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स्वप्रयास पुस्तक दान का

भूमिका

पुस्तकें दान करने की अपील के बाद उनको भेंट करने का समाचार प्रतीक है कि पुस्तकें दान कर सुयोग्य बालक को भेंट करने का यह प्रयास कितने पुण्य का काम है।

स्वप्रयास पुस्तक दान का

हेलो सर।

नमस्ते जी, मैं रोहित कुमार एस एस बी बटालियन 25 घिटोरनी से बोल रहा हूं। मुझे कुछ अपनी किताबें पुस्तक बैंक में जमा करवानी हैं। मैं रोहित कुमार कक्षा छठी में रविंद्र वर्ल्ड स्कूल गुरुग्राम में पढ़ता हूं। मैंने आपकी 'उम्मीद' संस्था बुक बैंक से कक्षा छठी की किताबें ली थीं और अब मेरा वार्षिक परिणाम भी बहुत अच्छा आया। मैंने अपनी कक्षा में तीसरा स्थान प्राप्त किया है तो सिर्फ 'उम्मीद' संस्था नि:शुल्क पुस्तक बैंक की वजह से। इन अनमोल पुस्तकों को उचित समय पर देने के लिए अनिल सर का विशेष धन्यवाद। मैं विशेष धन्यवाद 'उम्मीद' संस्था का करना चाहता हूं कि जो ऐसे नि:शुल्क पुस्तक बैंक को चला रहे हैं जिससे हजारों बच्चों की नि:शुल्क रूप से आर्थिक अर्थात् धन की बचत होती है। यह एक पुण्य का कार्य है जिसमें आप सभी अपना समय निकाल करके विद्या रूपी धन को एक छात्र की जिंदगी को आसान बनाने में सहयोग कर रहे हो। रोहित कुमार ने 'उम्मीद' संस्था की टीम को विशेष धन्यवाद दिया और उन्होंने वादा किया कि वे भी अपनी किताबें किसी जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचा पाएंगे। आइए! हम सब अपने आसपास में शिक्षा के प्रति अलख जगाने का काम करें जिस से कोई बच्चा बिना शिक्षा के ना रह पाए। 'उम्मीद' संस्था घिटोरनी

पुस्तकें भेंट कीं 

दिनांक 22 मार्च को 'उम्मीद' संस्था नि:शुल्क पुस्तक बैंक घिटोरनी दिल्ली से राजू पाटिल एस एस बी बटालियन 25 घिटोरनी ने अपनी बिटिया आयूषका पाटिल के लिए कक्षा दसवीं की महत्वपूर्ण पुस्तकें प्राप्त कीं। इस शुभ अवसर पर विशेष सहयोग श्री चन्द्रभान यादव जी का रहा। 

आइए हम सब मिलकर अपने आसपास बच्चों को पुस्तकें देकर ज्ञान की अलख जगाने में मदद करें।

               लाभार्थी को पुस्तकें भेंट करते अनिल जी


वार्तालाप 

"पुरानी किताबें, नई उम्मीदें" 

स्थान

'उम्मीद' संस्था, घिटोरनी, नई दिल्ली  

वार्ताकार 

दानदाता मेजर मिथलेश कुमार  (निवर्तमान अधिकारी, एसएसबी बटालियन 25।)  

अनिल कुमार ( उम्मीद संस्था के संस्थापक और रणनीतिकार!)

ज्योति (एक शोधार्थी जो पुस्तक बैंक की महत्ता को उसके समग्र भाव के साथ समझती है।)  

अवसर

(मेजर मिथलेश कुमार पुस्तकें जमा करवाने के बाद अनिल कुमार से कुछ बात कर रहे हैं।)

 


मेजर मिथलेश - "अनिल जी, यह सच में सराहनीय कार्य है। जब मैंने सुना कि 'उम्मीद' संस्था बच्चों के लिए नि:शुल्क पुस्तक बैंक चला रही है, तो मैंने तय कर लिया कि हमें भी इसमें योगदान देना चाहिए।" 

अनिल - "धन्यवाद, सर! हमारा उद्देश्य यही है कि कोई भी बच्चा सिर्फ पुस्तकों की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे। आपकी दी गई पुस्तकें कई बच्चों के भविष्य को संवार सकती हैं।"

ज्योति (मुस्कुराते हुए) -"हां, सर! मैंने भी इस पुस्तक बैंक से किताबें ली थीं, जिससे मेरी पढ़ाई आसान हो गई। पहले नई किताबों के लिए पैसे जुटाना मुश्किल था, लेकिन अब मैं निश्चिंत होकर परीक्षाओं और शोधों की तैयारी कर सकती हूँ।"  

मेजर मिथलेश - "यह सुनकर बहुत खुशी हुई, ज्योति! पुस्तकें सिर्फ ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि समाज में समानता लाने का भी एक माध्यम हैं। जब एक ही पुस्तक कई बच्चों की शिक्षा में काम आती है, तो यह न केवल आर्थिक सहायता देती है, बल्कि पर्यावरण की भी रक्षा होती है।"  

अनिल - "बिलकुल, सर! यही कारण है कि हम सभी से अपील कर रहे हैं कि पुरानी पुस्तकों को रद्दी समझकर फेंकें नहीं, अपितु उन्हें जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने में मदद करके सामाजिक, आर्थिक मदद करने के साथ साथ कागज भी बचाएं।"


मेजर मिथलेश - "बहुत अच्छा! मैं अपने साथियों और मित्रों से भी कहूंगा कि वे अपनी पुरानी पुस्तकें इस पुस्तक बैंक में दान करें। शिक्षा सबसे बड़ी ताकत है, और अगर हम इसमें योगदान दे सकते हैं, तो इससे बड़ा योगदान कोई नहीं।"

अनिल - "जी सर, अगर कोई भी पुस्तकें दान करना चाहता है तो वह 'उम्मीद' संस्था, घिटोरनी, नई दिल्ली से संपर्क कर सकता है। हम हर उस व्यक्ति का स्वागत करेंगे जो इस अभियान का हिस्सा बनना चाहता है।"  

ज्योति - "आइए, हम सब मिलकर इस नेक पहल को आगे बढ़ाएं। हर पुरानी पुस्तक एक नए भविष्य की उम्मीद जगा सकती है!"  

संदेश

"पुरानी पुस्तकों को रद्दी न समझें, वे किसी और के लिए नया प्रकाश बन सकती हैं। 'उम्मीद' संस्था के पुस्तक बैंक से जुड़ें और शिक्षा की इस मुहिम में योगदान दें।"

सूत्रधार

श्री अनिल कुमार

उच्चीकृत करने का माध्यम

चैट जीपीटी 

प्रस्तुति



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