सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

नींव संस्था द्वारा मीनाक्षीपुरम में महिलाओं के लिए माहवारी जागरूकता कार्यक्रम

तिथि : 23 फरवरी 2025

"नींव संस्था द्वारा मीनाक्षीपुरम में महिलाओं के लिए माहवारी जागरूकता कार्यक्रम"

मीनाक्षीपुरम (मेरठ, उत्तर प्रदेश )। सामाजिक सेवा और शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध आईआईटी के पूर्व छात्रों द्वारा संचालित गैर-लाभकारी संगठन नींव संस्था ने महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए सूर्य पब्लिक स्कूल, मीनाक्षीपुरम में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य माहवारी के दौरान महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य और स्वच्छता उपायों की जानकारी देना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना था।

कार्यक्रम का विवरण

कार्यक्रम के दौरान नींव संस्था के समर्पित स्वयंसेवकों ने उपस्थित महिलाओं को माहवारी से संबंधित वैज्ञानिक तथ्यों से अवगत कराया और इसे एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया के रूप में स्वीकारने के लिए प्रेरित किया। स्वयंसेवकों ने महिलाओं को सुरक्षित, स्वस्थ और स्वच्छ माहवारी बनाए रखने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी।

मुख्य विषयों पर चर्चा

*माहवारी से जुड़ी सामान्य भ्रांतियाँ और उनका निवारण।

*सेनेटरी पैड, मेंस्ट्रुअल कप और अन्य सुरक्षित विकल्पों का उपयोग।

*स्वच्छता का महत्व – माहवारी के दौरान और उसके बाद उचित सफाई।

*संक्रमण से बचाव के उपाय और घरेलू देखभाल के तरीके।

*माहवारी के दौरान पोषण और शरीर की देखभाल।

इस अवसर पर नींव की स्वयंसेविका निशा जी ने सेनेटरी पैड के सही उपयोग, इसके निपटान की विधि, और माहवारी के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 

"हाथ धोना, शरीर की स्वच्छता बनाए रखना, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाना और सही आहार लेना महिलाओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होते हैं।"

महिलाओं की शंकाओं का समाधान

नींव संस्था के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. उपदेश वर्मा ने महिलाओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान करते हुए, माहवारी से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और अंधविश्वासों को दूर करने का यथासंभव प्रयास किया। उन्होंने बताया कि 

"माहवारी के दौरान उचित देखभाल और स्वच्छता बनाए रखने से कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। उन्होंने महिलाओं को इस विषय में खुलकर बात करने और अगली पीढ़ी को भी सही जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित किया।"

संस्था की निरंतर प्रतिबद्धता

इस कार्यक्रम में नींव संस्था के अध्यक्ष हरिदत्त वर्मा, दुर्गेश जी, प्रशांत जी, पवन जी और अन्य प्रमुख स्वयंसेवक भी उपस्थित रहे। संस्था प्रमुख ने इस जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताते हुए अपने द्वारा संचालित शिक्षा केंद्रों में बच्चों की माताओं और बहनों के लिए नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।

महिलाओं की प्रतिक्रिया और प्रभाव

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित महिलाओं ने नींव संस्था का आभार व्यक्त किया और बताया कि यह कार्यक्रम उनके लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध हुआ। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति सजगता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होती है।

नींव संस्था: शिक्षा और सामाजिक सुधार की दिशा में अग्रसर

नींव संस्था न केवल स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रही है, बल्कि निर्धन और वंचित समुदायों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। संस्था मेरठ के विभिन्न गांवों और झुग्गी बस्तियों में गरीब और बेसहारा परिवारों के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा कक्षाओं का संचालन करती है। नींव का यह प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और महिलाओं व बच्चों को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

नींव संस्था का यह अभियान महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति समाज को जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चित्रदीर्घा










सूचना स्रोत
डॉक्टर राकेश राणा
प्रस्तुति 



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...