'सतरंगे मोती' पुस्तक के विमोचन के अवसर पर डॉ. सूरज सिंह नेगी जी का दृष्टिकोण
"साहित्य केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि समाज के उत्थान की शक्ति है। जिस प्रकार दीपक अंधकार में प्रकाश देता है, उसी प्रकार सृजनात्मक लेखन समाज को दिशा देता है। ‘सतरंगे मोती’ हमें यह सिखाता है कि जीवन के सात रंग – आशा, विश्वास, प्रेम, साहस, संयम, धैर्य और करुणा – हर वर्ग, हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में आवश्यक हैं।
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में यदि विद्यार्थी इन मूल्यों को अपनाएँ तो उनका भविष्य उज्ज्वल होगा, यदि शिक्षक इन्हें व्यवहार में उतारें तो शिक्षा का वातावरण पवित्र और प्रेरणादायक बनेगा। यदि महिलाएँ और गृहिणियाँ इन सात रंगों को जीवन में संजो लें तो परिवार का वात्सल्य और भी मधुर होगा। और यदि समाज का हर नागरिक इन सात रंगों को आत्मसात कर ले तो राष्ट्र प्रगति की अनंत राहों पर बढ़ सकेगा।
लेखन और साहित्य केवल पढ़ने की वस्तु नहीं, बल्कि जीने की प्रक्रिया है। मौलिक साहित्य ही हमें आत्मबल देता है और समाज को आदर्श मार्ग पर ले जाता है। हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम अपनी लेखनी और अपने कर्मों से समाज को ऐसा प्रेरक संदेश दें, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ गर्व से कह सकें कि हमने साहित्य और संस्कारों की अमूल्य धरोहर सहेज कर रखी है।"
आइडिया
श्री शिवराज जी कुर्मी





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