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आज स्थिति बन गई है कि समझना हो गया है बाध्यता

भूमिका

"छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी

नए दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी।"

हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी

इस गीत के रचयिता ने शायद हम भारतीयों की शास्त्रार्थ की परम्परा को ध्यान में रखकर यह गीत लिखा होगा। यह वह परंपरा थी जो सौ बोलों को भी मौन कर देने का माद्दा रखती थी। सौ बातों की एक बात कि जितना जानेंगे उतने ही ज्ञान चक्षु खुलेंगे।

बदलावों के साथ सामंजस्य बनाना ही होगा

साथियो 'समाज में हो रहे परिवर्तन के साथ सामंजस्य सभी के लिए श्रेष्ठ विकल्प है'। 

हम यदि यह चर्चा कर रहे हैं तो इसलिए क्योंकि वर्तमान जीवन में कृत्रिम बुद्धिमता, तकनीक, मशीनों और सामान्य बुद्धि का एक साथ

                           कृत्रिम बुद्धिमता

उपयोग हो रहा है और वह सब आपके, हमारे और सभी के जीवन पर प्रभाव भी डाल रहा है आप उस प्रक्रिया में प्रतिभाग करें या नहीं। अब दूसरी बात पर आते हैं कि वर्तमान में सोशल मीडिया से अधिकांश मानव जगत किसी ना किसी रूप में जुड़ गया है तो हमको इस प्रैक्टिस को और बेहतर तथा उन्नत कराने की दिशा में योगदान करना चाहिए और सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म की पोस्ट को सब्सक्राइब, लाइक, शेयर और कमेंट करने की जरूरत को भी समझना चाहिए और यह भी कि इस प्रैक्टिस को आचार व्यवहार में लाने का आखिर परिणाम क्या होगा?

साथियो हम और आप जब कभी भी सोशल मीडिया के किसी प्लेटफॉर्म पर सक्रिय होते हैं और अपने विवेक के अनुसार वहां अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं तो इंटरनेट संबंधी विविध किस्म के शोधों को अपनी स्वीकृति प्रदान करते हैं जो इन शोधों की संख्या में वृद्धि में तथा प्रगति में सहायक होती है जिसका कि परिणाम एक बेहतर इंटरनेट आचार व्यवहार तथा उत्तम परिवेश के रूप में आने की अपेक्षा की जा सकती है। 

आइए समझने का प्रयास करते हैं कि सोशल मीडिया पर उपरिवर्णित गतिविधियों पर हमारी प्रतिक्रिया का क्या परिणाम होता है?

किसी भी कंटेंट का समर्थन करना

                                 कंटेंट लाइकिंग

साथियो किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जब हम हम जाते हैं तो व्यू के अंतर्गत हमारी उपस्थिति दर्ज हो जाती है वहीं इसके विपरीत हमारे सक्रिय होकर जा हम किसी प्लेटफॉर्म या फिर चैनल को सब्सक्राइब करते हैं या फिर पोस्ट को लाइक करते हैं, तो हम कंटेंट क्रिएटर को अपना समर्थन व्यक्त करते दिखते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि उनकी मेहनत पर प्रतिक्रिया आ रही है और उसको सराहा जा रहा है। अतः हमको यह समझना ही होगा कि हमारी प्रतिक्रिया हमारे अक्रिय रहने पर भी जा रही है और यदि सक्रिय होकर जाएगी तो वह अच्छा कंटेंट बनाने के लिए प्रेरित करेगी और आपकी और हमारी बुद्धिमता का यह आकलन भी संभव हो पाएगा कि 

'हमने जो किया वह कितना सही था?' 

एल्गोरिदम में मदद 

सोशल मीडिया के प्रत्येक प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के के अनुसार आकलन होता है कि जितने अधिक लाइक, शेयर, और कमेंट आए हैं, उस कंटेंट को उतनी ही अधिक प्राथमिकता मिले। इससे उसको और अधिक लोग देख सकते हैं और चैनल की पहुंच बढ़ सकती है और यह आपकी और हमारी अक्रिय व सक्रिय दोनों ही स्थितियों में बढ़ेगी लेकिन सक्रिय स्थिति विविध उन्नत शोधों को जन्म देगी। साथ ही बुद्धिमता को लेकर भी शोध आरम्भ हो सकेंगे जो शोधों की गुणवत्ता को सुधारने में मदद करते हैं।

अच्छे कंटेंट की पहचान 

सब्सक्राइब, लाइक और कमेंट के ज़रिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पता चलता है कि कौन सा कंटेंट अच्छा, उत्तम या फिर सर्वोत्तम श्रेणी

                            कंटेंट लाइकिंग
का है, जो हमारे विवेक का भी परिचायक होता है। इससे वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अन्य यूज़र्स को भी वह कंटेंट दिखाता है जो आपके जैसी रुचियों के अनुरूप हो। इस से रुचियों को लेकर शोध आरम्भ होते हैं।

सामुदायिक भावना 

जब हम किसी कंटेंट पर किसी भी रूप में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं, तो हम अपने विचार और फीडबैक भी शेयर करते हैं। इससे एक कम्यूनिटी बनती है, जहाँ लोग एक दूसरे के साथ संवाद कर नए 

                               वैश्विक समुदाय

शोधों को आरंभ करने में सहायक हो सकते हैं और अपनी बुद्धिमता को भी परिष्कृत कर सकते हैं।

कंटेंट को प्रसारित करने में सहायक 

किसी भी कंटेंट को शेयर करने से अन्य लोगों को भी वह कंटेंट देखने का मौका मिलता है, जिससे प्लेटफॉर्म की ऑडियंस बढ़ती है जिसमें आपकी और हमारी भूमिका भी सिद्ध होती है। 

इसलिए, स्वाभाविक रूप से हमें अपनी भूमिका निभानी ही होगी कंटेंट को सब्सक्राइब, लाइक, शेयर और कमेंट करके ताकि अच्छा कंटेंट बढ़ता रहे और हमारी पसंद का ध्यान रखा जाए। साथ ही विविध रूपों में हो रहे शोध भी निरंतर चलते रहें। 

सूचना स्रोत

शब्दशिल्प

चित्र स्रोत

गूगल पर उपलब्ध विविध प्लेटफॉर्म

प्रस्तुति



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