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नवागत गृहस्थ अंजली-मनीष से बातचीत

भूमिका 

आज के तीव्र गति से बदलते युग में, विभिन्न कौशल वाले व्यक्तियों के आपसी जुड़ाव से नवाचार, दक्षता और सामूहिक प्रगति को बढ़ावा मिलता है। जब इंजीनियर, डॉक्टर, कलाकार, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत दंपति जैसे विविध क्षेत्रों के लोग एक साथ काम करते हैं, तो यह एक ऐसी ऊर्जा उत्पन्न करता है जो समस्याओं के समाधान को अधिक प्रभावी बनाती है और समाज के विकास को गति देती है।  

विभिन्न क्षेत्रों के व्यक्तियों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान नए विचारों को जन्म देता है, तकनीकों को परिष्कृत करता है और सामाजिक चुनौतियों के समग्र समाधान प्रदान करता है। ऐसी अध्ययन सामग्री, जो इस ज्ञान-विनिमय को सुगम बनाती है, लोगों को उनकी मूल विशेषज्ञता से परे सीखने का अवसर देती है। यह बहु-विषयक शिक्षा को प्रोत्साहित करती है, रचनात्मकता को बढ़ावा देती है और शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और स्थिरता जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक समस्याओं के समाधान में सहायक होती है।  

इस तरह, आपसी जुड़ाव और ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा देकर, समाज एक समावेशी और व्यापक दृष्टिकोण विकसित कर सकता है, जिससे हर कौशल का सदुपयोग हो और सामूहिक बुद्धिमत्ता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

गृहस्थ के नवागत मनीष और अंजली से मुलाकात

नवागत दंपति अंजली और मनीष में से अंजली ने वर्ष 2012 में ऑल इंडिया इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के माध्यम से इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातक स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की, जबकि उसकी प्रथम वरीयता इलेक्ट्रॉनिक्स तत्कालीन दूसरी सबसे लोकप्रिय शाखा होने के कारण थी। भाग्य से या ईश्वर की कृपा से अंजली भी आईटी में बनी रही, जो बाद में बहुत फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि अंजली को पता चला कि आईटी और कंप्यूटर साइंस के विद्यार्थियों के लिए प्लेसमेंट के पर्याप्त मात्रा में अवसर हैं।

कॉलेज प्लेसमेंट हुआ और अंजली को गेमिंग कंपनी 'ऑक्ट्रो' में सेवा करने का अवसर मिल गया। साथ साथ शासकीय सेवाओं के लिए भी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अवसर अंजली द्वारा तलाशे गए।

कुदरत अंजली के धैर्य की परीक्षा लेती रही और लगभग चार वर्ष बाद अंजली को एसएससी के माध्यम से सहायक आयकर अधिकारी का पद मिल गया आत्मविश्वासपूर्वक कड़ी मेहनत करके। अंजली ने उस प्रस्ताव को स्वीकार न करने का निर्णय लिया।

तत्पश्चात अंजली ने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग साक्षात्कार की तैयारी फिर से शुरू की और कुछ वेतन वृद्धि के साथ कंपनी बदल ली। अंजली को वहां का काम पसंद नहीं आ रहा था, अतः तैयारी चलती रही।

वर्ष 2022 में बेंगलुरु में अवसर मिला तो तब से यहीं काम चल रहा है।

अंजली का जिंदगी को लेकर मानना है कि

"जीवन में कभी-कभी क्या अक्सर अपेक्षा के अनुसार नहीं होता। फिर भी भगवान की कृपा से आप सटीक तरीके से लक्ष्य को तय करके सही तरीके से आगे बढ़ पाते हैं। यह सब पहली बार में गलत लग सकता है लेकिन अंततः यह ही सही है। आपके साथ साथ आपके आस-पास के सभी लोगों के लिए भी। मेरे माता-पिता और दादा-दादी बहुत गौरवान्वित महसूस करते हैं मेरी मेहनत से प्राप्त सफलताओं पर।"

कभी सीखना मत छोड़ो। दुनिया लगातार बदल रही है और प्रतिस्पर्धी होती जा रही है। आप किसी भी कीमत पर हार नहीं मान सकते।

अंजली के पति मनीष एक मध्यमवर्गीय कृषक परिवार से हैं। उनके परिवार में कोई भी स्नातक स्तर तक नहीं पढ़ा था, और अपने परिश्रम से वे अपने गाँव के पहले इंजीनियर बने। उन्होंने वर्ष 2014 में ग्रेटर नोएडा स्थित आईआईएमटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से अभियांत्रिकी परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। पेटीएम से आरम्भ उनका करियर एयरटेल तथा विप्रो होता हुआ पर्सिस्टेंट सिस्टम्स तक पहुंचा। वर्तमान में वे कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।

मनीष ने देश के प्रगतिशील नगरों गुरुग्राम, पुणे, और बंगलौर में काम करते हुए कार्य शैलियों की भिन्नता को जाना समझा है। उन्होंने जावा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों में भी अनुभव प्राप्त किया है। उनकी सीखने की जिज्ञासा यहीं नहीं रुकती—वे क्लाउड कंप्यूटिंग, इमेज प्रोसेसिंग, और बिग डेटा जैसे क्षेत्रों का भी निरंतर अध्ययन कर रहे हैं और हमेशा नई तकनीकों का अपने प्रोजेक्ट्स में उपयोग करने की कोशिश करते हैं। उनका करियर गहरी विशेषज्ञता और नवाचार के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।


बातचीत
प्रश्न १. बच्चो, आप दोनों नवविवाहित हो तो आपने अपने भविष्य को लेकर क्या कोई सपना संजोया है?
उत्तर - "हमारा सपना भी बाक़ी लोगों की तरह ही है। शांत और सुखद जीवन, अपना घर, और दुनिया घूमना।"
प्रश्न २. आप और मैं ही नहीं ग्रामीण पृष्ठभूमि के बालकों के समक्ष काउंसलिंग की समस्या है? आपको कब कब निर्णय करने में दुश्वारी का सामना करना पड़ा?
उत्तर - "काउंसलिंग की समस्या तो है वरना सभी बच्चे पढ़ाई में मेहनत करें और आगे बढ़ें। किस्मत से मेरे सहपाठी और मित्र मेहनती और पढ़ाई में एक से निकले। मित्रों की सहायता से और परिजनों की सहायता से दिशा ख़ुद बनती चली गई। फिर मैंने स्कूलिंग भी अलग जगह से की तो उस से भी सोच का दायरा बढ़ा कि जीवन में क्या करना चाहिए।"
प्रश्न ३. वैवाहिक स्थिति में आप किसी भी अनिर्णय की स्थिति से कैसे पार पाते हैं?
उत्तर - "हम दोनों अपने अपने विचार और समाधान एक-दूसरे के सामने रखते हैं ताकि सोचने का दायरा ज़्यादा व्यापक हो जाए और फिर जो भी आपसी सहमति से सही लगता है वह करते हैं।"
प्रश्न ४. "मूलतः ग्रामीण पृष्ठभूमि के बुजुर्ग सीधे सादे पाए जाते हैं।" 
क्या उनसे सामंजस्य बनाने में आपको कोई असुविधा होती है? यदि हां तो किस प्रकार की?
उत्तर - "आजकल ग्रामीण क्षेत्र भी लोगों की सोच और समझ बढ़ रही है। उन्हें भी पढ़ाई की अहमियत और बच्चों की समस्या समझ आ रही है तो वे अपना पूरा सहयोग देते हैं। रही बात सीधे सादे होने की तो ये चीज़ तो सीखने और अपनाने लायक है क्योंकि इतनी भाग दौड़ और बेवजह की समस्या से तो बस सेहत ख़राब होती है। जीवन सादा और शांत ही अच्छा होता है।" 
प्रश्न ५. एक दंपति के रूप में आप अपने भविष्य को लेकर क्या कल्पना करते हैं?
उत्तर - "हम लोग खूब तरक्की करना चाहते हैं। ना सिर्फ़ स्वयं ही को बल्कि जितना हो सके आसपास के लोगों को भी बढ़ाना चाहते हैं। हम बस शांत, सुखद और खुशहाल जीवन की अपेक्षा करते हैं।
कबीर जी की एक पंक्ति है कि 
“जब  हम  पैदा हुए जग हंसा हम रोय। 
ऐसी करनी कर चलो हम हंसें जग रोय।” 
मेरा भी यही मानना है कि अच्छे करम करने से भी जीवन शांत और सुखद रहता है।"



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