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समाज, साहित्य, शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में एक दृढ़ पहचान हैं मधु जी

 भूमिका

लेखन, केवल शब्दों की रचना नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार होती है।  समाज, साहित्य, शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में एक दृढ़ पहचान बना चुकीं डॉ. मधु खण्डेलवाल मधुर का नाम आज प्रेरणा का पर्याय बन चुका है। बाल साहित्य से लेकर सामाजिक संवेदनाओं और थर्ड जेंडर जैसे जटिल विषयों पर लेखन करते हुए उन्होंने न केवल साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि समाज के वंचित वर्गों की आवाज़ भी बनीं। प्रस्तुत है उनके लेखकीय जीवन और शैली पर आधारित एक विशेष साक्षात्कार, जिसमें उनकी सोच, अनुभव और रचनात्मकता के गहरे रंग झलकते हैं।

परिचय

डॉ. मधु खण्डेलवाल मधुर — एक संवेदनशील लेखिका, समाज सेविका और शिक्षिका — वर्तमान में भारतीय जीवन बीमा निगम, अजमेर में उच्च श्रेणी सहायक के पद पर कार्यरत हैं। विज्ञान और हिंदी में शैक्षिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद उनका रुझान साहित्य की ओर प्रारंभ से ही रहा है। छह पुस्तकों का लेखन, जिनमें सुगंध का रहस्य और एक भूल को विशेष पहचान मिली है। बाल साहित्य से लेकर सामाजिक विषयों तक, उनका लेखन विविधता और उद्देश्यपूर्णता से परिपूर्ण है। वे ना केवल साहित्यिक मंचों पर सक्रिय हैं, बल्कि दूरदर्शन, आकाशवाणी, और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की सहभागी भी रही हैं। अजमेर लेखिका मंच की संस्थापिका के रूप में उन्होंने साहित्य से बासठ महिलाओं को जोड़कर सृजनशीलता की नई राह खोली है।

लेखन कौशल पर बातचीत

प्रश्न 1: लेखन की प्रेरणा आपको सबसे पहले कहाँ से मिली?

उत्तर: "लेखन मेरे भीतर स्वाभाविक रूप से बस गया था। बाल्यावस्था में जब भी कोई बात दिल को छूती, तो वह शब्दों में ढलने लगती थी। पिता से मिले संस्कार और माँ से मिली संवेदनशीलता ने मुझे लेखन की दिशा दी।"

प्रश्न 2: आप विज्ञान की छात्रा थीं, फिर हिंदी साहित्य में कैसे कदम रखा?

उत्तर: "विज्ञान ने मुझे तर्क और अनुशासन सिखाया, जबकि हिंदी ने मुझे भावनाओं का विस्तार दिया। लेखन का माध्यम हिंदी रहा क्योंकि वह आत्मा की भाषा है और मेरे विचारों को पूर्णता देती है।"

प्रश्न 3: बाल साहित्य की ओर आपका रुझान कैसे बना?

उत्तर: "बच्चों के मन में कल्पनाओं की अद्भुत दुनिया होती है। सुगंध का रहस्य जैसी पुस्तक के माध्यम से मैं उनकी उसी दुनिया में प्रवेश करना चाहती थी, जिसमें नैतिकता और रोचकता दोनों साथ चलें।"

प्रश्न 4: आपकी पुस्तक एक भूल की सरकारी मान्यता को आप किस रूप में देखती हैं?

उत्तर: "यह मेरे लेखकीय जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। जब सरकार ने इसे राज्य के पुस्तकालयों में रखने का निर्णय लिया, तब महसूस हुआ कि मेरी कलम समाज को दिशा देने में समर्थ है।"

प्रश्न 5: थर्ड जेंडर जैसे संवेदनशील विषय पर लेखन का विचार कैसे आया?

उत्तर: "समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी उपेक्षित है। थर्ड जेंडर का संघर्ष और आत्मसम्मान मुझे बहुत गहराई से छू गया, और लगा कि उनकी कहानी को साहित्य के माध्यम से स्वर देना ज़रूरी है।"

प्रश्न 6: समाज सेवा और लेखन—दोनों में संतुलन कैसे साधती हैं?

उत्तर: "दोनों ही मेरे जीवन के दो पंख हैं। लेखन मुझे आंतरिक शांति देता है, और समाज सेवा बाह्य ऊर्जा। एक दूसरे को पूरक मानकर चलती हूँ।"

प्रश्न 7: आपके लेखन में नारी विषय प्रमुख रूप से उभरता है, क्या यह एक उद्देश्य है?

उत्तर: "हाँ, नारी मेरी रचनाओं का केन्द्र है क्योंकि मैं खुद एक स्त्री हूँ और जानती हूँ कि उसके संघर्ष क्या हैं। मेरा प्रयास है कि हर नारी खुद को मेरी रचनाओं में देख सके।"

प्रश्न 8: अजमेर लेखिका मंच की स्थापना के पीछे कौन-सा विचार था?

उत्तर: "मैं चाहती थी कि साहित्य केवल पुस्तकों तक सीमित न रहे। जब महिलाओं को मंच मिला, तो उनकी प्रतिभा भी सामने आई। यही मेरा उद्देश्य था — एक सृजनशील सामूहिक यात्रा।"

प्रश्न 9: आपको लेखन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती क्या लगती है?

उत्तर: "प्रामाणिकता बनाए रखना। जब आप समाज पर लिखते हैं, तो भावनाओं के साथ-साथ सच्चाई का दायित्व भी होता है।"

प्रश्न 10: नई पीढ़ी के लेखकों के लिए आपका क्या संदेश है?

उत्तर:  "लेखन को लोकप्रियता का माध्यम न बनाएं, बल्कि जिम्मेदारी समझकर लिखें। भावनाओं के साथ तथ्य भी जरूरी हैं। खुद के लिए नहीं, समाज के लिए लिखिए।"

सूचना स्रोत

डॉ छाया शर्मा जी

पाठ्य उन्नयन और विस्तार

चैट जीपीटी 

प्रस्तुति




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