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✍️ साहित्य संवाद श्रृंखला

लेखनी की शक्ति से समाज को दिशा देतीं माया शर्मा जी से एक प्रेरणास्पद बातचीत

भूमिका 

"जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि"

यह पंक्ति केवल एक कहावत नहीं, बल्कि उन रचनाकारों की सच्चाई है जो समाज की हर हलचल को अपनी अनुभूतियों के माध्यम से शब्दों का आकार देते हैं। साहित्य की यह विधा मात्र मनोरंजन या सौंदर्यबोध की सीमाओं में नहीं बंधी, बल्कि यह एक सामाजिक दर्पण, मार्गदर्शक और चेतना का स्वर बन जाती है। ऐसे ही एक समर्पित और सजग साहित्यकारा हैं माया शर्मा, जिनकी लेखनी वर्षों की तपस्या के बाद अब समाज में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही है।

यह साक्षात्कार न केवल उनके रचनात्मक जीवन की यात्रा को उजागर करेगा, बल्कि यह एक सेतु बनेगा पाठकों, संवाददाता और उन सभी साहित्यिक मंचों के बीच, जिन्होंने इस प्रतिभा को पहचाना और निखारने में सहयोग किया। आइए, इस संवाद के माध्यम से माया जी की सोच, उनके लेखन कौशल और साहित्यिक योगदान को और गहराई से जानें।

परिचय

माया शर्मा—एक सहज, संवेदनशील और सतत लेखन साधना में रत कवयित्री। बचपन से ही कलम के प्रति आकर्षण और भावनाओं को शब्द देने की अद्भुत क्षमता। वर्षों तक उनकी रचनाएँ केवल डायरी के पन्नों में ही सिमटी रहीं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने जयपुर की पत्रिका दी ग्राम टुडे, अजमेर लेखिका मंच, और दी कंट्री ऑफ इंडिया जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के माध्यम से साहित्य की मुख्य धारा में अपनी पहचान बनाई। राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा स्वीकृत उनका काव्य संग्रह 'दास्तां ए ज़िंदगी' उनके अब तक के सृजन का सुंदर प्रतिबिंब है।

लेखन कौशल आधारित बातचीत

प्रश्न 1: आपकी लेखन यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? क्या कोई विशेष प्रेरणा रही?

माया शर्मा: लेखन की शुरुआत तो बहुत छोटी उम्र में ही हो गई थी। जब भी कुछ मन को छू जाता—कोई दृश्य, कोई घटना या एक भावनात्मक क्षण—मैं उसे कागज़ पर उतार देती थी। ये शब्द मेरे अपने थे, जो धीरे-धीरे कविता, कहानी और भावनाओं में ढल गए। बचपन में ही मैंने महसूस किया कि मेरी कलम मेरे भावों की सबसे सच्ची साथी है।

प्रश्न 2: इतने वर्षों तक आपने अपनी रचनाएँ केवल डायरी तक सीमित रखीं, फिर उन्हें प्रकाशित करवाने की प्रेरणा कैसे मिली?

माया शर्मा: कभी आत्मविश्वास की कमी, कभी मंच की अनुपस्थिति—शायद यही वजह रही कि मेरी रचनाएँ वर्षों तक डायरी में ही रही। परंतु जब जयपुर की पत्रिका द ग्राम टुडे में पहली बार मेरी कविता प्रकाशित हुई, तो एक आत्मबल मिला। इसके बाद अजमेर लेखिका मंच से जुड़ने का अवसर मिला, जहाँ मुझे न केवल मंच मिला, बल्कि मधु खंडेलवाल जी जैसी मार्गदर्शिका भी मिलीं, जिनके प्रोत्साहन ने मेरी लेखनी को नई दिशा दी।

प्रश्न 3: आपकी पुस्तक “दास्तां ए ज़िंदगी” में कौन-कौन से विषय प्रमुख हैं?

माया शर्मा: इस काव्य संग्रह में मैंने जीवन के विविध पक्षों को छूने का प्रयास किया है। इसमें तीज-त्योहारों की सांस्कृतिक छवियाँ हैं, नारी की आंतरिक शक्ति है, समाज के यथार्थ का प्रतिबिंब है। मैंने नारी के भीतर के द्वंद्व, उसकी चेतना, और समय आने पर उसके प्रचंड रूप को भी शब्द दिए हैं। समाज को यह संदेश देना चाहा है कि नारी को कमज़ोर समझने की भूल न करें।

प्रश्न 4: आपकी लेखनी में सामाजिक सरोकार और नारी विमर्श दोनों स्पष्ट दिखाई देते हैं। यह दृष्टिकोण कैसे विकसित हुआ?

माया शर्मा: मैं जिस समाज में रहती हूँ, वहाँ की स्त्रियों की स्थितियों, संघर्षों और अनुभवों ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। एक स्त्री होने के नाते मैं उनकी मनोदशा को गहराई से महसूस कर सकती हूँ। मेरा मानना है कि साहित्य तभी सार्थक होता है जब वह किसी के भीतर हलचल पैदा करे। मेरी लेखनी उसी हलचल की अभिव्यक्ति है।

प्रश्न 5: साहित्य जगत में आपने अब तक किन-किन अनुभवों से सीखा?

माया शर्मा: साहित्य केवल भावों का खेल नहीं, यह अनुशासन, धैर्य और लगातार सीखने की प्रक्रिया है। आलोचना से घबराना नहीं चाहिए। एक रचनाकार को हर प्रतिक्रिया से कुछ न कुछ सीख मिलती है। मंच पर आकर जो विश्वास मिला, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

प्रश्न 6: भविष्य की कोई योजनाएँ या साहित्यिक आकांक्षाएँ?

माया शर्मा: मैं चाहती हूँ कि मेरी अगली पुस्तक समाज के अनकहे पक्षों पर केंद्रित हो, और उसमें हर वर्ग की अनुभूति समाहित हो। इसके अलावा, मैं नवोदित रचनाकारों के लिए एक साझा मंच तैयार करने का विचार भी रखती हूँ, जिससे उनकी रचनाएँ भी लोगों तक पहुँच सकें।

उपसंहार

माया शर्मा जी की लेखनी न केवल भावों का समंदर है, बल्कि वह समाज के सत्य और चेतना की भी वाहक है। उनके शब्दों में गहराई है, सोच में स्पष्टता और दृष्टिकोण में बदलाव की शक्ति। आज जब साहित्य केवल पठन नहीं, परिवर्तन का माध्यम बन रहा है, तब माया जी जैसी लेखिकाएँ हमारी संस्कृति की नई पहचान बन रही हैं। यह साक्षात्कार उन्हें और उनके लेखन को पाठकों से जोड़ने का एक प्रयास है—जो लेखन को केवल अभिव्यक्ति नहीं, एक मिशन मानते हैं।

सूचना स्रोत

डॉ छाया शर्मा

(स्थानीय सम्पादिका)

उलझन सुलझन (लेडीज विंग)

अजमेर (राजस्थान)

पाठ्य विस्तार

चैट जीपीटी 

प्रस्तुति 



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