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वार्षिकोत्सव से संदेश देने का प्रयास

भूमिका

समाज में बदलते मूल्यों पर आधारित एक प्रेरणादायक प्रस्तुति रही वार्षिकोत्सव के लिए मंचित यह एकांकी। समाज में आधुनिकता और आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पारिवारिक और नैतिक मूल्यों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आज की पीढ़ी जहां शिक्षा और करियर के क्षेत्र में ऊंचाइयों को छू रही है, वहीं माता-पिता और बच्चों के बीच भावनात्मक दूरी भी बढ़ रही है। इस संवेदनशील विषय पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, टोडारायसिंह (जिला टोंक, राजस्थान) के वार्षिकोत्सव में छात्राओं द्वारा एक विचारोत्तेजक एकांकी प्रस्तुत की गई। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को न केवल भावनात्मक रूप से जोड़ा, बल्कि उन्हें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम विवरण

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय टोडारायसिंह जिला टोंक (राजस्थान) में वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया जिसमें
वार्षिकोत्सव के अवसर पर छात्राओं ने एक संवेदनशील एकांकी का मंचन किया। यह एकांकी समाज में तेजी से बढ़ रहे एक गंभीर मुद्दे पर आधारित थी, जिसने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

समाज पर अर्थ का प्रभाव

आज के समय में हर माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे ऊंची शिक्षा प्राप्त करें और विदेश जाकर धन अर्जित करें। आर्थिक युग में माता-पिता बच्चों से अधिक से अधिक धन कमाने की अपेक्षा रखते हैं। लेकिन इस दौड़ में वे यह भूल जाते हैं कि बच्चा देश में रहकर भी अच्छा जीवन यापन कर सकता है और अपने माता-पिता की देखभाल कर सकता है।

वृद्धावस्था की समस्याएं

विशेष रूप से धनाढ्य परिवारों में यह समस्या आम हो गई है। विदेश में रहने वाले बच्चे अक्सर अपने माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं निभा पाते, जिसके कारण बुढ़ापे में माता-पिता को अकेलेपन और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। इस एकांकी में वृद्धावस्था से जुड़ी इन्हीं समस्याओं को प्रभावी तरीके से दर्शाया गया।

शाला परिवार के अनवरत प्रयास 

विद्यालय के शिक्षकों और छात्राओं ने इस एकांकी के माध्यम से समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया कि बच्चों को केवल शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार भी देने चाहिए। उन्हें इस बात के लिए प्रेरित करना चाहिए कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग देश की सेवा में करें और अपने परिवार का सहारा बनें।

देश को दिशा देने हेतु बालिकाओं का प्रयास

छात्राओं ने अपने प्रयास के द्वारा यह संदेश दिया कि यदि हर बच्चा अपने देश में रहकर सेवा करेगा, तो हमारा देश और अधिक समृद्धिशाली बनेगा। इस प्रकार के प्रयास भविष्य में वृद्धावस्था की समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

इस एकांकी के माध्यम से बालिकाओं ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया। यह प्रयास न केवल प्रशंसनीय था, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए एक प्रेरणा भी था। शाला परिवार का यह विशेष प्रयास दर्शकों के दिलों को छू गया। कार्यक्रम उपरांत उल्लसित एकत्रित शाला परिवार।

कार्यक्रम के समापन पर साहित्य मंच के श्री ओमप्रकाश जैन भामाशाह बरवास के सौजन्य से कक्षा 01 से 05 के स्कूली विद्यार्थियों को सर्दी को ध्यान में रखते हुए ऊनी इनर वितरित किये गए।


सूचना स्रोत
शिवराज जी कुर्मी

प्रस्तुति




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