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असहज कर देने वाली घटना

भूमिका 

मेरठ में हाल ही में एक लोमहर्षक घटना में एक युवती की लिफ्ट में फंस जाने से क्रश होकर तुरंत मृत्यु हो जाने से पूरे शहर में गम और रंज का माहौल बन गया। अभी भी निवारक उपाय अपनाकर ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण आकस्मिक घटनाओं की पुनरावृत्ति को नियंत्रित किया जा सकता है।

भयावह घटनाक्रम

अमर उजाला ब्यूरो का समाचार

मेरठ में शास्त्री नगर एल ब्लॉक पुलिस चौकी के सामने स्थित कैपिटल हॉस्पिटल में बृहस्पतिवार शाम अचानक लिफ्ट के गिरने से सैन्यकर्मी अंकुश की पत्नी तीस वर्षीया करिश्मा की उसमें फंस जाने से मौत हो गई।

ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का मुख्य कारण

हॉस्पिटल ही नहीं ना जाने कितनी इकाइयां भगवान भरोसे असीमित रिस्क के साथ चल रहे हैं। दरअसल लिफ्ट और एक्सलेटर समेत ऐसे अन्य इस जैसे संवेदनशील इक्विपमेंट उपयोग में आ रहे जिनका मेंटिनेंस महंगा होने के कारण प्रोफेशनल्स से ना करवाकर गुजरात के मोरवी पुल का रखरखाव एक घड़ी निर्माता के द्वारा कराए जाने की तर्ज पर कराकर लोगों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। मुख्य रूप से छोटे शहरों में जहां पर ऐसा मेंटिनेंस का काम कम निकलता है।

भयावह क्या?

सैन्यकर्मी की पत्नी करिश्मा लिफ्ट के दरवाजे में स्ट्रेचर के साथ फंस गई थी। उसने करीब दो घंटे पहले ही एक बच्ची को जन्म दिया था। कर्मचारी करिश्मा को कमरे में शिफ्ट करने के लिए लिफ्ट से भूतल पर ला रहे थे और दुर्घटना हो गई। इस पर महिला के परिजनों ने हॉस्पिटल में तोड़फोड़ कर दी। स्वास्थ्य विभाग ने हॉस्पिटल को सील कर दिया है। 

निवारक उपाय

कितनी भयावह स्थिति है जिसको सिर्फ देखना भर ही किसी संवेदनशील व्यक्ति के लिए एक आपदा के जैसा हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग यदि गंभीर हो तो बेहद सामान्य तरीके से सिर्फ नियम कायदों को सुनिश्चित करके ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोक सकता है। 

वस्तुस्थिति

जनपद के किठौर क्षेत्र के बहरोड़ा गांव निवासी सेना के जवान अंकुश की पत्नी करिश्मा बृहस्पतिवार सुबह कैपिटल हॉस्पिटल में भर्ती हुई थी। महिला का इलाज डॉ. कविता भाटिया के यहां चल रहा था। दोपहर को 3:45 बजे करिश्मा ने बच्ची को जन्म दिया। शाम 5:40 बजे करिश्मा और उसकी बच्ची को कमरे दो कर्मचारी लिफ्ट से नीचे ला रहे थे। अचानक लिफ्ट की बेल्ट टूट गई फलतः महिला लिफ्ट के दरवाजे में फंस गई।

निवारक उपाय

देश का शासन और प्रशासन यदि विविध क्षेत्र के मानव श्रम का उसके कौशल के अनुसार शुल्क तय कर श्रेणीयन कर दे तो ग्रामीण ही नहीं शहरी क्षेत्र की जनता को भी सुगमता हो जाए और कौशल के अनुसार कार्य कराकर वह संतुष्ट भी हो सके। साथ ही कुशल और अकुशल तकनीशियन के उच्चतम शुल्क लेने के प्रयासों पर भी अंकुश लग सके।

फायरब्रिगेड ने लिफ्ट के दरवाजे खोले, तब जाकर महिला को निकाला गया। करिश्मा को दूसरे अस्पताल में भेजा, जहां उसे मृत घोषित कर दिया। करिश्मा की बेटी को संतोष नर्सिंग होम रेफर कराया।

डॉक्टर तक सुलभ ना हो सका

इस से अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या होगा कि मृतका का मृत सुनिश्चित होना दूसरे हॉस्पिटल द्वारा तय किया गया।

भावुकता और आवेश

लिफ्ट के दरवाजे से निकलते ही करिश्मा के भाई हैप्पी और उसके पति अंकुश सहित परिवार के लोगों ने गले से लगा दिया। करिश्मा का निकनेम मोनी था। वह बार-बार मोनी-मोनी कहकर उसको होश में लाने का प्रयास कर रहे थे। करिश्मा की हालत देखकर तीमारदारों का गुस्सा फूट गया।

दुःखी परिजनों की विवशता

भावों के वशीभूत होकर तीमारदारों का आवेश में आकर अवैधानिक प्रतिक्रिया कर देना उसी क्रम में आता है जिसके अंतर्गत मेंटिनेंस तथा अन्य औपचारिकताएं सिर्फ कागजी कार्यवाही तक सीमित रहीं।

दुखद प्रतिकूल स्थितियां 

लिफ्ट की बेल्ट टूटी या तकनीकी खराबी स्ट्रेचर पर लेटी करिश्मा लिफ्ट में घुसी नहीं थी और अचानक उसका दरवाजा बंद हो गया। लिफ्ट नीचे गिर और दरवाजे में फंसी करिश्मा लटकी रही। इसको लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं। लिफ्ट की बेल्ट टूटी है या फिर तकनीकी खराबी आई। इसका खुलासा तो जांच करने के बाद ही फॉरेंसिक एक्सपर्ट या लिफ्ट के मैकेनिक ही कर पाएंगे फिलहाल पुलिस ने कैपिटल हॉस्पिटल को सील कर दिया है। 

स्थाई समाधान

दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि करिश्मा शिकार हो गई अव्यवस्था का, तो गंभीर समाजसेवियों के लिए यह अवसर है व्यवस्था में सुधार के लिए पहल करने का। और! ऐसा सामान्य तरीकों को अपनाकर बहुत कुछ किया जा सकना संभव हो सकता है।





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