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हिंदी की गूंज का भव्य वार्षिक आयोजन (पत्रिका-पुस्तकों के विमोचन के साथ ही विशिष्ट विभूतियों का हुआ सम्मान)

भूमिका

वर्ष भर के आयोजनों की समीक्षा समेत विधा विशेष के विशेषज्ञों का सम्मान एक मील का पत्थर बन जाता है और आगे के लिए ऊर्जा का कार्य करता है। एक ऐसे ही आयोजन का विवरण आपके सम्मुख प्रस्तुत है।

कार्यक्रम विवरण

नई दिल्ली स्थित गांधी स्मृति प्रतिष्ठान के सभागार में जापान में पंजीकृत हिन्दी की त्रैमासिक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'हिन्दी की गूंज' 


के तत्वावधान में भव्य वार्षिक आयोजन में प्रथम सत्र की अध्यक्षता उद्योगपति, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि बी.एल. गौड़ ने की और मुख्य अतिथि वैश्विक हिन्दी परिवार के अध्यक्ष एवं कवि अनिल वर्मा 'जोशी' रहे। विशिष्ट अतिथियों की श्रेणी में वातायन यूके की संस्थापिका एवं विख्यात वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिव्या माथुर, इंग्लैंड के नाटिंघम शहर से 'काव्य-रंग' अंतरराष्ट्रीय संस्था की संस्थापिका, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि जय वर्मा, ज्योतिषाचार्य एवं वरिष्ठ कवयित्री डॉ. अनिता कपूर, सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी इंद्रजीत शर्मा तथा हॉलैंड से पधारी वहां की विधायिका नीना शर्मा रहे। 





कार्यक्रम के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रज्ञान पुरुष सुविख्यात गज़लकार एवं कवि पं.  सुरेश नीरव ने की और मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कवि प्रेम भारद्वाज 'ज्ञानभिक्षु' रहे। विशिष्ट अतिथियों की श्रेणी में कवयित्री सुनीता श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता बी. निर्मला, सारिका जैथलिया, संजय शुक्ला तथा डॉ. विदुषी शर्मा रहे। 

कार्यक्रम का आरंभ गणमान्य विभूतियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुआ। 

सत्रानुसार गणमान्य विभूतियों को माल्यार्पण, अंगवस्त्र ओढ़ाकर, शाल ओढ़ाकर एवं स्मृति-चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया गया। इस अवसर पर 'हिन्दी की गूंज' पत्रिका के दो अंक (अक्टूबर-दिसंबर, 2023 एवं जनवरी-मार्च - 2024) तथा संस्थापिका रमा पूर्णिमा शर्मा की नवीनतम कृतियां 'माँ जैसा कोई नहीं', 'प्रवासी हिंदी गूंज उठी', 'मात्सुओ बाशो और मेरे हाइकू', 'मन का आईना' (संपादित), 'जज़्बात का सफर' (संपादित) एवं 'हिन्दी की गूँज - सृजन एवं सफर' (वार्षिकी -1) का लोकार्पण किया गया। 






इस अवसर पर सभी विद्वानों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन पत्रिका के संपादक विनोद पांडेय, कविता गुप्ता एवं कुलदीप बरतरिया,  मोनिका सलूजा एवं डॉ. मेधा सक्सेना ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर जगत की चुनिंदा कवियों-कवयित्रियों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर, स्मृति-चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। उनमें डॉ. उपासना पांडेय, राकेश छोकर, खुशबू सागर, नीरजा मेहता, पूनम गौतम, अजमल तैश, मनीषा जोशी 'मणि', संदीप सोनी, रजनी शर्मा 'चंदा', सुनीता अग्रवाल प्रमुख रहे। दूसरी ओर, 'शुभ संकल्प' की टीम ने रमा पूर्णिमा शर्मा को सम्मानित किया। कार्यक्रम के मध्यांतर में 'हिन्दी की गूंज' पत्रिका के गत वर्ष से वर्तमान तक जुड़े सदस्यों को भी माल्यार्पण कर, अंगवस्त्र ओढ़ाकर, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया गया।

श्रोता-दीर्घा में देश-विदेश से पधारे और विभूषित विभूतियों में रमा पूर्णिमा शर्मा के पति अजय शर्मा, विष्णु प्रभाकर के सुपुत्र अतुल विष्णु प्रभाकर, डॉ. विदूषी शर्मा, डॉ. सविता चडढा, डॉ. नीलम वर्मा, मधु मिश्रा, अनीता वर्मा 'सेठी', सोनिया सोनम 'अक्स', अहमद तैश, मनीषा जोशी 'मणि', ममता खटवानी, सुरेश मिश्रा, सरोज शर्मा, शैलेश वाजपेई, ओमप्रकाश प्रजापति, सुमन मलिक तनेजा, पूनम गौतम, उषा किरण 'गिरधर', सूक्ष्मलता महाजन, इंद्रजीत सिंह, पूनम माटिया, ओम सपरा, प्रतिभा सपरा, 'वात्सल्य' संस्था की सर्वेसर्वा कविता मल्होत्रा अपनी टीम सदस्यों खुशी, अंजू, सुहाना के साथ (जिन्होंने सरस्वती वंदना नृत्य के माध्यम से अर्पित की), राम अवतार शर्मा तथा आकाशवाणी दूरदर्शन कलाकार, सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी, अधिवक्ता एवं गद्य-लेखक कुमार सुबोध इत्यादि प्रमुख रहे।

सभागार में पधारे सभी विद्वतजनों एवं आगंतुकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए रमा पूर्णिमा शर्मा के पतिदेव एवं स्वयं होटल उद्यमी अजय शर्मा द्वारा धन्यवाद और आभार ज्ञापित करने के साथ यह भव्य कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

विशेष अवसर

इस मौके पर उत्तर प्रदेश के जनपद सहारनपुर निवासी प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. राकेश छोकर को जापानी हिंदी सेवी सम्मान से विभूषित किया गया। इससे पूर्व भी वह इस संस्था से महत्वपूर्ण सम्मान पा चुके हैं। उन्हें यह सम्मान हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता में विशेष योगदान के लिए दिया गया है। विदित हो कि डॉ. राकेश छोकर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक कई सौ की संख्या में पुरस्कार पा चुके हैं। कइयों वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की उपलब्धि उनके नाम है। देश विदेश के कई संगठनों से उनका जुड़ाव रहा है।

सूचना स्रोत

श्री राकेश छोकर जी

प्रस्तुति





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