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विश्व ध्यान दिवस पर कार्यक्रम

भूमिका

ध्यान मानसिक शांति के लिए की जाने वाली प्रक्रिया है जिस  से तनाव और चिंता कम होती है तथा मन शांत और स्थिर रहता है। इस प्रक्रिया का प्रभाव अत्यंत गहरा और सकारात्मक होता है। यह मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। शक्ति और एकाग्रता में वृद्धिकारक नियमित ध्यान से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और याददाश्त में सुधार होता है। साथ ही भावनात्मक संतुलन भी सिद्ध होता है जो नकारात्मक भावनाओं को नियंत्रित करने और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक होता है।  

ध्यान से रक्तचाप नियंत्रित रहता है, नींद में सुधार होता है, और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। यह प्रक्रियाआत्म-जागरूकता और आत्म-साक्षात्कार को बढ़ावा देता है।  

ध्यान को जीवनशैली में शामिल कर हम जीवन को अधिक सुखद, शांतिपूर्ण और संतुलित बना सकता है।

कार्यक्रम विवरण

जड़ौदा (मुजफ्फरनगर)। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 दिसम्बर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में घोषित किया। इसलिए आज सम्पूर्ण विश्व 21 दिसम्बर 2024, दिन शनिवार को पहला विश्व ध्यान दिवस मना रहा है इसी उपलक्ष पर होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वाधान में सामूहिक रूप से ध्यान का आयोजन किया गया। ध्यान कार्यक्रम का शुभारम्भ शैलेन्द्र सिंह योग शिक्षक आर्ट ऑफ लीविंग डॉ. राजीव कुमार, बाल कल्याण समिति व प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया द्वारा दीप प्रज्जवित कर किया गया। 

संबोधन

डॉ. राजीव ने विश्व ध्यान दिवस पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को बताया कि 

"संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव अपनाकर 21 दिसम्बर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में घोषित किया, यह प्रस्ताव 193 सदस्य महासभा (जिसमें भारत भी प्रारम्भ से ही सदस्य है) सर्वसम्मति से पारित हुआ। भारत ने ही प्रस्ताव का प्रायोजन किया था, क्योंकि 21 दिसम्बर ग्रीष्म संक्राति है जो भारतीय परम्परा में सूर्य की उत्तरायण को दर्शाता है। 21 दिसम्बर सबसे छोटा दिन भी है जो 21 जून अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के ठीक 6 महीने बाद पडता है। अतः विश्व ध्यान दिवस पर प्राचीन भारतीय संस्कृति का प्रभाव परिलक्षित होता है।"

ध्यान प्रशिक्षण

ध्यान प्रक्रिया का संचालन योग शिक्षक शैलेन्द्र सिंह द्वारा किया गया। योग गुरु ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए बताया कि जब हम भूतकाल की सोचते है तो दु:खी होते हैं और जब हम भविष्य की सोचते हैं तो हमें चिन्ता घेर लेती है, मगर जब हम वर्तमान में जीते हैं तो हमारे चेहरे पर अचानक ही मुस्कुराहट आ जाती है। अतः वर्तमान में जीना ही ध्यान है। यह प्रयोग आप सभी स्वयं भी करके  देख सकते हैं। जब आप अपने चेहरे पर ध्यान लगाते है तो चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है। ध्यान केन्द्रित करके ही हम मन और तन पर नियंत्रण कर सकते हैं। उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाल जीवन के लिए ध्यान प्रत्येक प्राणी के लिए अति आवश्यक है। इसलिए हमें अपनी दैनिक जीवन प्रक्रिया में ध्यान को उचित स्थान देना चाहिए। उसके बाद योग शिक्षक शैलेन्द्र ने सभी छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को ध्यान कराया। 

कार्यक्रम 

कार्यक्रम के समापन पर प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया ने विद्यार्थियों को ध्यान के लिए प्रेरित किया और बताया कि 

"यदि आप परीक्षा में सर्वोत्तम प्रदर्शन करना चाहते हैं तो ध्यान इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। किसी भी विषय पर मन और तन को एकाग्रचित्त करना ही ध्यान कहलाता है। जब हम किसी बिन्दु पर ध्यान मग्न हो जाते हैं तो हमें आस-पास का भी ध्यान नहीं रहता। मनुष्य के तन-मन, शरीर और प्रकृति के बीच सामंजस्य को बढ़ावा देने व्यापक मानव कल्याण करने के लिए ध्यान जीवन में जीने की विधि है जो विज्ञान सम्मत है और किसी भी धर्म के विरुद्ध नहीं है। प्राचीनकाल से ही भारत भूमि ऋषियों से भरी रही है जिनमें महर्षि ऋषि पंतजलि, महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी सहित सभी 24 तीर्थकर शंकराचार्य, कृष्णमूर्ति, महेश योगी, स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, स्वामी योगानन्द, स्वामी रामतीर्थ, अरविन्द, महर्षि रमन, संत कबीर, संत रविदास और भी अनेक गुमनाम भारतीय ऋषि मुनि संत सन्यासी, भिक्षु, परिवर्जक, सूफी संत जैसे महामानवों ने भारत ही नहीं इस धरा का समृद्ध किया है, जिनके बल पर भारत विश्वगुरु रहा है और आज विश्व भी भारत की संस्कृति की महानता को सहृदय स्वीकार कर रहा है। हमें अपने भारतवासी होने पर गर्व  महसूस करना चाहिए। मैं प्रवेन्द्र दहिया आप सभी के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ। आपका जीवन सुखमय व खुशहाल हो।" 

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समस्त स्टाफ का योगदान रहा।

अवसर का वीडियो


प्रस्तुति


सूचना स्रोत
श्री प्रवेंद्र दहिया

प्रस्तुति




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