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आत्मकथ्य

“आज मेरा हृदय अत्यंत गर्व और विनम्रता से भर उठा है। विश्व हिंदी कविता प्रतियोगिता में ‘विश्व हिंदी रत्न’ से सम्मानित होना मेरे लिए केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति मेरे समर्पण का स्वीकृत प्रमाण है। यह सम्मान मेरे प्रयासों, मेरे लेखन और हिंदी प्रेम के प्रति समाज की संवेदनशीलता का प्रतीक है।

नेपाली और भारतीय सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने तथा साहित्यिक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने वाले इस मंच ने मुझे आत्मीयता से जोड़ा है। यह सम्मान मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत है कि मैं आगे भी हिंदी भाषा की सेवा में और अधिक सक्रियता, निष्ठा और रचनात्मकता से योगदान दूँ।

मैं उन सभी का आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने मेरे शब्दों में शक्ति देखी, मेरे विचारों में संवेदना पहचानी और मेरे साहित्यिक प्रयासों को समर्थन दिया। यह सम्मान मेरे साथ हिंदी के हर साधक और पाठक का भी है। मैं इसे समर्पित करती हूँ अपने परिवार, अपने विद्यार्थियों, और उन सभी पाठकों को, जो हिंदी के प्रति प्रेम और विश्वास रखते हैं।

आशा है कि यह सम्मान मुझे और अधिक रचनात्मकता, सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।”



प्रयास

 


उन्नायक
 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार 

 

प्रस्तुति




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