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एक अनूठा अभियान 'आनुवंशिक बल सुनहरा कल'

'आनुवंशिक बल सुनहरा कल' अभियान को समाज में कार्य करते हुए आज दो वर्ष पूर्ण हो गए हैं। हमने अभी तक बारह कार्यक्रम  आयोजित किए जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में। अभी तक लगभग गुर्जर समाज के लगभग आठ सौ बुद्धिजीवियों  ने हमारे कार्यक्रमो में भाग  लिया है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में हम आगामी तीन माह में कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे हैं। यद्यपि अभी हम लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं लेकिन सामाजिक कार्य में यह सामान्य बात और परिस्थितिजन्य है परंतु संतोषजनक है कि हम अपने उद्देश्य और कार्यप्रणाली पर ही आगे बढ़ रहे हैं। समाज  को सही दिशा में केवल बुद्धिजीवी ही ले लो जा सकते हैं। हमारा निर्णय  कि 

"संगठन को राजनीतिज्ञों और धार्मिक  भावनाओं से अलग रखा जाना चाहिए।"

बिल्कुल सही सिद्ध हो रहा है। हम आरंभ में यह आशा कर रहे थे कि हम समाज के युवाओं  को भविष्य  के लिए  तैय्यार  करने में सफल होंगे, परंतु इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। हमारे कार्यक्रमों में प्रौढ वर्ग की सहभागिता अधिक हुई  है। इसलिए   सहभाग  की आयू सीमा 20  से 45 की है। व्यक्तिगत, राजनीतिक, धार्मिक  न आलोचना न प्रसार की नीति आगे भी लागू रही है। अभी तक  अधिकारी/कर्मचारी  की रुचि अधिक  रही है।  इसलिए  इनको अधिक  से अधिक संख्या में सहभाग कराना उचित रहेगा। हम चाहते थे कि भविष्य के लिए  राजनीति करने  योग्य व्यक्ति तैय्यार  किए जाएं, परंतु अभी इस क्षेत्र मे भागमभाग वाली प्रबल भावना है। एक- दो साल में ही पार्षद मेयर, विधायक, सांसद, मंत्री और मुख्यमंत्री तक की सारी सीढी भागते हुए चढना चाहते हैं और वास्तव में 15-20  सीढी चढ़कर ही हांफने लगते हैं। ऐसा लग रहा है कि अभी कम से कम 5-7  साल और लगेंगे भविष्य  के राजनीतिज्ञ  तैय्यार  करने में।

सामाजिक  विकास एक सतत प्रक्रिया  है। इसके लिए समाज के बुद्धिजीवियों को आगे आना चाहिए क्योंकि यदि वातावरण ही ठीक नहीं होगा तो व्यक्तिगत  प्रयास अपेक्षित सफलता नहीं देते हैं।

हमारे ऊपर इंगित कार्यक्रम  की  विषय वस्तु  समाज  के अतीत (गौरवपूर्ण  इतिहास, हमारी श्रेष्ठ सभ्यता, राष्ट्र के लिए समाज के समर्पण, सामाजिक न्याय, और हमारे श्रेष्ठ व्यक्तित्व) तथा भविष्य  के लिए  शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, अर्थतंत्र तथा  राष्ट्रव्यापी  संगठन पूर्ववत ही है।

आगामी तीन कार्यक्रम आयोजित करने के बाद संभवत: मार्च 2025 में सभी प्रदेशों से 5-7 प्रतिनिधि एकत्र होकर इस कार्यक्रम को राष्ट्रव्यापी और लंबे समय तक प्रभावी बनाने के लिए विचार मंथन किया जाएगा। तभी संगठन के भविष्य का स्वरूप निर्धारित होगा।

इंजीनियर शेषराज सिंह

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