हर पल ईश का ध्यान है तो समझिए कि उनकी कृपा है।
कुछ गलत ना करने की ठानी है तो इसमें सब ही का भला है।
सच और झूठ का भेद मिटाने को दुनिया आमादा है।
तो क्या सच समाप्त हो जाएगा।
कभी भी तो नहीं। हां! ईशकृपा निश्चित ही।
तब यही तो समय है सतर्क हो
जाने का और!
मानव तथा पृथ्वी पर जीवन के विषय में सोचने का।
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