनों और आकांक्षाओं को सुनीता जी की जीवन-यात्रा से जोड़कर एक उज्ज्वल भविष्य की कल्पना कर रहे हैं।

विशेष संवाद 

सुनीता जैन ‘रूपम’ जी से

प्रश्न १. आपका परिचय हमारे पाठकों से कराते हुए हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। सबसे पहले हम यह जानना चाहेंगे कि आपका साहित्य की ओर रुझान कैसे हुआ?

उत्तर: "मेरा जन्म 10 जुलाई 1959 को हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में मैंने इतिहास में एम.ए., एल.एल.एम. और अपराध शास्त्र में डिप्लोमा किया। बचपन से ही पठन-पाठन और लिखने में विशेष रुचि रही। भावनाओं को शब्दों में पिरोने की कला धीरे-धीरे कविताओं और लघुकथाओं के रूप में सामने आई। यही साहित्यिक यात्रा आज तक निरंतर जारी है।"

प्रश्न २. आपकी प्रकाशित पुस्तकों की सूची काफी समृद्ध और विविधतापूर्ण है। किन पुस्तकों को आप अपने लेखन की विशेष उपलब्धि मानती हैं?

उत्तर: "मेरी व्यक्तिगत कृतियों में ‘मेरी भी कविता’, ‘पत्र पिता के’, ‘अश्क प्रीत के’, ‘अनुभूति एक एहसास’, ‘मेरा भी विमर्श’, ‘श्रेष्ठ लघुकथाएं’, ‘प्रेम सागर’ विशेष स्थान रखती हैं। इसके साथ ही मैंने कई साझा संकलनों में योगदान दिया है, जैसे – ‘भारत की आधुनिक हिंदी कवयित्रियां’, ‘मेरे प्रिय साहिबे कलम’, ‘मैं बाबुल की परछाई’, ‘प्रेम प्रवाह’, ‘सबसे प्यारी मेरी हिंदी’, ‘भारत की वीरांगनाएं’ आदि।

राजस्थान साहित्य अकादमी के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित मेरा काव्य संग्रह ‘मखमली आवाज़’ मेरे हृदय के बहुत निकट है।"

प्रश्न ३. आपके लेखन में विषय-विविधता दिखाई देती है। आप किन-किन विधाओं में लेखन करती हैं?

उत्तर: कविता और लघुकथा मेरी प्रमुख विधाएं हैं, किंतु आलेख और विधिक लेखन में भी मैंने निरंतर कार्य किया है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में मेरे लेख और कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं।

प्रश्न ४. साहित्यिक योगदान के लिए आपको अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। कुछ विशेष सम्मान के बारे में हमारे पाठकों को बताइए।

उत्तर: "मुझे ‘विश्व साहित्य अकादमी’ द्वारा काव्य गौरव सम्मान तथा अनुभव साहित्य सम्मान प्राप्त हुआ।

‘आदर्श समाज समिति इंडिया’ ने मुझे गांधी आदर्श पुरस्कार 2021 से नवाज़ा।

राष्ट्र रत्न सम्मान 2022 (चंद्रकला चेरिटेबल ट्रस्ट), डॉ. राधाकृष्णन समर्पण समाज गौरव सम्मान 2022, नारी गौरव सम्मान 2022 एवं 2023, कल्पना चावला मेमोरियल अवार्ड 2023, एजुकेशनल एम्बेसेडर अवार्ड, अजयमेरू प्रेस क्लब साहित्य सम्मान, मां शकुंतला साहित्य सम्मान, राजस्थान साहित्य अकादमी सम्मान आदि मेरे लिए अत्यंत प्रेरक रहे हैं।

हाल ही में नेपाल की संस्था ‘शब्द प्रतिभा बहु क्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन’ ने मुझे अंतरराष्ट्रीय हिंदी लघुकथा सम्मान 2024 से अलंकृत किया। लुम्बिनी, नेपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुझे हिंदी काव्य रत्न 2024 की मानद उपाधि दी गई।

साथ ही, मलेशिया-सिंगापुर में 12वें अंतर्राष्ट्रीय हिंदी अधिवेशन में आलेख वाचन और सहभागिता हेतु मुझे प्रशस्ति पत्र मिला।"

प्रश्न ५. इतने सम्मान और उपलब्धियों के बाद भी आप साहित्य से जुड़े रहने की प्रेरणा कहाँ से पाती हैं?

उत्तर: "मेरी प्रेरणा समाज और मेरे पाठक हैं। जब मेरी पंक्तियाँ किसी के हृदय को छू लेती हैं, कोई पाठक अपने अनुभव साझा करता है, तो लगता है कि मेरी लेखनी सार्थक हुई। साथ ही, परिवार का भी भरपूर सहयोग मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।"

प्रश्न ६. आपके लेखन का केंद्रीय भाव क्या होता है?

उत्तर: "मेरा लेखन मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों, प्रेम, सामाजिक मुद्दों और नारी जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करता है। मैं मानती हूँ कि साहित्य समाज का दर्पण है, और लेखक की जिम्मेदारी है कि वह समाज में सकारात्मक चेतना जगाए।"

प्रश्न ७. वर्तमान समय में हिंदी साहित्य के प्रति युवाओं का रुझान आप कैसे देखती हैं?

उत्तर: "आज की पीढ़ी में हिंदी लेखन की संभावनाएँ बहुत प्रबल हैं। सोशल मीडिया ने युवाओं को मंच दिया है, परंतु गहराई और अध्ययन की आवश्यकता बनी हुई है। मैं चाहती हूँ कि युवा लेखक परंपरा और आधुनिकता का संतुलन साधते हुए अपनी पहचान बनाएँ।"

प्रश्न ८. आपके भावी लेखन-योजनाओं के बारे में जानना चाहेंगे।

उत्तर: "मैं कुछ नए काव्य संग्रह और लघुकथा संकलन पर कार्य कर रही हूँ। साथ ही, विधिक विषयों पर भी लिखने का मन है जिससे समाज को व्यावहारिक मार्गदर्शन मिले।"

प्रश्न ९. अंत में, पाठकों और नवोदित लेखकों के लिए आपका संदेश?

उत्तर: "लेखन साधना है। यदि कोई लेखक ईमानदारी से लिखता है, तो उसकी रचना पीढ़ियों तक जीवित रहती है। मैं यही कहना चाहूँगी कि शब्दों से समाज को सकारात्मक दिशा दें, हिंदी भाषा से प्रेम करें और उसकी गरिमा को बनाए रखें।"

👉 यह साक्षात्कार प्रारूप उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व और साहित्यिक यात्रा को समाहित करता है।

सुनीता जी के व्यक्तित्व को लेकर बालकों के मध्य संवाद

रीना: "अरे दोस्तो! मैंने कल मम्मी से सुनीता जी के बारे में सुना। अरे! कितनी लोकप्रिय कवि और लेखिका हैं वो।"

अमन: "हाँ, मैंने भी उनकी कविताएँ पढ़ी तो हैं। 'पत्र पिता के' वाली किताब बहुत दिल को छू लेने वाली है। सच कहूँ तो मैं भी सोच रहा हूँ कि बड़ा होकर कवि ही बनूं।"

नेहा: "सच में, उन्होंने कितनी किताबें लिखी डाली हैं और हे भगवान! इतने सारे सम्मान। 'नारी गौरव सम्मान', 'काव्य गौरव सम्मान', और सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों तक में।"

राज: "मुझे तो लगता है कि पढ़ाई के साथ-साथ हमें अपनी रुचि पर भी मेहनत करनी चाहिए, इस से हम भी बड़े होकर समाज में अपनी पहचान बना सकते हैं।"

रीना: "बिल्कुल! सुनीता जी ने इतिहास और कानून पढ़ा पढ़ा हुआ है, फिर भी अपनी रुचि के अनुसार कविताएँ लिखीं। हमें भी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी कला को समय देना चाहिए।"

अमन: "सही कहा। मैं तो सोचता हूँ कि रोज़ थोड़ी-थोड़ी डायरी लिखूँ। शायद उसी से आगे चलकर मेरी भी एक किताब तैयार हो जाए।"

नेहा: "अरे, मैं तो लघुकथा लिखने की कोशिश करूँगी। सुनीता जी की तरह समाज और रिश्तों की अंतर्संबंध व्यक्त करती कहानियाँ।"

राज: "अच्छा! तो तय रहा, हम सब अपनी रुचि के मुताबिक मन की रचनाएँ लिखेंगे और एक दिन मिलकर भी एक साझा संकलन निकालेंगे।"

आइडिया 💡 

 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 





टिप्पणियाँ

  1. सुनीता जैन रूपम ख्याति प्राप्त लेखिका हैं इनकी कई रचनाएं देश विदेश की विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है तथा साहित्य सृजन के क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान के लिए दर्जनों सम्मान भी मिल चुके है। सुनीता जी की सबसे विशेष बात यह है की, वे आज के समसामयिक घटनाओ पर भी बहुत अच्छे से अपने सटीक विचार पेश करती है। इनका 'मखमली आवाज'काव्य संग्रह मुझे बहुत प्रिय है।

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    उत्तर
    1. आभार। ऐसे प्रतिभा संपन्न मानव संसाधनों को हम तलाशते हैं।

      हटाएं

  2. साहित्य किसी भी समाज की आत्मा होता है, और जब बच्चे किसी साहित्यकार से प्रेरित होकर अपने जीवन की दिशा चुनने का निश्चय करते हैं, तो यह साहित्य की वास्तविक सार्थकता को सिद्ध करता है। सुप्रसिद्ध कवयित्री एवं लेखिका सुनीता जैन ‘रूपम’ जी की रचनाओं को मैंने पढ़ा है इन्होंने अपनी कविताओं, लघुकथाओं और लेखों के माध्यम से न केवल संवेदनाओं को शब्द दिए, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना भी जगाई।

    जवाब देंहटाएं
  3. मधुर मुस्कान, सुंदर हृदय तथा साहस की धनी ख्याति प्राप्त कवयित्री एवं लेखिका श्रीमती सुनीता जैन रूपम अजमेर को लेखन के क्षेत्र तथा साहित्य योगदान के लिए कई पुरस्कार मिल चुके है व साहित्य जगत में एक आला मुकाम हासिल किया है। इनकी कई रचनाएं देश-विदेश की कई पत्र पत्रिकाओं तथा साझा संकलन में प्रकाशित हुई है।साहित्य अकादमी उदयपुर से प्रकाशित इनका काव्य संग्रह मखमली आवाज़ में प्रेम, प्रकृति तथा हृदय को छूती रचनाएं है जो पाठकों को भावविभोर कर देने वाली संवेदनाओं से परिपूर्ण रचनाएं है।अपनी इन उपलब्धियों के लिए हार्दिक बधाई एवं भविष्य के लिए उत्तरोत्तर प्रगति के लिए शुभकामनाएं 🙏

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