सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आशीर्वाद समारोह का आयोजन

भूमिका

शैक्षणिक सत्र के समापन पर जड़ौदा स्थित होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज में आशीर्वाद समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में पधारे अतिथियों ने सफलता के टिप्स दिए।

विवरण

आज दिनांक 11 फरवरी 2025, दिन मंगलवार को होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जड़ौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में बोर्ड परीक्षा के विद्यार्थियों के लिए आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ. जयनन्द (प्रो. वाइस चान्सलर, शोभित यूनिवर्सिटी, मेरठ), विशिष्ट अतिथि इं. अजय वर्मा, डॉ. संदीप कुमार, प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया, अध्यक्षा रीटा दहिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। 

डॉ. जयनन्द ने विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि 

"विद्यार्थी अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करें। जब विद्यार्थी परीक्षा में बैठें तो सबसे पहले वो प्रश्न हल करें जो उन्हें पूर्ण रूप से आते हैं तत्पश्चात् बाकी प्रश्नों को हल करें। जिस क्षेत्र में रुचि है उसी के अनुरूप अपनी तैयारी भी करें।" 

डॉ. संदीप कुमार ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि 

"आपकी परीक्षा में बहुत कम समय शेष है! अतः विद्यार्थी अपने विचारों को सकारात्मक रखते हुए अपनी परीक्षा की तैयारी करते रहें। सकारात्मक मानसिकता के लिए पर्याप्त नींद लेना अत्यन्त आवश्यक है। स्वास्थ्य का ठीक रहना भी अत्यन्त आवश्यक है। इसलिए स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। आप अपने लक्ष्य के प्रति प्रयत्नशील रहें तथा मेहनत करते रहें, आपका विद्यालय आपके साथ सदैव है।" 

इं. अजय वर्मा ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि "विद्यार्थियों को अपनी योग्यता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए तथा उसके लिए निरन्तर प्रयासरत रहना चाहिए। आपको अपने जीवन में सफल होने के लिए अपने अध्ययन कक्ष में दो लाइन अवश्य लिखनी चाहिए - 

'मैं कर सकता/सकती हूँ, मैं करूँगा/करूँगी।' 

तत्पश्चात् आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में निश्चित रूप से सफल होंगे।"

विद्यार्थियों ने भी अपने खट्टे-मीठे अनुभवों एवं भावनाओं को सभी के समक्ष प्रस्तुत किया।  

कुशल जी ने मधुर एवं प्रेरणादायक संगीत के साथ विद्यार्थियों का मनोरंजन किया। 

अतिथियों, प्रधानाचार्य व शिक्षकों ने विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं उपहार देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशीर्वाद दिया। 



आशीर्वाद समारोह को सफल बनाने में जितेन्द्र कुमार, धीरज बालियान, नितिन बालियान, शुभम कुमार, रूपेश कुमार, इन्दु सहरावत, रीना चौहान, पी.के. मिश्रा का सहयोग रहा।

सूचना स्रोत

श्री प्रवेंद्र दहिया

प्रस्तुति



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...