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गुर्जर समाज साझी विरासत (अपडेटेड 23.02.25))

भूमिका

गुर्जर समुदाय भारत के प्राचीन और वीर जातीय समूहों में से एक है, जिसकी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक विरासत अत्यंत समृद्ध रही है। इस समुदाय ने भारत के विभिन्न राज्यों—राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर—में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और अपनी विशिष्ट परंपराओं, रीति-रिवाजों और योगदानों के माध्यम से समाज को प्रभावित किया है।  

गुर्जरों की सांझी विरासत केवल ऐतिहासिक घटनाओं और परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उनकी बहादुरी, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, कृषि, पशुपालन, व्यापार और लोक संस्कृति भी शामिल है। इस समुदाय ने प्राचीन समय में राजशाही और योद्धा परंपरा को अपनाया, जिससे कई महत्वपूर्ण राजवंशों का उदय हुआ। इसके अलावा, लोक गीत, नृत्य, धार्मिक मान्यताएँ और सामाजिक संगठन भी गुर्जर विरासत का अहम हिस्सा हैं।  

गुर्जर समुदाय की सामूहिक विरासत का अध्ययन केवल अतीत को जानने का माध्यम नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाला स्रोत भी है। इस परिचय से अवगत होकर हम गुर्जर समाज के गौरवशाली इतिहास, उनकी परंपराओं और सामाजिक संरचना को समझेंगे, जिससे कि भावी पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा प्राप्त करें।

विवरण 

गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों की डोला गांव यात्रा

आज दिनांक 23 फरवरी 2025 (रविवार) को गुर्जर समाज साझी विरासत, मेरठ प्रांत के संयोजक अशोक चौधरी, मेरठ महानगर पश्चिम जिला के संयोजक सतेंद्र भड़ाना एवं वरिष्ठ समाजसेवी श्री रमेश चंद्र खटाना जी ने बागपत जिले के डोला गांव में निवास कर रहे एक मुस्लिम गुर्जर परिवार से भेंट की। यह मुलाकात दोपहर 2 बजे एडवोकेट रोवल गुर्जर के निवास स्थान पर संपन्न हुई।   

गुर्जर परिवार का परिचय

डोला गांव में चेची गोत्र के एक गुर्जर परिवार के चार सदस्य निवास करते हैं। इनमें से तीन भाइयों की संतानें डोला गांव से निकलकर टीकरी के जंगल में अपने खेतों में बस चुकी हैं और वहीं मकान बनाकर रह रही हैं।  

एडवोकेट रोवल गुर्जर बागपत कचहरी में अपनी वकालत की प्रैक्टिस कर रहे हैं।  

सामाजिक चर्चा और उपस्थित गणमान्य नागरिक 

इस भेंटवार्ता के दौरान समाज के विषय में विस्तार से चर्चा की गई, और माहौल बडा ही खुशनुमा रहा। इस अवसर पर निम्न लोग उपस्थित रहे - 

मारूफ गुर्जर, ताहिर गुर्जर, अफसरून गुर्जर, दानिश गुर्जर, आसियम गुर्जर, मुबारिक गुर्जर।

परिवार के अन्य सदस्य और व्यवसाय

इन भाइयों में से एक भाई अब भी डोला गांव में निवास करते हैं और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।  

डोला गांव में रहने वाले आसिफ गुर्जर से भी वार्ता हुई। वे मेरठ के ट्रांसपोर्ट नगर में अपना एक कार्यालय संचालित कर रहे हैं।  





विवरण

आज दिनांक 16 फरवरी, 2025 दिन रविवार को गुर्जर समाज साझी विरासत के तत्वावधान में परिवारिक मिलन का एक कार्यक्रम चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय के पत्रकार विभाग के सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना शान मोहम्मद गुर्जर ने तथा संचालन योगेन्द्र जी ने किया। 

बैठक में डा. कपिल जी, श्री सुरेन्द्र सिंह जी, श्री सेवादास जी, डा. नीलम सिंह, डा. कहकशां तथा गुर्जर समाज साझी विरासत के प्रांत संयोजक अशोक चौधरी ने अपने विचार रखे। 

डा. कपिल जी ने कहा कि 

"समाज में बिखराव के कारण जो शक्ति क्षीण हुई, उस कारण हम हजारों वर्षों तक विदेशी शक्तियों के गुलाम रहे। आपसी भाईचारा मजबूत रहे। इसके लिए हिन्दू मुस्लिम गुर्जरों को एक साथ बैठना ही पडेगा। हमारी साझी परम्पराए ही हमें एक कर सकती हैं।"

श्री सेवादास जी ने कहा कि 

"प्रेम ही एक ऐसा धागा है जो हम सबको एक साथ ला सकता है। इसलिए आपस में प्यार बनाए रखें और उसके लिए लगातार प्रयास होने चाहिए।"

अशोक चौधरी ने कहा कि 

"जातीय आधार पर हम गुर्जर समाज को एक साथ लाने का हर सम्भव प्रयास करेंगे तथा एक शक्ति बनकर देश के विकास में अपना सकारात्मक योगदान देंगे।"

कार्यक्रम में ब्रह्मपाल सिंह लखवाया, सतेंद्र सिंह भड़ाना, गुलबीर सिंह (पूर्व पार्षद), राजबल सिंह, डा हरेंद्र सिंह, सरिता नागर, रेशमा राणा, डा. रेखा राणा, गजेन्द्र नागर, अशोक पोसवाल, दिपांशु तोमर, सरदार मेम्बर सिंह, नूरुद्दीन चौहान, शाकिर गुर्जर आदि उपस्थित रहे।

चित्रदीर्घा



















सूचना स्रोत
श्री अशोक चौधरी
प्रस्तुति





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