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प्रशासनिक कौशल आधारित बातचीत प्रधानाचार्य शिव जी से

प्रस्तावना

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों में चरित्र निर्माण, सामाजिक चेतना और उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना है। ऐसे ही उद्देश्य को आत्मसात कर कार्य करने वाले प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व हैं — श्री शिवजी लाल बम्बेरवाल।

आपने न केवल एक अनुशासित शिक्षक के रूप में, बल्कि एक प्रशासनिक दृष्टिकोण से सुदृढ़ प्रधानाचार्य के रूप में भी उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं। चाहे समय की पाबंदी हो, स्टाफ समन्वय हो, अभिभावक संवाद हो या पर्यावरण सरंक्षण—बम्बेरवाल जी की कार्यशैली हर क्षेत्र में प्रेरणास्पद रही है।

यह साक्षात्कार उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण, नेतृत्व क्षमता और समर्पित भाव को उजागर करता है, जिससे न केवल शिक्षा जगत के लोग, बल्कि समाज का हर वर्ग प्रेरणा ले सकता है।

परिचय

श्री शिवजी लाल बम्बेरवाल पूर्व में कार्यालय ब्लाक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी -टोडारायसिंह में अतिरिक्त शिक्षा अधिकारी के पद सराहनीय सेवाएं दे चुके थे। इसके बाद केन्द्रीय भेड़ ऊन संस्थान अविकानगर, मालपुरा जिला टोंक में स्थित रा उ मा वि अविकानगर में प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत हैं। अपने स्कूल स्टाफ के साथ मासिक बैठक कर शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।इस पर चर्चा कर निर्णय लेते थे। साथ ही अभिभावकों की भी मासिक बैठक आयोजित की जाती थी। बच्चों की अतिरिक्त कक्षाएं लगा कर सुव्यवस्थित तरीके से अध्यापन कार्य करवाया जाता था। बच्चों के घर अभिभावक सम्पर्क हेतु अपने शिक्षक साथियों को भेजते थे। कभी कभी स्वयं भी अभिभावक सम्पर्क के लिए जाते थे।

बम्बेरवाल जी एक कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित, संवेदनशील, पर्यावरणप्रेमी, दयालु स्वभाव के धनी रहे हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में विद्यालय को हरा-भरा, स्वच्छ बना रखा है। आपके प्रयास से बेजूबान पक्षियों के लिए भीषण गर्मी में परिण्डे बांधे गए हैं।

शाला परिवार की ओर से स्कूली विद्यार्थियों के लिए शीतल जल संस्थान ( प्याऊ) का निर्माण करवा कर स्टाफ साथियों के सहयोग से वाटर कूलर लगाया गया।मैंने भी निर्माण कार्य को देखा है। शारीरिक शिक्षक महोदय के प्रयास से विद्यालय के बालकों ने खेल में नाम रोशन किया है। 

विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने पर भी स्वयं अध्यापन कार्य में सहभागी बने हैं। स्कूल का बेहतरीन परीक्षा परिणाम लाने में विद्यालय परिवार का सक्रिय सहयोग रहा है। इस वर्ष कक्षा 10 एवं 12 का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। जिला स्तर पर इस विद्यालय की कला वर्ग में छात्रा कविता बैरवा ने 98.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर गांव, विद्यालय एवं जिले का नाम रोशन किया है। जिला स्तर पर बालिका प्रोत्साहन योजना के तहत इसे एक स्कुटी एवं एक लाख रुपए देकर सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रधानाचार्य जी ने सत्र की शुरुआत में प्रार्थना सभा में छात्र छात्राओं का मनोबल बढ़ाने के लिए कक्षा 12 में सर्वाधिक अंक लाने वाले विद्यार्थी को शिवजी लाल बम्बेरवाल अपने खर्चे से हवाई जहाज से भ्रमण करायेंगे । प्रधानाचार्य जी की प्रेरणा कामयाब हुई। बालिका कविता बैरवा आगामी दिनों में हवाई सफर करेंगी।सभी शिक्षक गण साधुवाद के पात्र हैं।

साहित्य मंच -टोडारायसिंह द्वारा इस विद्यालय में पत्र लेखन, निबंध, कहानी, चित्रकला आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। बच्चों ने प्रतिभाग कर सफलता हासिल की है।

प्रशासनिक क्षमता आधारित बातचीत

प्रश्न 1: श्रीमान बम्बेरवाल जी, कृपया अपने शैक्षिक व प्रशासनिक सफर की संक्षिप्त जानकारी दें।

उत्तर: "मेरा सफर प्रारंभिक शिक्षा विभाग के टोडारायसिंह ब्लॉक से हुआ, जहाँ मैंने अतिरिक्त शिक्षा अधिकारी के रूप में सेवाएं दीं। वर्तमान में मैं केन्द्रीय भेड़ ऊन संस्थान, अविकानगर स्थित रा.उ.मा.वि. में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हूं।"

प्रश्न 2: एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में आपके अनुसार स्कूल संचालन में सबसे महत्वपूर्ण तत्व क्या है?

उत्तर: "स्कूल संचालन में सबसे जरूरी है टीमवर्क और संवाद। मासिक स्टाफ बैठकें, निर्णयों में भागीदारी, और पारदर्शिता ही स्कूल प्रशासन की रीढ़ हैं।"

प्रश्न 3: आप प्रतिदिन समय पर स्कूल कैसे पहुंचते हैं।

उत्तर: "समय की पाबंदी मेरे लिए एक मूल्य है। स्कूल समय से पहले जानें की आदत बन गई।मेरी कोशिश रही है कि अनुशासन में रहकर ही मैं अपने स्टाफ और छात्रों के लिए प्रेरणा बनूं।"

प्रश्न 4: आपने अभिभावकों के साथ संवाद को किस तरह सशक्त बनाया?

उत्तर: "मासिक अभिभावक बैठकें आयोजित की जाती थीं और शिक्षकों को घर-घर भेजकर संवाद स्थापित कराया गया। कभी-कभी मैं स्वयं भी अभिभावकों से मिलने जाता था।"

प्रश्न 5: प्रशिक्षक संसाधन कम होने पर भी आप कैसे अध्यापन कार्य संभालते थे?

उत्तर: "मैं मानता हूं कि नेतृत्व केवल आदेश देना नहीं, साथ खड़े रहना भी होता है। इसलिए स्वयं कक्षा में जाकर अध्यापन कार्य में हिस्सा लेता था।"

प्रश्न 6: विद्यालय में पर्यावरण के लिए आपने क्या पहल की?

उत्तर: "स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, पक्षियों के लिए परिण्डे बांधना जैसे कार्य किए गए। विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ना मेरा उद्देश्य रहा है।"

प्रश्न 7: स्कूल में जल प्याऊ की स्थापना की प्रेरणा कहां से मिली?

उत्तर: "भीषण गर्मी में बच्चों की स्थिति देखकर विद्यालय परिवार के साथ मिलकर यह निर्णय लिया। सामाजिक सहभागिता से यह कार्य संभव हुआ।"

प्रश्न 8: बच्चों की अतिरिक्त कक्षाएं लगवाने का निर्णय किस सोच से लिया गया?

उत्तर: "मेरी सोच रही है कि प्रत्येक बच्चा पीछे न रह जाए। अतिरिक्त कक्षाएं विद्यार्थियों को आत्मविश्वास देती हैं और परिणाम बेहतर होते हैं।"

प्रश्न 9: साहित्यिक गतिविधियों के आयोजन से विद्यार्थियों को क्या लाभ होता है?

उत्तर: "रचनात्मकता का विकास होता है। निबंध, पत्र लेखन, चित्रकला जैसी गतिविधियाँ बच्चों की अभिव्यक्ति शक्ति को बढ़ाती हैं।"

प्रश्न 10: अंत में, एक सफल स्कूल प्रशासन हेतु आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर: "एकता, पारदर्शिता, संवेदनशीलता और सेवा-भाव—यदि ये चार आधार बने रहें, तो कोई भी संस्थान उत्कृष्टता की ओर अग्रसर हो सकता है।"

सूचना स्रोत


श्री शिवराज जी कुर्मी

पाठ्य उन्नयन एवं विस्तार 

चैट जीपीटी 

प्रस्तुति

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