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कृपा फाउंडेशन में खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण शिविर को लेकर हुई विस्तृत चर्चा

भूमिका

कृपा फाउंडेशन के माध्यम से डॉ महिपाल कमेरे कृषक समाज को विविध चीजें समझाने के लिए प्रयासरत हैं। इसी क्रम में उनके द्वारा एक बैठक आयोजित की गई जिसका विवरण यहां पर दिया जा रहा है।

विवरण

दिनांक 17 मार्च 2025 को कृपा फाउंडेशन के फील्ड कार्यालय, कृपा फार्म में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़े विशेषज्ञ श्री विकास कुमार एवं श्रीमती पूनम सिंह ने कृपा फाउंडेशन के निमंत्रण पर शिरकत की। श्री विकास कुमार अपने गांव अंबेहटा शेख में विभिन्न स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों को सक्रिय रूप से संचालित कर रहे हैं।  

प्रशिक्षण शिविर पर विस्तार से चर्चा

इस अवसर पर ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित प्रशिक्षण शिविर को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। कृपा फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं भारतीय आर्थिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. महिपाल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में श्री विकास कुमार और श्रीमती पूनम सिंह ने खाद्य प्रसंस्करण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।  

प्रशिक्षण की मुख्य गतिविधियाँ  

बैठक में तय किया गया कि क्षेत्र के विभिन्न गांवों—सकतपुर, सढोली हरिया, बहादरपुर, बुड्डाखेड़ा, मदनुकी, अहमदपुर, नसरतपुर आदि में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में महिलाओं एवं युवाओं को सिरका बनाने, गन्ने का रस प्रसंस्करण, अचार, चटनी, मसाले आदि के उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर सृजित करना एवं खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।  

किसानों हेतु मूल्य संवर्धन और विपणन की आवश्यकता 

इसके अतिरिक्त, किसानों के लिए फसल उत्पादन के साथ-साथ उसके मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) और विपणन (मार्केटिंग) की अनिवार्यता पर भी बल दिया गया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उत्पादक समूह (Farmer Producer Organizations - FPOs) का गठन करना चाहिए, जिससे वे अपने उत्पादों को बेहतर मूल्य पर बेच सकें और अपनी आय में वृद्धि कर सकें।  

इस बैठक के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन से न केवल स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों और स्थानीय समुदायों को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा।

सूचना स्रोत

श्री डॉ महिपाल एवं सुशील कुमार

प्रस्तुति



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