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शोध कौशल, उपलब्धियों और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं रूपाली ji

श्रीमती रूपाली वशिष्ठ जी का विशेष साक्षात्कार

(शोध कौशल, उपलब्धियाँ और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा)

🌸 परिचय

श्रीमती रूपाली वशिष्ठ जी (पी एचडी विद्वान) एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं, जो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से संबंध रखती हैं। इन्होंने बी.ए., एम.ए., पर्यटन में प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की शिक्षा प्राप्त की है, साथ ही महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाला विश्वविद्यालय, उत्तराखंड से इतिहास विषय में शोध कर रही हैं।

वह एक कुशल लेखिका, शास्त्रीय नृत्यांगना, गायिका, चित्रकार, शिल्प विशेषज्ञ और समाजसेविका हैं।

2023 और 2024 में उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 12 से अधिक पुरस्कारों से नवाजा गया है, जिनमें 'मिसेज उत्तराखंड 2024', 'वुमन चेंज मेकर अवार्ड', 'विश्व रत्न सम्मान', 'राष्ट्रीय शोध पत्र पुरस्कार' और 'बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (USA)' प्रमुख हैं।

उनकी लेखनी में उत्तराखंड की विरासत, संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और ऐतिहासिक स्थलों पर केंद्रित शोध शामिल हैं।

🎙️ साक्षात्कार

शोध कौशल और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

प्रश्न 1. आपको शोध के क्षेत्र में आने की प्रेरणा कहाँ से मिली?

उत्तर: "मुझे प्रारंभ से ही इतिहास और संस्कृति में रुचि रही है। उत्तराखंड की समृद्ध विरासत और महिलाओं की अदृश्य भूमिका ने मुझे इतिहास को गहराई से जानने और समाज के लिए संरक्षित करने की प्रेरणा दी।"

प्रश्न 2. आपके शोध का मुख्य फोकस क्या है?

उत्तर: "मेरे शोध का मुख्य केंद्र उत्तराखंड की कला, संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरें और महिलाओं की सहभागिता है। मैं यह समझने का प्रयास करती हूं कि इतिहास की परछाइयों में दबे हुए पहलुओं को कैसे उजागर किया जाए।"

प्रश्न 3. आपकी दृष्टि में एक अच्छे शोधकर्ता की तीन प्रमुख विशेषताएं क्या होनी चाहिए?

उत्तर: 1. गहराई से अध्ययन करने की धैर्यशीलता,

2. वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण,

3. संदर्भों और तथ्यों की पुष्टि करने की निष्ठा।

प्रश्न 4.आपका कौन सा शोधपत्र आपको सबसे ज्यादा प्रिय है और क्यों?

उत्तर: "लाखामंडल उत्तराखंड (महाभारत काल प्राचीन भारतीय इतिहास) पर मेरा शोध मुझे विशेष प्रिय है, क्योंकि इसमें पौराणिक तथ्यों को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ने की चुनौती थी।"

प्रश्न 5. आज की युवा पीढ़ी शोध से कैसे जुड़ सकती है?

उत्तर: "युवाओं को अपने आस-पास की समस्याओं और विरासत पर प्रश्न करना सीखना चाहिए। शोध जिज्ञासा से जन्म लेता है, और जिज्ञासा तब आती है जब सोचने की आदत हो।"

प्रश्न 6. क्या आपको शोध कार्य में किसी प्रकार की चुनौती का सामना करना पड़ा?

उत्तर: "हां, ऐतिहासिक स्थलों पर पर्याप्त प्रलेखन का अभाव और महिलाओं से संबंधित विषयों पर स्रोतों की कमी हमेशा एक चुनौती रही है।"

प्रश्न 7. आपने जो पुरस्कार प्राप्त किए हैं, वे आपके शोध से कैसे जुड़े हैं?

उत्तर: "अधिकांश पुरस्कार मेरी सामाजिक जागरूकता, शोध लेखन और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए मिले हैं। राष्ट्रीय शोध पत्र पुरस्कार विशेष रूप से मेरी अकादमिक यात्रा का परिणाम है।"

प्रश्न 8. आपके अनुसार शोध और लेखन में क्या संबंध है?

उत्तर: "शोध को लेखन के बिना अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता। लेखन शोध की आत्मा है, और वह माध्यम बनता है जिससे समाज तक आपकी खोज पहुँचती है।"

प्रश्न 9. आपने जो विषय प्रकाशित किए हैं, वे समाज में क्या बदलाव ला सकते हैं?

उत्तर: "ये विषय हमारे समाज में महिला सशक्तिकरण, धार्मिक पर्यटन, और सांस्कृतिक विरासत के प्रति चेतना जागरूक करने का कार्य करते हैं।"

प्रश्न 10. क्या आपको लगता है कि पर्यटन और इतिहास का आपस में गहरा संबंध है?

उत्तर: "बिल्कुल, हर ऐतिहासिक स्थल अपने आप में पर्यटन का एक स्रोत होता है। जब हम इतिहास को पर्यटन से जोड़ते हैं, तो रोजगार, संस्कृति और संरक्षण तीनों को लाभ होता है।"

प्रश्न 11: नई पीढ़ी में शोध रुचि कैसे विकसित की जा सकती है?

उत्तर: "शैक्षणिक स्तर पर बच्चों को प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग दी जाए, उन्हें उनके क्षेत्रीय विषयों पर खुद काम करने के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे उनमें जिज्ञासा और अनुसंधान की प्रवृत्ति जन्म ले।"

प्रश्न 12. क्या शास्त्रीय नृत्य, गायन और लेखन आपके शोध कार्य में मदद करते हैं?

उत्तर: "हां, कला आत्मा कोई  संतुलन देती है। ये कलाएं मुझे भावनात्मक रूप से समृद्ध करती हैं जिससे शोध के प्रति एकात्मता बनी रहती है।"

प्रश्न 13. आपने महिला संगठनों की भूमिका पर भी काम किया है, यह विषय क्यों चुना?

उत्तर: "इतिहास में महिलाओं का योगदान अक्सर छिपा रहा है। मैं यह दिखाना चाहती थी कि कैसे पुनर्जागरण काल में महिलाएं सामाजिक संरचना में बदलाव लाने वाली रही हैं।"

प्रश्न 14: आपकी सबसे बड़ी प्रेरणा कौन हैं?

उत्तर: "मेरे माता-पिता और मेरे फादर इन लॉ श्री महेश चंद्र शर्मा जी,पति ध्रुव वशिष्ठ जी, मेरा छोटा भाई हर्ष जिन्होंने हमेशा मेरी सोच और अभिव्यक्ति को उड़ान दी और मेरे कार्यों में मेरा सहयोग किया।"

प्रश्न 15.आप आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर: "शोध केवल किताबों का ज्ञान नहीं होता, यह सोचने की कला है। अपने आसपास की दुनिया को प्रश्नों की दृष्टि से देखें, तभी आप उसमें परिवर्तन ला सकेंगे।"

समापन टिप्पणी

श्रीमती रूपाली वशिष्ठ (पीएचडी विद्वान )जैसे शोधकर्ता समाज के लिए प्रेरणा हैं। उनका जीवन दर्शाता है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो परिवार,शिक्षा, कला, संस्कृति और समाज की सेवा को एक साथ साधा जा सकता है। उनकी उपलब्धियाँ न केवल व्यक्तिगत गौरव हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ भी हैं।

सूचना स्रोत

ज्योति भड़ाना

पाठ्य विस्तार

चैट जी.पी.टी.

✍️ प्रस्तुति



📍स्थान: देहरादून, उत्तराखंड

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