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लेखन और समाज के मध्य एक पुल निर्मित कर देने वाली पुष्पा जी

 भूमिका

(श्रीमती पुष्पा क्षेत्रपाल जी से संवाद पर आधारित)

जीवन की सच्ची सुंदरता तब प्रकट होती है जब कोई व्यक्ति अपने अनुभवों, विचारों और कर्मों से समाज को दिशा देने का कार्य करता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायी विभूति हैं श्रीमती पुष्पा क्षेत्रपाल जी, जिनसे संवाद करते समय ऐसा प्रतीत हुआ मानो हम किसी जीवंत पुस्तक के पन्ने पलट रहे हों — जिसमें शिक्षा की दृढ़ता, समाजसेवा की समर्पण भावना, साहित्य की कोमल संवेदना, और आत्मिक साधना की ऊँचाइयाँ समाहित हैं।

यह संवाद मात्र प्रश्न और उत्तर की श्रृंखला नहीं रहा, बल्कि यह एक आत्मीय यात्रा थी, जिसमें लेखिका, समाज और इस व्यक्तित्व के मध्य एक अद्भुत पुल बना। बातचीत के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ कि उनके शब्दों में केवल अनुभव नहीं, बल्कि उन असंख्य लोगों की कहानियाँ भी जीवित हैं, जिनकी सेवा वे निस्वार्थ रूप से कर रही हैं। उनका जीवन — एक प्रेरक ग्रंथ की भाँति — हर उस व्यक्ति को दिशा देता है जो अपने जीवन को समाज, साहित्य और संस्कृति के लिए समर्पित करना चाहता है।

लेखन और समाज के बीच एक पुल बनाकर पुष्पा जी ने सिद्ध किया है कि कलम और कर्म जब एक दिशा में चलते हैं, तो परिवर्तन की गूंज दूर तक सुनाई देती है। जब उन्होंने अपने हवन-सेवा, पर्यावरण-प्रयास, वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता, और युवाओं को प्रेरित करने की बात साझा की, तो लगा कि हर पीढ़ी उनके जीवन से कुछ न कुछ सीख सकती है।

साहित्यकार के रूप में उनके गीत, कविताएँ और ग़ज़लें जहां हृदय को छूती हैं, वहीं एक खिलाड़ी के रूप में उनकी सक्रियता यह सिखाती है कि उम्र कभी प्रतिबंध नहीं होती — संकल्प ही शक्ति है।

यह संवाद केवल पुष्पा जी के व्यक्तित्व का परिचय नहीं, बल्कि एक जीवंत उदाहरण है उस जीवन का, जो शिक्षा से आरंभ होकर सेवा, साधना, और साहित्य तक पहुँचता है। यह भूमिका, उस भावनात्मक सेतु का प्रमाण है, जो संवाददाता, समाज और इस प्रेरक व्यक्तित्व के मध्य जुड़ा — और जो इस साक्षात्कार को केवल एक लेख न रहकर एक अनुभव बना देता है।

परिचय

आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी बहुआयामी व्यक्तित्व से, जिन्होंने शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा और खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। ये हैं – श्रीमती पुष्पा क्षेत्रपाल, जो स्वर्गीय श्री सुरेंद्र क्षेत्रपाल जी की धर्मपत्नी हैं। शिक्षिका के रूप में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह समाजसेवा, साहित्य और आत्मिक साधना को समर्पित कर दिया। वे गीत, कहानी, कविता और ग़ज़ल की सशक्त रचनाकार हैं और आज भी लेखन और समाज के लिए सक्रिय हैं।

आइए जानते हैं उनके प्रेरणादायक जीवन और अनुभवों की कहानी उन्हीं की जुबानी।

बातचीत

प्रश्न: पुष्पा जी, आपका स्वागत है। सबसे पहले आप हमें अपने साहित्यिक और सामाजिक जीवन की शुरुआत के बारे में बताइए।

उत्तर: धन्यवाद। मैंने एक शिक्षिका के रूप में अपना कार्य प्रारंभ किया और सेवानिवृत्ति के बाद समाजसेवा की ओर पूरी तरह अग्रसर हो गई। मैं गीत, कहानियाँ, कविताएँ और ग़ज़लें लिखती हूँ। साहित्य सृजन मेरे लिए आत्मा की अभिव्यक्ति है, जबकि समाजसेवा मेरे जीवन का उद्देश्य बन गया है।

प्रश्न: आपने किन-किन संस्थाओं के माध्यम से समाजसेवा का कार्य किया है?

उत्तर: मैं जय अंबे वृद्ध आश्रम, लाडली घर दृष्टिबाधित आवासीय विद्यालय, आर्य समाज, और रेलवे स्काउटिंग जैसी संस्थाओं से जुड़कर सेवा कर रही हूँ। आर्य समाज से जुड़कर हवन के प्रचार का कार्य करती हूँ – घर-घर जाकर नि:शुल्क हवन करती हूँ। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिक संस्था की समूह संयोजिका भी हूँ।

प्रश्न: आप आध्यात्मिक और पर्यावरणीय जागरूकता के लिए भी सक्रिय हैं, इसके बारे में बताइए।

उत्तर: जी हाँ। प्रतिदिन सुबह प्रभात फेरी निकालती हूँ जिससे लोगों में आध्यात्मिक चेतना जागे। साथ ही मैं साइकिल चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हूँ – यह मेरा छोटा-सा प्रयास है स्वच्छ और शुद्ध वातावरण की दिशा में।

प्रश्न: यह जानकर आश्चर्य होता है कि आप खेलों में भी सक्रिय हैं। कृपया अपने अनुभव साझा करें।

उत्तर: खेल हमेशा से मेरी रुचि का विषय रहे हैं। फरवरी 2024 में आयोजित युवरानी राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में मैंने एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीते। 2025 में भी रजत और कांस्य पदक प्राप्त किए। मैं आज भी सक्रिय रूप से खेल में भाग लेती हूँ और प्रतिदिन सुबह डेढ़ घंटे योग करती हूँ।

प्रश्न: आपने साहित्य के क्षेत्र में भी कई सम्मान प्राप्त किए हैं।

उत्तर: जी हाँ। लेखिका मंच द्वारा लघुकथा और कविता में मुझे सम्मानित किया गया। शब्द सागर संस्था ने भी लघुकथा के लिए सम्मान दिया। यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।

प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति देना भी एक विशेष उपलब्धि है।

उत्तर: बिल्कुल। अजमेर लेखिका मंच की संस्थापिका और समाजसेवी डॉ. मधु खंडेलवाल जी के निर्देशन में मुझे मॉरीशस हिंदी सचिवालय और मॉरीशस यूनिवर्सिटी में प्रस्तुति देने का सौभाग्य मिला। साथ ही महासचिव श्रीमती माधुरी जी के निवास स्थान पर हवन करने का शुभ अवसर भी मिला। ये अनुभव अविस्मरणीय रहे।

प्रश्न: नाट्य मंचन में भी आपकी भागीदारी रही है?

उत्तर: जी हाँ। अजमेर नाट्य वृद्धि संस्था द्वारा आयोजित नाट्य दिवस पर पौराणिक पात्र मीरा की भूमिका के लिए मुझे पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह मेरे लिए एक भावनात्मक उपलब्धि रही।

प्रश्न: प्रशासनिक स्तर पर भी आपकी सराहना हुई है।

उत्तर: जी, अजमेर जिलाधीश द्वारा 25 जनवरी 2024 को मतदान प्रचार के लिए मुझे सम्मानित किया गया। 2025 में "अजमेर देगा वोट" कार्यक्रम में वरिष्ठ वर्ग में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।

प्रश्न: आपके अनुसार अब आगे की दिशा क्या है?

उत्तर: लेखन के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करना बाकी है। भूटान महोत्सव में आमंत्रित होकर मैंने गर्व महसूस किया और यह मेरे लिए एक नई प्रेरणा बना है। अब मैं अपने साहित्यिक योगदान को और भी सशक्त रूप में आगे बढ़ाना चाहती हूँ।

प्रश्न: पुष्पा जी, आपका जीवन विविधताओं और प्रेरणाओं से भरा है। आपने जिस उत्साह, समर्पण और साधना से जीवन को जिया है, वह हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। इस आत्मीय बातचीत के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

उत्तर: आपका भी आभार कि आपने मुझे अपने विचार साझा करने का अवसर दिया। मैं यही चाहती हूँ कि मेरे कार्यों से समाज में सकारात्मक बदलाव आए। धन्यवाद।

सूचना स्रोत


डॉ छाया शर्मा 
स्थानीय सम्पादिका 
उलझन सुलझन (लेडीज विंग) 
अजमेर राजस्थान 
पाठ्य उन्नयन और विस्तार
चैट जीपीटी 
प्रस्तुति 




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