भूमिका
जीवन इंद्रधनुषी रंगों से भरा है जिनमें कोई कोई मिश्रित रंग तो विविधता लिए और मनमोहक हो जाता है। ऐसी श्रेणी का कि मंत्रमुग्ध कर दे। ग्राम पाठशाला एक ऐसा अभियान है जिससे विविध किस्म की यादें जुड़ी हैं। इनमें एक नवीनतम है जिसका उल्लेख यहां पर किया जा रहा है।
अप्रतिम पहल कि हर कोई बोले 'वाह'
ग्राम पाठशाला के मिशन को समय से पहले पूर्ण करेंगे ऐसे देवतुल्य लोग।
ये हैं श्री सुरेंद्र सिंह जी। इनका गाँव है गोटरा और ये वर्तमान में सपरिवार ग्रेटर नोएडा में रहते हैं। चौधरी सुरेन्द्र जी पिछले एक महीने से बार-बार अपने गाँव जा रहे थे और अपनी गाँव की खाली पडी हवेली में एक बगीचा बना रहे थे। साथ ही पूरी हवेली की रंगाई-पुताई भी करवा रहे थे। गाँव के लोग लगातार यह देख रहे थे, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि चौधरी सुरेन्द्र जी अपनी खाली पडी हवेली में इतना पैसा क्यूँ खर्च कर रहे हैं।
फिर अचानक एक दिन रविवार के दिन उन्होंने टीम ग्राम पाठशाला को अपने गाँव बुलाया और कहा- "देखिये अब मेरी हवेली बिल्कुल तैयार है, मैंने इसमें बच्चों के लिए एक प्यारा सा बगीचा भी बनवा दिया है। इनमें चार बड़े-बड़े कमरे हैं जिनमें से एक कमरा मेरे लिए छोड़ दीजिए और बाकी तीन कमरों में ग्राम पाठशाला लाइब्रेरी बनवा लीजिए।"
यह सुनकर हम सभी भावुक हो गए कि कोई व्यक्ति कैसे अपनी करोड़ों की हवेली में गाँव के बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनाने के लिए तैयार है!
चौधरी सुरेन्द्र जी ने आगे कहा कि वह अपनी हवेली में पन्द्रह दिनों में लाइब्रेरी बनाकर तैयार कर देंगे।
टीम ग्राम पाठशाला ने चौधरी सुरेन्द्र जी का आभार व्यक्त किया, लेकिन उनसे अनुरोध किया कि पहले वह अपनी हवेली के बजाय गाँव के पंचायत घर में लाइब्रेरी बनवाने का प्रयास करें और अगर यह प्रयास सफल नहीं हो तो फिर अपनी हवेली में ही लाइब्रेरी बनवा दें
नमन है ऐसे देव तुल्य लोगों को👏👏
सूचना स्रोत
श्री लालबहार जी
प्रस्तुति

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