भूमिका
यद्यपि यह छोटा-सा और वास्तविक वार्तालाप है जिसमें प्रतिभागी एक वृद्ध और एक दस वर्षीय बालक है। इस वार्तालाप की विशेषता है बालक की सोच का अत्यधिक व्यापक होना है जो बहुआयामी थी।
बातचीत का विवरण
अपराह्न का समय था और एक बड़े से पार्क में घूमता एक बालक पार्क में घूमने के दौरान निरंतर इधर उधर देख रहा था तो यकायक उसका चेहरा खिल उठा और उसने जेब से एक बैग निकाला और पार्क की क्यारी में पड़ी बोतल को उठाकर उसमें डाल लिया।
पार्क में बैठे वृद्ध ने बालक को अपने पास बुलाया और बालक से पूछने पर उसने बताया कि बेकार पड़ी बोतलों को एकत्रित कर रहा हूं और फिर एकत्रित कर उनको बेच दूंगा।
मुश्किल से दस वर्ष का बालक होगा लेकिन सोच हैरत में डालने वाली थे। घूमकर स्वास्थ्य लाभ, बोतलें एकत्रित करके पार्क की सफाई और उन एकत्रित बोतलों को बेचकर अर्थ एकत्रण। धन्य हैं उसकी परवरिश जिसने उसको बाल्यकाल में ही उन्नत सोच दे दी। इस घटनाक्रम को जब लोगों के संज्ञान में लाया गया तो समस्त लोग नकारात्मकता से प्रभावित लगे और किसी का भी दृष्टिकोण ये नहीं था कि उसकी उन्नत सोच वाली परवरिश की तारीफ करे अपितु किसी ने कुछ तो किसी ने कुछ लेकिन जो भी कुछ कहा गया सब अनर्गल था।
उलझन सुलझन की पहल


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