सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मेहनत और समर्पण से व्यक्तित्व निर्मित करने वाली हर्षा कल्याणी

परिचय

हर्षा कल्याणी शैलेन्द्र बंसोडे, कोपरगांव, महाराष्ट्र की एक प्रतिभाशाली और प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। मिस हेरिटेज इंटरनेशनल 2024 में उन्होंने तीस देशों के बीच द्वितीय रनर अप का स्थान हासिल किया। साथ ही 'सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा' और 'क्वीन ऑफ़ हार्ट्स' जैसे प्रतिष्ठित उपाधियाँ प्राप्त कीं। इसके अलावा, वे मिस हेरिटेज इंडिया का गौरव भी प्राप्त कर चुकी हैं। फैशन और मॉडलिंग जगत में भी उनकी विशेष पहचान है, वे NIFD ब्रांड की मॉडल हैं और मल्होत्रा फैशन शो तथा SSK के वार्डरोब फैशन शो के लिए रैंप पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धियाँ न केवल उनके व्यक्तित्व की चमक को दर्शाती हैं, बल्कि आगामी पीढ़ी के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।

संक्षिप्त बातचीत

प्रश्न १. आप पहले कहाँ जॉब करती थीं और आपने यह क्षेत्र क्यों चुना? 

उत्तर - "मैं आरम्भ से ही फ्रीलांस मॉडलिंग करती हूँ और मुझे अपना कल्चर ऑन हेरिटेज रिप्रेजेंट करना था तथा मैं कैमरे के सामने रहना पसंद करती हूं इसीलिए मैंने यह प्रोफेशन चुना।"

प्रश्न २. आपकी एजुकेशन कहाँ तक है?

उत्तर - "मैं 'मानव संसाधन' विषय में एमबीए हूँ।"

प्रश्न ३. आपका जीवन लक्ष्य क्या है?

उत्तर - "मुझे भविष्य में एक बड़ी मॉडल बनना है और छोटे शहर की लड़कियों को इस प्रोफेशन के लिए प्रेरित करना है।"

प्रश्न ४. क्या आपके परिवार ने आपका मनोबल बढ़ाया इस क्षेत्र में आने के लिए?

उत्तर - "येस, मेरे परिवार ने मेरा बहुत मनोबल बढ़ाया और मैं उम्मीद करती हूं कि हर लड़की को उसका परिवार ऐसे ही सपोर्ट करे।"

सूचना स्रोत

ज्योति भड़ाना (सम्पादिका)

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...