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मातृ-पितृ पूजन दिवस

भूमिका 

जीवन के किसी भी क्षेत्र में साक्षरता और निरक्षरता विशिष्ट भूमिका निभाती हैं। साक्षरता जहां सब कुछ सरल कर चीजों को समझने में कम समय लेती है वहीं निरक्षरता अधिक समय लेने के साथ साथ उपयुक्त रूप में समझने में प्रमुख बाधा है।

कार्यक्रम विवरण

राजस्थान में शिक्षा विभाग के सभी स्कूलों को दिए गए निर्देश कि वे 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाएं का अनुपालन किया गया। इस दिन स्कलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें माता-पिता के प्रति सम्मान दिखाने वाले गीत, कविताएं और नाटक शामिल किए गए। इसके अतिरिक्त बच्चों को अपने माता-पिता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया गया।

यह फैसला वैलेंटाइन डे जैसी विदेशी संस्कृति के प्रचार-प्रसार को रोकने और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों में भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रति लगाव बढ़ेगा।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है क्योंकि यह खबर स्पष्ट आभास देती है कि राज्य सरकार भारतीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह फैसला बच्चों को भारतीय मूल्यों से जोड़ने में मदद करेगा।

बूंदी जनपद के एक कार्यक्रम की चित्रदीर्घा






नवाचारी स्टाफ
शिक्षिका महोदया 


सेवानिवृत्त शिक्षक महोदय (टोंक)




प्रधानाचार्य महोदय


अन्य विद्यालयों से









समाचार पाठ्य स्रोत

गूगल

चित्र स्रोत

शिक्षिका शोभा कंवर जी एवं श्री शिवराज जी कुर्मी

प्रस्तुति



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