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प्रधानाचार्य श्री धर्मराज गुर्जर जी से विद्यालय का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत आने पर प्रेरणादायी बातचीत

 भूमिका

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, घांस (टोंक) के प्रधानाचार्य श्री धर्मराज गुर्जर जी एक ऐसे शिक्षाविद हैं जिनका नाम समर्पण, अनुशासन, और पर्यावरण प्रेम से जुड़ा है। आपने अपने सेवा काल में स्वामी विवेकानंद राजकीय मांडल स्कूल, टोडा रायसिंह को न केवल प्रशासनिक उत्कृष्टता दी, बल्कि विद्यालय परिसर में पर्यावरण की अलख भी जगाई। विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर श्री गुर्जर जी का शिक्षण और नेतृत्व, दोनों ही विद्यार्थियों व समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। अंत्योदय फाउंडेशन व साहित्य मंच के सहयोग से ‘खिलौना बैंक’ की स्थापना जैसी पहलें उनकी दूरदृष्टि और बालकों के प्रति प्रेम को दर्शाती हैं। इस साक्षात्कार के माध्यम से हम उनके दृष्टिकोण, अनुभवों और कार्यशैली को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

साक्षात्कारकर्ता के द्वारा प्रधानाचार्य का परिचय

आदरणीय, श्री धर्मराज गुर्जर जी मेरे चिरपरिचित रहे हैं। आपका सराहनीय सेवाकाल स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, टोडा रायसिंह में प्रधानाचार्य पद पर रहा है। आप विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर हैं। अनुशासनप्रिय, समयबद्ध, कर्तव्य निष्ठ, सेवाभावी, शालीन, पर्यावरण प्रेमी रहे हैं।

आज भी आपके द्वारा रोपित पौधे वृक्ष बन गए हैं। यहां से आप स्थानांतरित होकर घांस विद्यालय में चले गए।

वहाँ पर भी विद्यालय की दशा सुधारकर अनेक पौधे रोपित किए गए। स्कूल का नामांकन बढ़ा कर सुव्यवस्थित तरीके से अध्यापन कार्य करवाया गया।जिसका परिणाम सामने है। गांव वालों की मिलनसारिता से स्कूल का भौतिक विकास करवाया गया। विद्यालय स्टाफ से सामंजस्य रखकर बच्चों के साथ अध्यापन के तहत कठोर परिश्रम करवाया गया। अंत्योदय फाउंडेशन मुम्बई के सहयोग से साहित्य मंच के प्रयास से विद्यालय में खिलौना बैंक स्थापित किया गया । आपका प्रयास सराहनीय एवं प्रेरणादायी रहा है।

बातचीत

प्रश्न 1: श्रीमान, शिक्षा के क्षेत्र में आपका यह सफर कैसे शुरू हुआ?

उत्तर: "मेरा शिक्षा से जुड़ाव बाल्यकाल से ही रहा। विज्ञान में स्नातकोत्तर करने के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि ज्ञान का सबसे सुंदर रूप इसे बाँटना है। यहीं से मेरा शिक्षकीय जीवन शुरू हुआ और आज भी निरंतर सीखते हुए पढ़ा रहा हूँ।"

प्रश्न 2: प्रधानाचार्य के रूप में आपकी भूमिका किस प्रकार की रही?

उत्तर: "एक प्रधानाचार्य का कार्य केवल प्रशासन तक सीमित नहीं होता। मुझे हमेशा यह विश्वास रहा कि अनुशासन, सामंजस्य और प्रेरणा से स्कूल का सर्वांगीण विकास संभव है। मैंने हर स्थान पर इसी सोच के साथ कार्य किया।"

प्रश्न 3: पर्यावरण के प्रति आपका विशेष झुकाव कैसे विकसित हुआ?

उत्तर: "प्रकृति से मेरा जुड़ाव आत्मिक रहा है। जब मैंने स्कूल परिसर में पौधे लगाए और उन्हें बढ़ते देखा, तब समझ आया कि वृक्ष लगाना भी शिक्षा का एक रूप है—धैर्य और समर्पण का।"

प्रश्न 4: घांस विद्यालय में स्थानांतरित होने के बाद आपकी प्राथमिकताएं क्या रहीं?

उत्तर: "सबसे पहले विद्यालय की आधारभूत स्थिति को सुधारना था। सफाई, पौधारोपण, नामांकन में वृद्धि, और अध्यापन की नियमितता पर मैंने विशेष ध्यान दिया। गाँव वालों की सहभागिता ने इसे आसान बना दिया।"

प्रश्न 5: विद्यार्थियों की सहभागिता और प्रदर्शन को कैसे प्रेरित करते हैं?

उत्तर: "मैं बच्चों से मित्रवत संबंध बनाकर उन्हें जिम्मेदारी का अहसास कराता हूँ। प्रेरणादायक उदाहरण, समय का पालन, और व्यक्तिगत संवाद से उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयास करता हूँ।"

प्रश्न 6: ‘खिलौना बैंक’ की स्थापना का विचार कैसे आया?

उत्तर: "बच्चों के सर्वांगीण विकास में खेल की भूमिका अहम होती है। साहित्य मंच के माध्यम से जब अंत्योदय फाउंडेशन से संपर्क हुआ, तो यह पहल संभव हो सकी। बच्चों में रचनात्मकता और सहयोग की भावना विकसित करने का यह एक सुंदर माध्यम बना।"

प्रश्न 7: आपके अनुभव में ग्रामीण विद्यालयों की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

उत्तर: "सुविधाओं की कमी, जागरूकता का अभाव और कभी-कभी अभिभावकों की उदासीनता। लेकिन जब शिक्षक और समाज मिलकर काम करें, तो इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।"

प्रश्न 8: विद्यालय स्टाफ से आप किस प्रकार सामंजस्य बनाए रखते हैं?

उत्तर: "पारदर्शिता, सम्मान और संवाद—ये तीन स्तंभ हैं जिन पर मैं कार्य करता हूँ। हम सभी एक ही लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं—बच्चों का भविष्य, यह भावना हमें जोड़े रखती है।"

प्रश्न 9: आपकी दृष्टि में एक आदर्श प्रधानाचार्य के क्या गुण होने चाहिए?

उत्तर: "अनुशासनप्रियता, संवेदनशीलता, निर्णय क्षमता और टीम वर्क की भावना। उसे न केवल शिक्षक होना चाहिए, बल्कि एक मार्गदर्शक, योजनाकार और समाजसेवी भी होना चाहिए।"

प्रश्न 10: अंत में, नई पीढ़ी के शिक्षकों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर: "शिक्षा एक साधना है, इसे नौकरी न बनाएं। बच्चों को सिर्फ पढ़ाएं नहीं, जीना भी सिखाएं। ईमानदारी, समयबद्धता और समर्पण ही आपको सच्चा शिक्षक बनाएंगे।"

प्रश्न 11: विद्यालय ने सत्र 2024-25 में शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त किया, यह कैसे संभव हो सका?

उत्तर: "यह टीमवर्क, विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और शिक्षकों की समर्पित भावना का परिणाम है। हमने समय से पूर्व पाठ्यक्रम पूर्ण करवाया, नियमित टेस्ट, रिवीजन और अभिभावक संपर्क बैठकों के माध्यम से विद्यार्थियों को निरंतर प्रेरित किया।"

प्रश्न 12: विद्यार्थियों की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें सुधारने के लिए आपने कौन-से उपाय अपनाए?

उत्तर: "हमने विषयवार कमजोर विद्यार्थियों की सूची बनाई, उन्हें विशेष कक्षाएं दीं और सहपाठियों की मदद से उन्हें जोड़ा। इसके अलावा मैं स्वयं भी समय निकालकर विद्यार्थियों से बातचीत करता रहा जिससे उनकी मानसिक स्थिति भी सशक्त बनी रही।"

प्रश्न 13: इस ऐतिहासिक उपलब्धि से आगे की क्या योजनाएं हैं?

उत्तर: "अब लक्ष्य केवल परिणाम नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है। हम चाहेंगे कि हमारे विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लें, संवाद कौशल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक चेतना में भी अग्रणी रहें। हमारा उद्देश्य एक समग्र, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनाना है।"

सूचना स्रोत



श्री शिवराज जी कुर्मी

पाठ्य उन्नयन एवं विस्तार

चैट जीपीटी 

प्रस्तुति






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