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योजनाकार का वक्तव्य

भूमिका

डॉ अशोक चौधरी एक समाजसेवी हैं और वो विविध प्रकृति की सामाजिक गतिविधियों में संलग्न रहते हैं तथा समाज में सौहार्द्र स्थापना के साथ साथ समाज में सहयोगी की भूमिका निभाने वाले विविध प्रकृति के मानव संसाधनों का सदुपयोग करने के माहिर भी हैं। हाल ही में उनके द्वारा किए गए एक अभिनव प्रयास का विवरण यहां पर दिया जा रहा है जो विविध प्रकृति के सामाजिक कार्यों में संलग्न रहने वाले नागरिकों को निश्चित ही उत्साहित और प्रोत्साहित करेगा।

डॉ. अशोक चौधरी का वक्तव्य

“रक्षा बंधन हमारे समाज का केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों की पवित्रता और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। इसी भावना को सामने रखते हुए 17 अगस्त को मेरठ में हापुड़ रोड स्थित नये आरटीओ ऑफिस के समीप नूरजहां मंडप में हिंदू और मुस्लिम गुर्जर समाज ने मिलकर रक्षा बंधन का एक अनूठा आयोजन किया।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हापुड़ जिले के गुर्जर परियोजना के संयोजक श्री राजबल सिंह जी ने की और संचालन का दायित्व श्री योगेन्द्र जी ने निभाया। हमारे बीच मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी श्री सूर्य प्रकाश टांक जी उपस्थित रहे जिन्होंने अपने अनुभव और विचारों से सभी को प्रेरित किया।

मुझे कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करने का अवसर मिला। मैंने इसमें गुर्जर समाज की भौगोलिक स्थिति, हमारी ऐतिहासिक परंपराएँ और सबसे महत्वपूर्ण – आपसी सौहार्द्र की परंपरा पर चर्चा की। मैंने इस बात पर विशेष बल दिया कि गुर्जर समाज की असली ताकत उसकी एकता है। चाहे हम हिंदू गुर्जर हों या मुस्लिम गुर्जर – हमारी जड़ें, हमारी संस्कृति और हमारी विरासत एक ही हैं।

कार्यक्रम में मुस्लिम गुर्जर समाज की ओर से श्री नूरुद्दीन चौहान जी और मौलाना शान मोहम्मद जी ने विचार रखे। उन्होंने रक्षा बंधन को भाईचारे और इंसानियत का उत्सव बताया। महिलाओं की ओर से डॉ. नीलम सिंह जी ने रक्षा बंधन के महत्व पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन का रिश्ता मजबूत नहीं करता, बल्कि समाज को भी एकता और सुरक्षा की भावना से जोड़ता है।

सबसे भावुक क्षण वह था जब हिंदू और मुस्लिम गुर्जर समाज की सभी बहनों ने मंच पर उपस्थित भाइयों की कलाई पर राखी बाँधी। उस समय का दृश्य हमारे लिए केवल परंपरा का निर्वाह नहीं था, बल्कि यह विश्वास, अपनत्व और आपसी सद्भाव का प्रत्यक्ष प्रमाण था।

इस आयोजन में समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे जिनमें साकिर भडाना, इमरान सारंगपुर, डॉ. सुशील भाटी, डॉ. हरेंद्र सिंह, डॉ. तस्वीर सिंह चपराना, श्री वेदप्रकाश, श्री सुरेन्द्र भडाना, श्री महिपाल सिंह चौधरी, श्रीमती रीमा सिंह, श्रीमती रेशमा राणा, श्रीमती सुदेश भडाना, श्रीमती सीमा खां, श्रीमती श्वेता त्यागी और श्रीमती रूपा जैन प्रमुख रहे।

मैं यह कहना चाहूँगा कि हमारे समाज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी हिंदू और मुस्लिम गुर्जर रोटी-बेटी के रिश्तों से जुड़े हैं। यह केवल खानपान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी साझा संस्कृति, आपसी विश्वास और सामाजिक मजबूती का प्रमाण है। यही वह परंपरा है जो हमें अलग नहीं होने देती।

अंत में, मैंने कार्यक्रम से यह अपील की कि ऐसे आयोजन केवल मेरठ या हापुड़ तक सीमित न रहें। इनको पूरे प्रदेश और देश में फैलाना चाहिए। यदि हर क्षेत्र में इस प्रकार की सामूहिक पहल होगी तो धर्म और जाति की दीवारें स्वतः टूटेंगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए सौहार्द्र, भाईचारे और एकता की मिसाल कायम होगी।

चित्रदीर्घा






















वीडियो


सूचना स्रोत

 
                                   डॉ अशोक चौधरी
पाठ्य उन्नयन और विस्तार 
 

प्रस्तुति







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