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बहुआयामी व्यक्तित्व की स्वामिनी हैं डॉ. रंजना जी

 भूमिका

समाज में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनका जीवन स्वयं में एक प्रेरणास्रोत बन जाता है। कला, साहित्य, शिक्षा, समाजसेवा और ज्योतिष जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए वे समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। डॉ. रंजना जी ऐसा ही एक नाम हैं, जिन्होंने नारी शक्ति को सशक्त रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत किया है।

परिचय

डॉ. रंजना जी ने एम.ए. ड्रॉइंग एंड पेंटिंग तथा इतिहास में किया, तत्पश्चात पत्रकारिता की ओर रुख किया। शिक्षा जगत में हैड मिस्ट्रेस के रूप में किशनगढ़ से सेवा निवृत्त होने के पश्चात भी वे सक्रिय रूप से समाजसेवा में लगी हैं। साहित्य, चित्रकला, ज्योतिष और पत्रकारिता में उनका समर्पण अनुकरणीय है। ‘कौस्तुब ज्योतिष’ के नाम से अजमेर में स्थापित उनके कार्यालय में प्रत्येक रविवार को नि:शुल्क परामर्श शिविर का आयोजन होता है। वे वर्ल्ड ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन की उपाध्यक्ष हैं तथा जयपुर आवाज़ न्यूज़ से भी जुड़ी हुई हैं। ज्योतिष विषय में पीएच.डी. प्राप्त कर चुकीं डॉ. रंजना जी को दुबई, दिल्ली, जयपुर, लाडनू व उदयपुर में सम्मान मिल चुका है।

प्रश्नोत्तर सत्र

प्रश्न 1: आपके जीवन में शिक्षा, कला, पत्रकारिता और ज्योतिष जैसे इतने विविध विषयों को एक साथ साधने की प्रेरणा कहाँ से मिली?

उत्तर: "मैंने हमेशा माना है कि जीवन एक बहुरंगी चित्र है, और हर रंग का अपना महत्व होता है। मेरी रुचियाँ प्रारंभ से ही बहुआयामी थीं – चित्रकला और इतिहास से लेकर समाजसेवा व अध्यात्म तक। इन सभी को साथ लेकर चलने का श्रेय मेरे परिवार और शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने हमेशा प्रोत्साहित किया।"

प्रश्न 2: शिक्षा जगत में इतने वर्षों तक योगदान देने के बाद अब ज्योतिष और समाजसेवा की ओर कैसे मुड़ीं?

उत्तर: "सेवा का भाव कभी सेवानिवृत्ति नहीं लेता। शिक्षक रहते हुए भी मैंने समाज से जुड़े विषयों में दिलचस्पी ली। ज्योतिष मेरे लिए केवलमात्र भविष्य बताने का माध्यम नहीं, बल्कि मार्गदर्शन और चेतना का एक विज्ञान है। इसी सोच के साथ ‘कौस्तुब ज्योतिष’ की स्थापना की, जिससे समाज को निःशुल्क परामर्श और समाधान मिल सके।"

प्रश्न 3: आपकी ज्योतिष पुस्तक का विमोचन दुबई में हुआ। यह अनुभव कैसा रहा?

उत्तर: "यह मेरे लिए गौरव का क्षण था। दुबई में मेरी पुस्तक को जो सम्मान मिला, उसने मेरे आत्मविश्वास को नई उड़ान दी। यह साबित करता है कि अगर निष्ठा से काम किया जाए, तो सीमाएं कोई मायने नहीं रखतीं।"

प्रश्न 4: आपने ‘सहिबे कलम’ पुस्तक में शरतचंद्र चट्टोपाध्याय पर लेख लिखा है। साहित्य से यह जुड़ाव कैसे बना?

उत्तर: "शरतचंद्र जी जैसे लेखक मेरे आदर्श रहे हैं। उनका समाज के प्रति दृष्टिकोण और मानवीय संवेदनाओं को उकेरने की शैली मुझे हमेशा प्रेरित करती रही। इसी प्रेरणा से मैंने ‘सहिबे कलम’ में अपने विचार साझा किए।"

प्रश्न 5: एक सफल महिला के रूप में आज की नारी को क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर: "मैं यही कहूँगी कि खुद को किसी एक पहचान तक सीमित न रखें। स्त्री में अपार संभावनाएँ होती हैं—चाहे वह कला हो, शिक्षा हो या आध्यात्म। हर क्षेत्र में अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को समर्पित करें। समाज की सोच से ज़्यादा ज़रूरी है आपकी खुद की सोच।"

प्रश्न 6: भविष्य की कोई विशेष योजना?

उत्तर: "मेरा लक्ष्य है कि ज्योतिष को एक वैज्ञानिक और जीवनोपयोगी विषय के रूप में प्रचारित करूँ, जिससे लोगों में जागरूकता आए। साथ ही, युवा पीढ़ी को इसका सही रूप सिखाने हेतु ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविरों का विस्तार करना चाहती हूँ।"

प्रश्न ७. आपकी भावी योजनाएं क्या हैं?

उत्तर: "आगे की योजनाओं में प्राथमिकता के रूप में ज्योतिष विषय को अजमेर विश्वविद्यालय में मान्यता दिलवाने है जिसके लिए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय अजमेर के कुलपति महोदय से बातचीत चल रही है और शीघ्र सफलता की संभावना है सामाजिक कार्यों में पीड़ित महिला में पुरुषों की मदद करना कार्यालय संबंधी कार्यों में उन्हें कई परेशानियां आती है और कई नियमों की जानकारी से वंचित है उन्हें मार्गदर्शन करना अभी हाल ही में पहलगाम की घटना के बाद लिखी एक काव्य रचना प्रस्तुत करती हूं रणचंडी ने हुंकार भरा गोलियों की बौछार भरा जिसमें स्वदेश का प्यार भरा मानो सिंदूर मांग का भरा ऑपरेशन सिंदूर की खातिर ध्वजों में लिपटा तन लहू से भरा ना दूध देंगे ना खीर देंगे ना ही अब नीर देंगे बूंद बूंद को तरसा देंगे नजर उठाते ही चीर देंगे हम भी सच्चे हिंदुस्तानी ऐसा ही अब काम करें मिलकर आज सैनिकों का हृदय से सम्मान करें चड हिमालय की चोटी पर झुक कर उन्हें सलाम करें झुक कर उन्हें सलाम करें झुक कर उन्हें सलाम करें ।

सूचना स्रोत

डॉ छाया शर्मा

प्रस्तुति



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