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पेशेवर, कुशल और सामाजिक रहे श्री एम.एल. चतुर्वेदी जी

भूमिका 

बैंकिंग सेवा से लेकर साहित्य सृजन तक की यात्रा किसी भी साधारण व्यक्ति के लिए असाधारण मानी जा सकती है। अजमेर में जन्मे और मुंबई में बैंक ऑफ बड़ौदा से वरिष्ठ प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए श्री एम.एल. चतुर्वेदी ने अपने जीवन में पेशेवर कुशलता और सामाजिक दायित्व के साथ-साथ साहित्यिक संवेदनाओं को भी निरंतर पोषित किया है। उनकी कहानियों में अंतर्मन की गहराई और समाज की वास्तविकता की झलक मिलती है। सेवा काल में उत्कृष्ट कार्य, सामाजिक जीवन में योगदान और साहित्यिक यात्रा में सतत सक्रियता उन्हें विशिष्ट व्यक्तित्व प्रदान करती है। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत, जो उनके जीवन के विभिन्न आयामों को हमारे सामने खोलती है।

✦ साक्षात्कार

प्रश्न १. आपका बचपन और शिक्षा-दीक्षा किस प्रकार रही?

उत्तर: "मेरा जन्म 26 जनवरी 1951 को अजमेर (राजस्थान) में हुआ। विज्ञान और गणित में रुचि होने के कारण मैंने बी.एस.सी. (विज्ञान-गणित) किया और आगे चलकर बैंकिंग में गहराई से समझ प्राप्त करने के लिए सी.ए.आई.आई.बी. की उपाधि भी अर्जित की।

प्रश्न २. बैंकिंग क्षेत्र में आपकी यात्रा कैसी रही?

उत्तर: मैंने बैंक ऑफ बड़ौदा में लंबे समय तक सेवा दी और 31 जनवरी 2011 को वरिष्ठ प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुआ। बैंकिंग मेरे लिए केवल नौकरी नहीं थी, बल्कि अनुशासन, प्रबंधन और व्यवहार-कौशल सीखने का एक विद्यालय भी था।

प्रश्न ३. साहित्य लेखन की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?

उत्तर: साहित्य मेरे लिए अंतर्मन की अभिव्यक्ति का साधन है। नौकरी के दौरान ही लिखना शुरू किया और धीरे-धीरे यह जीवन का अहम हिस्सा बन गया। देश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में मेरी लगभग बीस कहानियाँ प्रकाशित हुईं।

प्रश्न ४. आपकी प्रकाशित पुस्तकों के बारे में कुछ बताइए।

उत्तर: मेरा पहला कहानी संग्रह "अंतर्मन की कहानियाँ" अगस्त 2024 में प्रकाशित हुआ। इसके बाद "और मोती बिखर गये" और "अर्पण" अगस्त 2025 में आए। इसके अलावा मैंने "Who Killed My Bank" का हिंदी अनुवाद "मेरे बैंक की हत्या किसने की" 2021 में किया।

प्रश्न ५. आपकी कहानियों की विशेषता क्या है?

उत्तर: मेरी कहानियाँ सामान्य जीवन की असामान्य स्थितियों से उपजती हैं। इनमें संवेदनाएँ, रिश्तों की बारीकियाँ और समाज के बदलते स्वरूप की झलक मिलती है। मैं चाहता हूँ कि पाठक को हर कहानी उसके अपने अनुभवों का आईना लगे।

प्रश्न ६. साहित्य के अलावा आपके जीवन के और कौन-से क्षेत्र में सक्रिय रहे?

उत्तर: मैंने सामाजिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। आर्ट ऑफ लिविंग, ब्यावर में संरक्षक के रूप में सेवाएं दीं और कई बार सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त लायंस क्लब, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर द्वारा बेस्ट सेक्रेटरी अवार्ड भी प्रदान किया गया। साहित्यिक संस्थाओं और सामाजिक आयोजनों से भी जुड़ा रहा।

प्रश्न ७. आपके सम्मान और उपलब्धियों के बारे में बताइए।

उत्तर: 1985-86 में मुझे बेस्ट सेक्रेटरी (लायंस क्लब) का सम्मान मिला। 2003 में राष्ट्रीय समता स्वतंत्र मंच ने मुझे सम्मानित किया। 2010 में यूको बैंक द्वारा अखिल भारतीय निबंध प्रतियोगिता में पुरस्कार मिला। हाल ही में मेघदूत साहित्य संस्था ने "मेघ-मल्हार-2025" में मुझे "अतिथि सम्मान" से नवाजा। आने वाले दिनों में साहित्य मंडल, नाथद्वारा द्वारा "हिन्दी साहित्य भूषण" मानद उपाधि से अलंकृत किया जाना मेरे लिए गौरव की बात है।

प्रश्न ८. बैंकिंग और साहित्य – दोनों क्षेत्रों में संतुलन कैसे साधा?

उत्तर: अनुशासन और समय-प्रबंधन इस संतुलन की कुंजी रहे। बैंकिंग ने मुझे व्यवहारिक दृष्टि दी और साहित्य ने संवेदनशीलता। दोनों ने मिलकर मेरे व्यक्तित्व को परिपक्व बनाया।

प्रश्न ९. वर्तमान साहित्यिक वातावरण को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: आज साहित्य का दायरा बढ़ा है। सोशल मीडिया ने इसे आमजन तक पहुँचाया है। लेकिन गहराई और गंभीरता बनाए रखना लेखक की जिम्मेदारी है। सच्चा साहित्य वही है जो समाज को सोचने पर विवश करे।

प्रश्न १०. आने वाले समय में आपकी साहित्यिक योजनाएँ क्या हैं?

उत्तर: मैं आगे भी कहानी लेखन जारी रखना चाहता हूँ और संभव है कि संस्मरण व उपन्यास लेखन की ओर भी कदम बढ़ाऊँ। मेरी कोशिश रहेगी कि साहित्य के माध्यम से जीवन की सच्चाइयों और अनुभवों को समाज तक पहुँचाता रहूँ।

👉 इस प्रकार यह साक्षात्कार न केवल श्री एम.एल. चतुर्वेदी के साहित्यिक व्यक्तित्व को उद्घाटित करता है, बल्कि उनकी बैंकिंग सेवाओं, सामाजिक योगदान और जीवन-दृष्टि को भी हमारे सामने प्रस्तुत करता है।

आइडिया 💡 



पाठ्य उन्नयन और विस्तार 

 

प्रस्तुति




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