भूमिका
रचनाकार शिवराज जी ने अपने एक दो दिवसीय दौरे का पूर्ण विवरण यहां पर दिया है। इसी यात्रा में उन्होंने पाया कि बालमन को ध्यान में रख काम करने वालों की भी दुनिया में कमी नहीं है। ऐसी ही एक पुस्तक का सृजन डॉ. छाया शर्मा जी ने किया जिसका उन्होंने बड़ा दिलचस्प शीर्षक दिया 'बाल उपवन'। इसी पुस्तक की समीक्षा श्री शिवराज जी द्वारा की गई है। इस सबका समग्र विवरण इस ब्लॉग के अंतर्गत देखिए।
यात्रा वृत्तांत (दिनांक 25-26 नवम्बर 2024)
अजमेर- किशनगढ़
दिनांक 25 नवम्बर 2024 को मैं राजस्थान परिवहन निगम की बस से प्रातः 8.00 बजे टोडारायसिंह से रवाना होकर नसीराबाद बस स्टैंड पर उतर गया। वहाँ से बस द्वारा दोपहर 1.00 बजे किशनगढ़ पहुँच गया। वहां एक वैवाहिक कार्यक्रम में सहभागी बना। बारात स्वागत के दौरान नार्वे देश से आयी परिचित विदेशी महिला लैला एवं उनके पुत्र से सहज मुलाकात हुई।
वैवाहिक कार्यक्रम में नाश्ते के दौरान अनेक बच्चे भी मौजूद थे। मैंने बच्चों को पास में बुलाकर उस विदेशी महिला से आपस में संवाद कार्यक्रम स्थापित करवाया। बच्चों को विदेशी महिला से मिलकर बहुत खुशी हुई। उसके बच्चे से भी बच्चों द्वारा नाम, पता, कक्षा आदि के बारे में जानकारी की गई। विदेशी महिला एवं पुत्र के साथ बच्चों ने फोटो लिए। बच्चों ने उसको नाश्ता एवं चाय लाकर दी।
विदेशी महिला बच्चों की सेवा देखकर काफी प्रसन्न हुई। उन्होंने बालकों को धन्यवाद दिया। दूसरे दिन दिनांक 26 नवम्बर 2024 को मैं किशनगढ़ से बस द्वारा अजमेर गया।
इसके बाद बालिकाओं द्वारा 'बच्चों के पत्र' पुस्तक से पत्र वाचन करवाया गया।
साथ ही बाल विवाह पर लिखा गया पोस्टकार्ड वाचन किया गया। स्कूली विद्यार्थियों से बाल विवाह एवं नशा मुक्ति पर पत्र लेखन कार्य करवाया गया।
इसके बाद गोविन्द भारद्वाज जी द्वारा बाल साहित्य के संदर्भ में विस्तार से बताया गया। पाठ्यपुस्तकों के साथ साथ बाल साहित्य को पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। डॉ. छाया शर्मा जी ने देशभक्ति कविता सुना कर मंत्रमुग्ध कर दिया! स्वयं की लिखित पुस्तक 'बाल उपवन' के बारे में भी उन्होंने अवगत कराया|
बच्चों को पढ़ने के लिए यह पुस्तक स्कूल की संस्था प्रधान को सप्रेम भेंट की गई। मंजू शर्मा एवं मंजू माथुर ने अपने अपने अनुभव शेयर किए।
मेरे द्वारा पुनः विलुप्त होती गौरैया चिड़िया के बारे में जानकारी देकर, 'गौरैया संरक्षण एक पहल' अभियान के तहत स्कूली विद्यार्थियों से फ्लेक्स पर हस्ताक्षर करवाये गये। बच्चों को गौरैया संरक्षण हेतु अपने मकान की छत पर एक मुट्ठी दाना एवं पानी का पात्र रखने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद संस्था प्रधान सुश्री मनीषा सैनी द्वारा सभी का आभार भी व्यक्त किया गया। मंच संचालन श्रीमती शशिकला शर्मा द्वारा शानदार ढंग से किया गया। अन्त में सभी ने अल्पाहार लिया। इस सम्पूर्ण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने में श्री बनवारीलाल शर्मा, अजमेर का सहयोग रहा, लेकिन किसी कारणवश वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। मैं बस द्वारा सायंकाल टोडारायसिंह सकुशल पहुँच गया। दो दिवसीय यात्रा कार्यक्रम आनन्दमय रहा।
पुस्तक समीक्षा
1. पुस्तक का शीर्षक - बाल उपवन



~2.jpg)




बहुत अच्छी पुस्तक की बेहतरीन समीक्षा।लेखक व समीक्षक दोनों को बहुत बहुत बधाई हो।
जवाब देंहटाएंबेहतरीन यात्रा वृत्तांत।
जवाब देंहटाएं