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प्रधानाध्यापक प्रवेन्द्र दहिया का आत्मवर्णनात्मक वक्तव्य

भूमिका 

विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री प्रवेंद्र दहिया जी सदैव इस उन्नत सोच के प्रतीक रहे हैं कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर जीवन को समझने और अनुभव से सीखने का माध्यम बने। उनका मानना है कि विद्यार्थियों के समग्र विकास और उन्नयन में किया गया व्यय कभी भी व्यर्थ नहीं होता, बल्कि यह उनके भविष्य के निर्माण में निवेश के समान है। यही दृष्टिकोण उन्हें सदैव प्रेरित करता है कि बच्चों को कक्षा से बाहर निकालकर ऐसे शैक्षिक भ्रमण कराए जाएं, जहां वे विज्ञान, संस्कृति और इतिहास को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें और अनुभवजन्य ज्ञान अर्जित कर सकें। 

प्रधानाध्यापक प्रवेन्द्र दहिया का आत्मवर्णनात्मक वक्तव्य

“हमारे विद्यालय होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज, जडौदा, मुजफ्फरनगर के विद्यार्थियों के लिए यह अत्यंत हर्ष और गर्व की बात रही कि भारत मानक ब्यूरो, शाखा देहरादून के सहयोग से उन्हें कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र का शैक्षिक भ्रमण करने का अवसर मिला।

यह भ्रमण हमारे छात्रों के लिए एक ऐसा अनुभव था, जिसमें विज्ञान और संस्कृति दोनों का अद्भुत संगम दिखाई दिया। यात्रा का प्रारंभ विज्ञान सभागार में परिचयात्मक सत्र से हुआ, जहां विद्यार्थियों को सरल और रोचक विज्ञान प्रयोगों से अवगत कराया गया। इसके उपरांत महाभारत पर आधारित एक आकर्षक 3-डी लघु फिल्म दिखाई गई, जिसने इतिहास को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए बच्चों में नई समझ विकसित की।

विद्यार्थियों ने प्राचीन भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रदर्शनी में पदार्थ, परमाणु संरचना, ज्यामिति तथा खगोल विज्ञान जैसे विषयों पर ज्ञान अर्जित किया। तारामंडल के अंदर जाकर उन्होंने ब्रह्मांड के रहस्यों की खोज की और ग्रह-नक्षत्रों व आकाशगंगाओं के बारे में इंटरैक्टिव रूप से सीखा। संग्रहालय में प्रदर्शित दैनिक जीवन पर आधारित विज्ञान प्रयोगों ने विद्यार्थियों को यह अनुभव कराया कि विज्ञान केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी भी है।

यात्रा के अंतिम चरण में बच्चों ने कृष्ण संग्रहालय का अवलोकन किया। यहां उन्होंने मोहनजोदड़ो-हड़प्पा सभ्यता और महाभारत की महत्वपूर्ण घटनाओं को जाना, जिसने उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक ज्ञान को और अधिक समृद्ध किया।

इस सफल भ्रमण में बीआईएस शाखा देहरादून से श्री राजीव कुमार वर्मा जी तथा विद्यालय की ओर से मैं स्वयं, हमारे मेंटर श्री रूपेश कुमार और शुभम कुमार सम्मिलित रहे।

मैं विश्वासपूर्वक कह सकता हूँ कि यह अनुभव हमारे विद्यार्थियों के जीवन में एक अमिट छाप छोड़ गया है। यह न केवल उनके ज्ञानवर्धन में सहायक रहा, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया कि विज्ञान और संस्कृति जब साथ चलते हैं तो शिक्षा का दायरा और अधिक व्यापक हो जाता है।”







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