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कला की शक्ति को दर्शाते राजेश जी

भूमिका

कला किसी सीमा की मोहताज नहीं होती, और जब यह भक्ति से जुड़ जाती है, तो एक नया कीर्तिमान स्थापित होता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं राजेश जी, जो पेशे से एक हिंदी शिक्षक हैं, लेकिन उनके भीतर एक अनोखा कलाकार भी बसता है। अपनी अद्भुत रचनात्मकता और समर्पण के बल पर इन्होंने विभिन्न प्रकार के वेस्ट समझे जाने वाले सामानों से भगवान गणेश की 3000 से भी अधिक अद्वितीय इमेजेज बनाकर एक अनोखा विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है।  

राजेश जी ने विविध अप्रयुक्त वस्तुओं को अपनी कल्पनाशक्ति से जीवंत बना दिया। उनका यह सफर सिर्फ एक शौक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पुनः उपयोग (रीसाइक्लिंग) के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम भी बन गया।  

उनकी यह उपलब्धि न केवल कला की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि एक शिक्षक सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज को प्रेरित करने वाला एक सृजनशील व्यक्तित्व भी हो सकता है। उनकी यह अनोखी कला साधना उन्हें एक रिकॉर्ड धारक कलाकार बना चुकी है, और उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों को सृजनात्मकता और भक्ति का संदेश देता रहेगा।

परिचय

विश्व भर में रचनाकारों की भरमार है। इसी क्रम में दिल्ली के शिक्षक राजेश कुमार भी आते हैं जिन्होंने लीक से हटकर भगवान गणेश की तीन हजार से अधिक पेंटिंग तैयार की हैं। ये पेंटिंग दो सौ से अधिक सामग्रियों का प्रयोग करके तैयार की गई हैं। उन्होंने अपने इसी प्रयास के माध्यम से अपने नाम कई रिकॉर्ड दर्ज किए हैं। वे बताते हैं कि वे विगत चौबीस सालों से भगवान गणेश की पेटिंग तैयार कर रहे हैं। अब तो यह उनके जुनून में परिवर्तित हो चुका है। वे विविध प्रकार के मटीरियल से पेंटिंग बनाते हैं। इस तरह की अब तक उनके पास तीन हजार से अधिक पेंटिंग हो चुकी हैं। उन्होंने अपनी पेंटिंग्स के निर्माण में कंचों, भूसे, पाम के सिंगल पत्ते, गेहूं की बाली, कपड़ों की कतरन, दवाई के रैपर, शादी के कार्ड का भी उपयोग किया है। पेशे से शिक्षक राजेश कुमार जी ने वर्ष 2000 से भगवान गणेश जी की पेंटिंग बनानी शुरू की थीं। और, अब तक वो तीन हज़ार से ज़्यादा पेंटिंग बना चुके हैं। उल्लेखनीय बात यह कि अब तक उन्होंने स्वनिर्मित एक भी पेंटिंग बेची नहीं है। वो कहते हैं कि गणेश जी मेरे लिए आस्था का विषय हैं। गणेश जी की इन पेटिंग्स के माध्यम से राजेश कुमार जी ने कई रिकार्ड अपने नाम दर्ज करवाए हैं। आइए आज मुलाकात करते हैं श्री राजेश कुमार जी से।


बातचीत

प्रश्न १. सर, आपका शिक्षण का विषय क्या है? और! क्या आपका विषय ही कला में श्रीगणेश जी पर काम करने के लिए उत्साहित करता है?
उत्तर - "सर्वप्रथम मेरा सभी पाठकों को नमस्कार 🙏
मेरा शिक्षण का विषय हिंदी और साहित्य है।  कला मेरी नैसर्गिग रुचि से उत्पन्न हुई यूं समझें कि कला मेरी साधना है।"
प्रश्न २. आप विद्यालयों के प्रबंधन में भी व्यस्त रहते हैं तो क्या आप बताएंगे कि किसी भी विद्यालय की प्रगति के लिए उसके किस सेक्टर पर काम किया जाना आवश्यक है?
उत्तर - "किसी भी संस्था या कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए समय प्रबंधन का विशेष महत्व रहता है तो अगर आप समय का प्रबंधन उचित तरीके से कर लेते है तो सभी कार्य ठीक प्रकार से कर पाते हैं। विद्यालय की प्रगति के लिए अनेक बिंदुओं को ध्यान में रखकर कार्य किया जाए तो आप प्रगति के पथ पर संस्थान को अग्रसर कर सकते हैं जैसे कुशल शिक्षक का चयन, शिक्षा के हर पहलू पर कार्य करना, अनुशासन और आपका समर्पित भाव से कार्य करना आदि हैं। ये सब ही आप के संस्थान को शिखर पर ले जाने में सहायक होते हैं।"
प्रश्न ३. अपने विद्यालयों में पुस्तकों की गुणवत्ता के लिए आपने क्या मापदंड सोचे हुए हैं?
उत्तर - "देखिए दिल्ली में किसी भी विद्यालय में एन सी ई आर टी की पुस्तक से ही पढ़ाया जाता है, लेकिन छोटी कक्षाओं में निजी प्रकाशक के द्वारा प्रकाशित पुस्तकों से भी पढ़ाया जाता है जिसमें हमें ध्यान रखना होता है कि उसमें पाठन सामग्री अच्छी हो, विषय वस्तु से भिन्न न हो, छपाई स्पष्ट हो तथा मूल्य भी अधिक न हो।"
प्रश्न ४. क्या कभी आपके मन में ऐसा विचार आया कि क्यों ना अपनी पुस्तकें प्रकाशित की जायें?
उत्तर - "पाठ्य पुस्तकें अपनी प्रकाशित हों ऐसा विचार तो नहीं आया हां मेरी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिसमें एक किताब सरपंच जी शीर्षक से है जिसमें एक जीवनी प्रकाशित हो चुकी है जो कि विपुल प्रकाशन द्वारा 2010 में प्रकाशित हुई थी। और! दूसरी पुस्तक एक यात्रा पर आधारित है। केदार से कैलाश तक 2024 में प्रकाशित हुई और एक आर्ट की स्केच बुक प्रकाशित हो चुकी है।"
प्रश्न ५. आपका नवीनतम शैक्षणिक संस्थान कब आरम्भ हुआ और उन सबमें कौन सा सर्वोत्तम परिणाम दे रहा है?
उत्तर - कॉसमॉस ग्रुप ऑफ एजुकेशन के माध्यम से बारह विद्यालय और दो कॉलेज संचालित होते हैं और अभी नवीनतम विद्यालय 2025 में सिकंदराबाद में प्रारंभ होने जा रहा है। यह श्रृंखला 1994 में दिल्ली के गांव दल्लुपुरा से प्रारंभ हुई थी जो आज दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा,  गाजियाबाद और पटियाला (पंजाब) तक संचालित हो रही है।
प्रश्न ६. शिक्षा के क्षेत्र में आपकी क्या भावी योजनाएं हैं?
उत्तर - "मेरा जन्म दिल्ली के गांव दल्लुपूरा में चौ. रघुवीर सिंह एवं श्रीमती बलदेई देवी के पुत्र चौ. जिले सिंह एवं श्रीमती जसरती देवी के यहां 1969 में छठी संतान के रूप में हुआ। मेरी शिक्षा दिल्ली तथा मेरठ विश्वविद्यालय से हुई। कला के क्षेत्र में गणेश जी के सर्वाधिक चित्र विभिन्न पदार्थों का प्रयोग करके बनाने का विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया तथा अनेक सम्मानों से सम्मानित किया गया। मैं साहित्य संस्था में माध्यम से साहित्य की सेवा से जुड़ा हूं तथा शिक्षा और कला की सेवा में लगा हूं।"
सूचना स्रोत
राजेश सर 
प्रस्तुति








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