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विशेष कामना

भूमिका

उत्तराखंड के प्रख्यात कवि श्री कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण' के अनुसार

"विवाह की वर्षगांठ जीवन के उस मधुर पल का स्मरण कराती है जब दो आत्माएं एक पवित्र बंधन में बंधी थीं। यह दिन सिर्फ उनकी यात्रा का उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और साथ की उस मिसाल का प्रतीक है जो समय के साथ और भी मजबूत होती जाती है। इस विशेष अवसर पर, हम उनके जीवन में असीम खुशियाँ, सुख-शांति और प्यार की निरंतर वर्षा की कामना करते हैं। उनका जीवन हमेशा खुशहाल और प्रेरणादायी बना रहे।"

शुभ कामना

प्रिय डॉ. सुशील कुमार त्यागी एवं सौभाग्यवती अर्चना की वैवाहिक वर्षगाँठ (३ दिसंबर २०२४) पर उनके चाचा कृष्ण का आशीर्वचन


सुशील-अर्चना की शादी की वर्षगाँठ हर्षाती आई। 

लगता जैसे दो हृद‌यों की कली आज खिलकर मुस्काई।


वर्षगाँठ शादी की आकर विगत पलों में है ले जाती।

शुष्क हुआ गर जीवन थोड़ा उर को हरियाली दे जाती। 

सात नहीं शादी के फेरे जन्मों का बन्धन होता है। 

कड़ी कोई ढीली गर होती हृदय में क्रन्दन होता है। 

वर्षगाँठ शादी की आकर बन्धन को कसती है पाई। 

लगता जैसे दो हृद‌यों की कली आज खिलकर मुस्काई।।१।।


तीन पुष्प जीवन में आए महक उठा जिससे यह जीवन। 

पुष्प तिरंगे ऐसे मोहक मधुमास होता अंतर्मन। 

पुष्प है प्रथम नाम 'गार्गी' बन बैठी वो महा विदुषी। 

पुष्प है दूजा 'अभी' कली सा महक रही है बनी विदेशी! 

पुष्प तीसरा मोहक माधव लगता मुरली स्वयं बजाई। 

लगता जैसे दो हृद‌यों की कली आज खिलकर मुस्काई।।२।।


अर्चन-पूजन-भजन-कीर्तन है परिवारी रीत मनोहर। 

महा सुगन्धित यह गुलदस्ता महकेगा हर पल जीवन भर। 

स्वास्थ्य अर्चना का जो ढीला पूर्ण स्वस्थ हो हरषायेगी। 

चाचा की आशीष भावना युगल ये शतवर्षी पायेगी। 

मुझे जयन्ती वर्षगाँठ की स्वर्ण हीरक भी दे दिखलाई।

लगता जैसे दो हृद‌यों की कली आज खिलकर मुस्काई।।३।।


देवलोक से मम्मी-पापा-चाची ने आशीष बिखेरा।

जीवन भर ही तुम्हें मिलेगा उगता सूरज लिये सवेरा। 

जैसे खिलकर हँसी बिखरती जग में ऐसे ही बिखरेगी। 

हँसी नहीं कमज़ोर पड़ेगी और अधिक ही ये निखरेगी। 

घर में बजती शीघ्र सुनेंगे एक साथ दो-दो शहनाई। 

लगता जैसे दो हृद‌यों की कली आज खिलकर मुस्काई॥४।।

आशीषदाता

चाचा कृष्ण


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