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"कार्य को कभी भी खुद पर हावी न होने दें।"

 भूमिका

हमारा जीवन सदैव हमको जीवन की विविध प्रक्रियाओं से अवगत कराता रहता है और यही प्रक्रियाएं जीवन को सरल करती जाती हैं। मसलन यदि कोई कहता है कि

 "कार्य को कभी खुद पर हावी न होने दें।"

विवरण

किसी ने कहा है कि "कार्य को कभी खुद पर हावी न होने दें।" 

इसका आशय यह है कि कार्य को कभी अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर हावी नहीं होने देना चाहिए। हमारे जीवन में कार्य के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण पहलू भी होते हैं, जैसे परिवार, दोस्त, शौक, आराम और स्वास्थ्य। जब कोई व्यक्ति अपने कार्य को इस हद तक प्राथमिकता देता है कि उसके पास बाकी चीज़ों के लिए समय या ऊर्जा नहीं बचती, तो यह संतुलन बिगड़ने की स्थिति को दर्शाता है।

इससे भिन्न एक अन्य स्थिति यह है कि यदि कोई कार्य करना है तो उस कार्य पर ही हावी हो जाएँ क्योंकि यदि कार्य आपके पुरुषार्थ पर ही हावी हो गया तो कार्य हो ही ना पाएगा। ऐसा एक पुरुषार्थी प्रकृति के श्रमिक श्रेणी के निरक्षर व्यक्ति का मानना था। आइए इसको कुछ विस्तार से समझते हैं।

संतुलन बनाए रखना

जीवन में कार्य और निजी ज़िंदगी के बीच संतुलन बनाना बेहद ज़रूरी है। 

      कार्य और व्यक्तिगत जीवन के संतुलन को दर्शाती छवि

अगर कोई व्यक्ति सिर्फ़ कार्य में ही उलझा रहता है, तो उसकी मानसिक और शारीरिक थकावट बढ़ सकती है। इसका एक अपवाद यह भी है कि यदि कोई किसी कार्य को पूर्ण करके ही हटता है तो उसको कार्य के पूरा हो जाने पर तनिक सा भी मानसिक दबाव न होने का संतोष होता है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

निःसंदेह कार्य का अत्यधिक दबाव होता है और उसके कारण व्यक्ति को तनाव, चिंता, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। लेकिन कार्य के हो जाने के उपरांत की संतुष्टि की अनुभूति के तुल्य यह दबाव कुछ भी नहीं। 

रिश्तों पर प्रभाव

कोई भी व्यक्ति जब कार्य को अपनी प्राथमिकता बना लेता है, तो उसका परिवार और दोस्तों के साथ समय व्यतीत करने का अवसर छूट जाता है। यह समय रिश्तों में दूरी पैदा कर सकता है। इसके ठीक विपरीत कोई भी कार्य समयबद्ध तरीके से पूर्ण हो जाने पर रिश्तों को और प्रगाढ़ और आत्मीय बना सकता है।

खुद के लिए समय

जीवन में आराम, अपने शौक पूरे करना और खुद के लिए समय निकालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि कार्य करना। 

अतः कार्य पर हावी होने की नीति को ही जीवन में अपनाना चाहिए। यह गुरुमंत्र जैसा है जो आपको सदैव बाधा उत्पन्न करने वाली स्थितियों से बचाकर रखेगा। इसी क्रम में यह भी ध्यान रखें कि कार्य करना ज़रूरी है, लेकिन ज़िंदगी में खुशहाल और स्वस्थ रहने के लिए भी यह ज़रूरी है कि कार्य आपकी ज़िंदगी पर नियंत्रण न करने पाए। खुद को समय दें, अपने परिवार और पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालें और जीवन को संतुलित तरीके से जिएं तथा कार्य को भी समयबद्ध तरीके से करें।

सूचना स्रोत

शब्दशिल्प

चित्रांकन

चैट जीपीटी से साभार

प्रस्तुति




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