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होली के मूल भाव को समझाने का प्रयास

भूमिका

फरीदाबाद स्थित माई छोटा स्कूल के प्रबंध तंत्र ने छोटे बालकों के साथ होली मनाई तो उसने होली के मूल भाव पर अधिक ध्यान देते हुए उसकी सीमाओं से बालकों को अवगत कराया। यह सब ही को जानना और समझना चाहिए।

विवरण

माई छोटा स्कूल, सेक्टर 49, फरीदाबाद में
12 मार्च को हर्षोल्लास के साथ होली महोत्सव मनाया गया।

इस अवसर पर बच्चों को होली के सही मायनों और सुरक्षित व संयमित तरीके से होली खेलने की शिक्षा दी गई। कार्यक्रम में जो महत्वपूर्ण बातें बालकों को बताई गईं, वो सभी आयु के लोगों के लिए सीखने योग्य हैं - 

पानी की बचत और महत्ता

बच्चों को समझाया गया कि होली पर जरूरत से ज़्यादा पानी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पानी जीवन के लिए अनमोल है, इसलिए सभी को सूखी होली या सीमित पानी के उपयोग की सलाह दी गई।

सभी आयु वर्गों के लिए संदेश

  • बच्चे - केवल रंगों से होली खेलें, पानी की बर्बादी न करें।
  • युवा है - दूसरों को भी पानी बचाने के लिए प्रेरित करें।
  • बड़े-बुजुर्ग - समाज को पानी की बचत के लिए मार्गदर्शन दें।

सुरक्षित रंगों का उपयोग

बच्चों को बताया गया कि हर्बल और प्राकृतिक रंग त्वचा के लिए सुरक्षित होते हैं। बाजार के पक्के और रसायनों युक्त रंगों से त्वचा, आंख, और बालों को नुकसान हो सकता है।

सभी आयु वर्गों के लिए संदेश

  • बच्चे - घर के बने फूलों या हल्दी से बने रंगों से होली खेलें।
  • युवा - खुद रंग बनाना सीखें और दोस्तों के बीच जागरूकता फैलाएं।
  • बड़े - बुजुर्ग - घर में बच्चों के लिए हर्बल रंग तैयार करें।

पक्के और रासायनिक रंगों से हानि

बच्चों को बताया गया कि गंदे, तेज़ और रासायनिक रंगों से त्वचा पर एलर्जी, खुजली, आंखों में जलन, और अन्य बीमारियाँ हो सकती हैं। इसलिए हमेशा हल्के, सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करें।

होली खेलने का सही तरीका

बच्चों को सिखाया गया कि किसी की अनुमति के बिना उसको रंग न लगाएं। जबरदस्ती रंग खेलना गलत है। दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना भी होली का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

सभी आयु वर्गों के लिए संदेश

  • बच्चे - पहले "क्या मैं आपको रंग लगा सकता/सकती हूँ?" पूछना सीखें।
  • युवा - नशे से दूर रहें, और मर्यादा में रहकर होली खेलें।
  • बड़े - बुजुर्ग - बच्चों को संयमित और सौहार्दपूर्ण होली खेलना सिखाएं।

होलिका दहन का महत्व

बच्चों को होलिका दहन की पौराणिक कथा सुनाई गई और यह समझाया गया कि अहंकार, बुराई और नकारात्मकता को जलाने का प्रतीक है होलिका दहन। इससे सत्य, प्रेम, और अच्छाई की जीत का संदेश मिलता है।

एकता और भाईचारे का संदेश

कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों और शिक्षकों ने मिल-बाँटकर मिठाइयाँ खायीं और भोजन किया। एकता, प्रेम और आपसी सहयोग का पाठ पढ़ाया गया।

रंगों की पहचान संबंधी गतिविधि

बच्चों को अलग-अलग रंग दिखाकर रंगों की पहचान कराई गई। रंगों के नाम, उनके महत्व और उनसे जुड़ी प्रकृति की जानकारी दी गई।


होली के सामान्य नियम 

  1. पानी की बचत करें।
  2. हर्बल और सुरक्षित रंगों का ही प्रयोग करें।
  3. अनुमति लेकर ही रंग लगाएँ।
  4. किसी की भावना को ठेस न पहुँचाएँ।
  5. बड़ों और छोटे सभी के साथ प्रेम और सम्मान से पेश आएँ।
  6. शोर, गंदगी और नशा करने से बचें।
  7. होली को सौहार्द, भाईचारे और प्रेम के साथ मनाएँ।

चित्रदीर्घा





सूचना स्रोत
ज्योति भड़ाना
प्रस्तुति




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