भूमिका
विश्व भर में चिड़िया स्वयं को संकट में पाती हैं तो उनके पीछे जो कारण हैं उनका बेहद सरल सहज तरीके से निवारण किया जा सकना संभव है। विचारशील कवि दया शर्मा द्वारा रचित यह कविता पढ़कर लगता है कि मानो उन्होंने चिड़िया के मन ही को पढ़ लिया है।
वो चिड़िया मुझको घूर रही थी...
घूम रही थी दरबदर वो,
कहाँ बनाए अपना घर वो।
आश्रयहीन लोग कर देते,
कहाँ छिपाए अपना सर वो।।
घर के पास गई बहुतों के,
सबके मन से दूर रही थी।
वो चिड़िया मुझको घूर रही थी...
कानन किसने नष्ट किया है,
नदियों को पथभ्रष्ट किया है।
पत्थररहित पहाड़ कर दिए,
हरियाली का हनन किया है।।
नीड़ के निर्माण खातिर,
कितनी वो मजबूर रही थी।
वो चिड़िया मुझको घूर रही थी...
सभी प्राणियों का हक खाया,
मानव फिर भी तृप्ति ना पाया।
धरती का दोहन करने को,
नई नई तकनीकें लाया।।
एक स्वप्न सा लगता है अब,
जब धरती भरपूर रही थी ।
वो चिड़िया मुझको घूर रही थी...
...dAyA shArmA
प्रस्तुति







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