भूमिका
प्रेरणा तब जन्म लेती है जब संघर्ष, समर्पण और सिद्धि एक धरातल पर मिलते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने अपनी यात्रा को न केवल लक्ष्य तक पहुँचाया, बल्कि दूसरों को राह दिखाने का कार्य भी किया। ऐसे ही एक व्यक्तित्व हैं श्री गोविन्द नारायण शर्मा, जिन्होंने एक साधारण कृषक परिवार से निकलकर शिक्षा प्रणाली में एक प्रभावशाली स्थान अर्जित किया। यह साक्षात्कार केवल एक अनुभव नहीं, बल्कि एक पीढ़ियों को दिशा देने वाला संवाद है — जिसमें पाठक, संवाददाता और तंत्र — सभी एक साझा मंच पर आकर शिक्षा के मूल्यों और भविष्य के निर्माण में सहभागी बनते हैं।
परिचय
श्री गोविन्द नारायण शर्मा, श्री मोहनलाल शर्मा जी के सुपुत्र, राजस्थान के एक कृषक परिवार से संबंध रखते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनका प्रवेश एक साधक की भांति हुआ और निरंतर श्रम से वे शिखर तक पहुंचे।
* 10 अप्रैल 1996 को वरिष्ठ अध्यापक के रूप में उनकी प्रथम नियुक्ति हुई।
* 2004 में वे प्रधानाध्यापक पद पर चयनित हुए और 28 फरवरी 2004 को राजपत्रित RES अधिकारी के रूप में कार्यग्रहण किया।
* शिक्षा में नेतृत्वकारी भूमिका निभाते हुए 22 जुलाई 2022 को उन्होंने मुख्य ब्लॉक शिक्षाधिकारी का पद संभाला।
* 23 मई 2025 को उन्होंने जिला शिक्षाधिकारी (मुख्यालय प्रारंभिक शिक्षा) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया और आज भी पूर्ण निष्ठा के साथ सेवारत हैं।
करियर निर्माण पर बातचीत
प्रश्न 1: श्री शर्मा जी, आपका शुरुआती सफर एक कृषक परिवार से शुरू होकर शिक्षा विभाग में नेतृत्व तक पहुँचना अत्यंत प्रेरक है। इस यात्रा की नींव आपने कैसे रखी?
उत्तर: "प्रारंभिक जीवन में संसाधन सीमित थे, परन्तु मेरे माता-पिता ने मेहनत की शिक्षा दी। पढ़ाई को एकमात्र साधन माना जिससे जीवन को दिशा मिल सकती थी। इसी सोच ने हर पड़ाव पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।"
प्रश्न 2: शिक्षा क्षेत्र में आने का विशेष कारण क्या रहा?
उत्तर: "शिक्षण मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि समाज निर्माण का माध्यम रहा है। विद्यार्थी के जीवन में परिवर्तन लाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ही मेरा ध्येय रहा है।"
प्रश्न 3: वरिष्ठ अध्यापक से जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारी बनने तक आपने कौन-से मुख्य कैरियर कौशल अपनाए?
उत्तर: "सबसे पहले अनुशासन और निरंतर आत्मविकास। इसके बाद संवाद कौशल, योजना निर्माण और नेतृत्व क्षमता विकसित करनी पड़ी। निर्णय लेना और टीम को साथ लेकर चलना, ये कौशल समय के साथ अनुभव से निखरे।"
प्रश्न 4: वर्तमान में नई पीढ़ी को करियर निर्माण के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर: "सपनों को दिशा दीजिए, मात्र कल्पना न बनाइए। अपने लक्ष्य को पहचानिए, योजनाबद्ध श्रम कीजिए, समय प्रबंधन, तकनीकी दक्षता और नैतिक मूल्यों को साथ लेकर चलिए।"
प्रश्न 5: प्रशासनिक पदों पर कार्य करते हुए आपको कौन-से मूल्य सबसे अधिक उपयोगी लगे?
उत्तर: "पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, और संवेदनशीलता — यही वे तीन स्तंभ हैं जो किसी भी प्रशासक को बेहतर बनाते हैं। यदि हम नीतियों में मानवीय दृष्टिकोण जोड़ें, तो प्रभाव कहीं अधिक स्थायी होता है।"
उपसंहार
श्री गोविन्द नारायण शर्मा जी के अनुभव केवल उनकी उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि शिक्षाजगत को दिशा देने वाले वास्तविक सूत्र हैं। यह संवाद, एक ऐसा दस्तावेज़ है जो शिक्षकों, प्रशासकों, विद्यार्थियों और नीति निर्माताओं — सभी को प्रेरित करता है कि
"करियर निर्माण एक प्रक्रिया है, जिसे समर्पण, धैर्य और निरंतर कौशल विकास से साधा जा सकता है।"
सूचना स्रोत
डॉ छाया शर्मा
(स्थानीय सम्पादिका)
उलझन सुलझन (लेडीज विंग)
अजमेर (राजस्थान)
पाठ्य उन्नयन
चैट जीपीटी
प्रस्तुति



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