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स्टेट अवॉर्डी शिक्षक हैं टीकाराम जी

भूमिका

आज हमारे मध्य एक ऐसे सम्माननीय शिक्षक उपस्थित हैं, जिन्होंने अपनी असाधारण शिक्षण शैली, समर्पण और उत्कृष्ट योगदान से शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। अपने अद्वितीय प्रयासों और नवाचारों के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एपीजे अब्दुल कलाम राज्य पुरस्कार से दो फरवरी २५ को सम्मानित किया जा रहा है। ये न केवल छात्रों के मार्गदर्शक हैं, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत हैं।  

यूट्यूब वीडियो लिंक

https://youtube.com/shorts/ZhymFkF9NEU?si=Fe-DaWThTNsl6UUZ

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परिचय

साथियो। आज हम आपको टोंक जिले के एक ऐसी स्टेट एवार्डी शिक्षक से रूबरू करवाने जा रहे हैं जिनका सादगीपूर्ण व्यवहार ही उनकी खास पहचान है। उनका नाम है श्री टीकाराम राजवंशी जी। ये वर्तमान में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जीवली ब्लॉक निवाई जिला टोंक राजस्थान में शिक्षक लेवल -1 के पद पर कार्यरत हैं। आप शिक्षा व शिक्षण के प्रति पूर्णतया समर्पित मानव संपदा हैं। इसका पुख्ता प्रमाण बहुत कम समय की सरकारी सेवा में ही आपका राज्य स्तर पर शिक्षक सम्मान के लिए चयन होना है। आप बच्चों की शिक्षा व दीक्षा को सदैव केन्द्र में रखते हैं। आपका विद्यालय वर्तमान में टोंक जनपद में निरंतर ख्याति अर्जित कर रहा है। आप स्वयं शैक्षिक नवाचारी प्रकृति के व्यक्ति हैं। शिक्षा में हो रहे नवाचारों पर आपका भरपूर विश्वास है। विद्यालय की तमाम शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में समुदाय का जुड़ाव ज्यादा से ज्यादा बने, इसके लिए आप हमेशा नवीन प्रयास करने के पक्षधर हैं। आपके विद्यालय स्टाफ का टीम वर्क देखते ही बनता है। आप और आपकी पूरी टीम के कार्यों से नोडल व ब्लॉक में आपका विद्यालय अन्य विद्यालयों के लिए एक नज़ीर बन रहा है। आप समाजिक जीवन में भी लगातार सक्रिय भूमिका में रहते हैं। आपके सेवाकाल के नवाचारों और उन्नत कार्यों को देखकर आपके विद्यालय में भामाशाह, दानदाता भी समय-समय पर काफ़ी आर्थिक सहयोग करते रहते हैं। इन उच्च कोटि के कार्यों के परिणामस्वरूप ही आपको कई सारे राष्ट्रीय शैक्षिक मंचों द्वारा समय- समय पर कई सारे पुरस्कारों से भी नवाजा जाता रहा है। अभी हाल ही में आपको राष्ट्रीय स्तरीय पुरस्कार हेतु शिक्षा सागर फाउंडेशन मध्य प्रदेश राज्य द्वारा भी 2 फरवरी को ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। आप एक अच्छे शिक्षक, इंसान होने के साथ साथ एक बेहतरीन नवोदित कवि भी हैं। आप द्वारा रचित कई रचनाएं, आलेख शिक्षा विभाग की राज्य स्तरीय पत्रिका 'शिविरा' व विभिन्न समाचार पत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती हैं। अभी हाल ही में आपके विद्यालय के बालकों के चित्र आदि भी 'बाल शिविरा' पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। इससे लगता है कि आपकी प्रतिभा आपके विद्यालय के बालकों में भी स्थानांतरित हो रही है। आप टोंक डाइट के माध्यम से गत तीन वर्षों से शैक्षिक शोध के कार्यों में भी संलग्न हैं। आपका सादा जीवन, शालीनता व स्पष्टवादिता की शैली से आपके व्यक्तित्व में निरंतर निखार आता जा रहा है। ऐसा हम सब महसूस करते हैं। हम आपके उज्ज्वल भविष्य की ईश्वर से कामना करते हैं। आज हम इनसे बातचीत करके हमारे पाठकों को इनकी शिक्षा, दीक्षा व व्यक्तिगत रुचियों के बारे में बताना चाहते हैं।


बातचीत 

प्रश्न १. सर, आपने जीवन यापन के लिए शिक्षण क्षेत्र को ही क्यों चुना और क्या आप इससे संतुष्ट हैं?

उत्तर- "शिक्षक का कार्य बहुत ही आनन्ददायक है। अध्यापक का पेशा समाज में सम्मानजनक होता है। बच्चों के साथ सीखने सिखाने की गतिविधियों में मुझे बहुत मजा आता है। मैं अपने पेशे शिक्षण कार्य को चुनकर पूर्णतया संतुष्ट हूँ।"

प्रश्न २. विभागीय दायित्वों की अधिकता के बावजूद भी आप अन्य सामाजिक, गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए समय निकाल लेते हैं। अपने समय प्रबंधन के बारे में हमारे पाठकों को भी बताइए जी।

उत्तर - "मैं अपने विभागीय कार्यों के तन्मयता से पूरा करने के लिए सदैव तत्पर रहता हूँ और उन विभागीय कार्यों के साथ ही कई ऐसे ग़ैर शैक्षणिक कार्य होते है, जो बालको के समग्र विकास में सहायक होते है उंन्हे भी करने का प्रयास करता हूँ। मेरा उद्देश्य ऐसे अवसरों को तलाशने का भी रहता है। योजना बनाकर कार्य करने से हर काम सरल व सहज हो जाता है। बशर्ते आपको थोड़ा सा अतिरिक्त समय निकालना पड़ेगा। मैं पाठकों से कहना चाहूँगा कि आप भी अपने काम के प्रति समर्पित रहकर योजनबद्ध तरीके से काम करेंगे तो निश्चित ही आप अपने कार्य मे सफल होंगे।"

प्रश्न ३. शिक्षा विभाग में लगातार बहुत सारे नवाचार होते रहते हैं। आपकी दृष्टि से क्या शिक्षा की बेहतरी के लिए ये कारगर हैं?

उत्तर - "देखिए,आज के परिप्रेक्ष्य में नवाचारों की मांग है। पुरानी शिक्षण पद्धति को नकारकर और भयमुक्त शिक्षा देना शिक्षा नीति के मायने है। शिक्षा को बोझिल न बनाने माना जाए, इस हेतु भी नवाचारों की मांग है। हम नवाचारों को अपनाकर शिक्षा के बेहतरी के लिए अधिक प्रयास कर सकते हैं।"

प्रश्न ४. सर, लिखने-पढ़ने के अतिरिक्त आप अन्य और कौनसे क्षेत्र में रुचि रखते हैं?

उत्तर - "किताबें पढ़ने के साथ कविता लेखन में भी रुचि है।सामाजिक कार्यों में भी सहभागिता निभाने की भी कोशिश रहती है।"

प्रश्न ५. सर, आपका प्रिय विषय कौन-सा है और क्यों?

उत्तर - "हिन्दी मेरा प्रिय विषय है। चूंकि यह विषय हमारे भावों, विचारों व अनुभूतियों को प्रदर्शित करने का काम करता है।"

प्रश्न ६. आपकी शिक्षा की बेहतरी के लिए भविष्य में विद्यार्थियों के साथ और क्या करने की योजना है?

उत्तर - "भाषा शिक्षण में कई चुनौतियां आ रही हैं। बच्चे पढ़ना लिखना जानते हैं, किन्तु अपनी बात को अभिव्यक्त नहीं कर पाते।मेरी आगे की योजना उन बालकों में अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाने की रहेगी।"

प्रश्न ७. शैक्षिक उन्नयन के लिए इससे संबद्ध समस्त पक्षों के लिए आपका क्या सुझाव है?

उत्तर - "हमें बच्चों के साथ सहजता के साथ कार्य करना चाहिए। उन पर कोई भी कार्य थोपे नही बल्कि उन्हें प्रेमपूर्वक सीखने सिखाने में मदद करें। आप जो भी सिखाना चाह रहे है वह आसानी से सीख जाएगा, बस आप उसके अच्छे मार्गदर्शक बन जाइये।"

सूचना स्रोत

श्री हंसराज जी 'हंस'


प्रस्तुति



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