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जैविक कृषि में संलग्न है पूरा परिवार

भूमिका

साथियो! आइए आज जैविक कृषि में पूरी तरह शामिल एक परिवार के समस्त सदस्यों से बात कर समझने का प्रयास करते हैं कि एक सामान्य कृषि क्षेत्र में घर के आसपास हरे-भरे खेतों में रहने वाले परिवार की गतिविधियां और दिनचर्या कैसी होती है। संजय चौहान, उनकी धर्मपत्नी ममता एवं सुपुत्री शुभावरी ने जैविक कृषि के लिए समर्पित स्वस्थ जीवन को चुना है और यह परिवार प्राकृतिक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता देता है तथा सिंथेटिक रसायनों के उपयोग से पूरी तरह बचता है। वे जैविक कृषि के लिए अपने ज्ञान और जुनून को दूसरों के साथ साझा करते हैं, सतत कृषि और स्वस्थ खान पद्धतियों को बढ़ावा देते हैं। साथियो, आप जान लें कि जैविक कृषि में सम्मिलित परिवार एक ऐसी जीवनशैली अपनाता है जो पर्यावरण के लिए लाभकारी और पूर्ण दोनों है। वे भूमि के संरक्षक हैं, स्वस्थ भोजन प्रदान करते हैं और दूसरों को सतत विकल्प बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। तो आइए आज मिलते हैं इस उन्नत सोच वाले परिवार से।



श्री संजय चौहान और उनके परिजन

शुभावरी से बातचीत

प्रश्न १. बेटा आप अपने अभिभावकों की सहायता किस किस तरह कर पाती हो?

उत्तर - "मैं अपने माता-पिता के साथ खेत में फसलों के बीजों की बुवाई जिसमें गन्ने की बुवाई, धान की बुवाई, सरसों की बुवाई व ट्रैक्टर द्वारा खेत की जुताई, ट्रैक्टर द्वारा गन्ने की जुताई आदि सभी कृषि कार्य कर लेती हूं। आम के फलों की तुड़ाई, गायों को चारा डालना, दूध निकालना, दूध से दही, मक्खन, घी व पनीर बनाना और अपनी मां के साथ खाना बनाना। खाना मैं अकेले भी बना लेती हूं।"

प्रश्न २. कृषि कार्यों और अपने अध्ययन में आप किस प्रकार सामंजस्य बना पाती हो?

उत्तर - "मैं कॉलेज में 45 किलोमीटर दूर अपने एनफील्ड मोटरसाइकिल से जाती हूं। मैं प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे तक उठ जाती हूं। निवृत्त होकर योग करती हूं तथा कॉलेज जाने से पहले घर की साफ सफाई भी नियमित रूप से करती हूं। 

गाय का दूध निकलवाकर यदि समय मिलता है तो मां के साथ नाश्ता बनाने में सहयोग करती हूं।

दोपहर 2:00 बजे कॉलेज से वापस आकर एक घंटा आराम करती हूं सायं 3:00 से 5:00 बजे तक अपने खेतों को देखती हूं।

शाम 5:00 से 6:00 तक गांव के बच्चों को नि:शुल्क योग सिखाती हूं।

शाम 6:00 से 7:00 तक गायों का दूध निकालती हूं। शाम 7:00 बजे से 8:00 बजे तक खाना बनाना व खाना खाना और साथ-साथ दूध उबालना, घी बनाना और दही जमाने का काम भी होता रहता है।

शाम 8:00 बजे से 9:30 तक अपनी पढ़ाई करती हूं और साथ में पेंटिंग बनाती हूं।"

प्रश्न ३. क्या आपने कुछ ऐसा जैविक कृषि के परिप्रेक्ष्य में किया जिसको आप अपने खुद का प्रयोग कह सकें?

उत्तर - "मैंने कृषि विज्ञान केंद्र सहारनपुर से करीब 25 ट्रेनिंग प्रमाण पत्र प्राप्त किये हैं। ट्रेनिंग लेकर अपने खेतों में लाइट ट्रैप लगाये, और गन्ने में फेरोमेन ट्रैप लगाया जिससे गन्ने में बेधक कीटों का नियंत्रण हुआ, जिससे फसलों पर आने वाले कीटों की रोकथाम हुई।"

प्रश्न ४. आप विविध कार्यक्रमों में अक्सर व्यस्त रहती हैं तो क्या आपको अपने काम के छूट जाने का मलाल होता है?

उत्तर - "जी बिल्कुल होता है। मेरा काम ही मेरी पहचान है। इसलिए काम छूटने का दुःख तो होता है, लेकिन वह दु:ख तब खुशी में बदल जाता है जब मैं अपने किए हुए काम को और लोगों को बताती हूं और वे भी मेरे कार्य की प्रशंसा करते हैं। प्रचार प्रसार के लिए काम छोड़ना भी अच्छा है।"

प्रश्न ५. क्या आप जैविक तथा रासायनिक खेती के उत्पादन में कोई अंतर पाती हैं?

उत्तर - "जैविक कृषि द्वारा उगाए गए अनाज या फसल की मात्रा तो कम होती है लेकिन वे स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं और हमारी सेहत से कीमती दुनिया में कुछ भी नहीं है। रही बात कीमत की बाजार में इसकी कीमत सामान्यतः कीमतों से तीन से चार गुनी तक मिल जाती है।"

पिता संजय चौहान जी से बातचीत

प्रश्न १. आप कबसे जैविक खेती में संलग्न हैं? इसको करने का निर्णय आपका अपना था या कि आपके पिता या फिर किसी और का?

उत्तर - "सन 2015 में मेरी ससुराल से आम की पेटी आई थी उसमें आम पकाने के लिए कार्बाइड रखा था जब वह मेरी पत्नी ने पेटी खोली उसी दिन से इसके शरीर पर एलर्जी हो गई थी। हमने इसका शहर के मशहूर डॉक्टर रविंद्र राणा वह अन्य देसी डॉक्टर से भी इलाज कराया लेकिन यह एलर्जी ठीक नहीं हुई । पिताजी तो खाद और दवाओ के प्रयोग को पहले से ही मना करते थे कि तू इस जमीन का खाद डालकर नाश करेगा।हमारे पूरे परिवार ने फैसला किया कि अपने खाने के लिए अपनी फसले बिना खाद और दवा के पैदा करेंगे (जैविक खेती शुरू कर दी) फिर इन उगाई गई फसल व सब्जियों का स्वाद अच्छा लगने लगा और हमारे घर जो भी मिलने वाला या अतिथि आता वह हमारे खाने की तारीफ करके जाता और हमसे जैविक फसल की मांग रखता फिर हमने धीरे-धीरे फसल का रकबा बढ़ाना शुरू कर दिया हमारे मुख्य फसल गन्ना है और हमारे गुड व शक्कर की धीरे-धीरे डिमांड बढ़ने लगी फिर हमने अपने पूरे परिवार की 40 एकड़ खेती को जहर मुक्त बना दिया।"

प्रश्न २. जैविक खेती को क्या आप मुनाफे का सौदा मानते हैं?

उत्तर - "हमारा स्वास्थ्य ही दुनिया की सबसे कीमती चीज है ।बिना जहर का खाना खाने से स्वास्थ्य मुफ्त में मिलता है। शुगर और बीपी सिर्फ गलत खाना खाने के कारण होती है। हमारे घर में एक कुत्ता भी है खाना शुद्ध खाने की वजह से वह भी 18 साल का हो गया है।"

प्रश्न ३. जैविक खेती आपके क्षेत्र में आप अकेले करते हैं या आपके कुछ अन्य पड़ोसी भी?

उत्तर - "हमें देखकर अब हमारे गांव के करीब 10 किसान और जैविक खेती करने लगे हैं।"

प्रश्न ४. जैविक खेती करने के दौरान वह कौन सा व्यवसायिक अवसर था जब आपने खुद को गौरवान्वित महसूस किया?

उत्तर -मुझे ऐसे कहीं अवसर मिले हैं 

1. पिछले वर्ष किसान दिवस पर मेरी पत्नी ममता चौहान को मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने जैविक खेती करने के लिए 75000 ₹ का पुरस्कार व एक प्रमाण पत्र दिया

२. मेरी बेटी शुभावरी चौहान को पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश की राज्यपाल ने सम्मानित किया।

३. पिछले महीने उत्तरांचल के एडीजीपी ने मेरे परिवार कोअपने कार्यालय पर बुलाकर एक ज्ञानवर्धक पुस्तक व एक डायरी, पैन देकर सम्मानित किया।"

प्रश्न ५. जैविक खेती करने के दौरान कब कब आपको शासन द्वारा दिया जाने वाला प्रोत्साहन सर्वाधिक सराहनीय लगा?

उत्तर: - "शासन द्वारा मुझे हर वर्ष प्रमाण पत्र व समय-समय पर अलग-अलग धनराशि से सम्मानित किया जाता रहता है ।

हजारों किसानों की एक गोष्ठी में जब जिले के कृषि उपनिदेशक ने मंच से कहा की संजय चौहान जैविक खेती करते हैं और इनका गुड, शक्कर 100 से 150 रुपए किलो तक बिकता है।"

माता जी ममता से बातचीत

प्रश्न १. कृषि कार्यों में खेती और घरेलू कार्यों में आप कैसे सामंजस्य बैठा पाती हैं?

उत्तर - जो फसल खेत से पैदा होकर आती है मैं उसका घर में रखरखाव करती हूं उसकी पैकिंग करती हूं और यदि शुभावरी व इसके पिता घर पर ना हो तो मैं ग्राहक को सामान भी बेचती हूं।

गायों का दूध निकलवाना दूध से दही पनीर मक्खन घी बनाना यह काम करती हूं 

और छत पर जो सब्जियां और फूलों के पौधे लगाए हुए हैं उनकी देखभाल भी करती हूं। 

मेरे पति को यदि दोपहर में खेत से आने में देर हो जाती है तो मैं खाना खेत में ही पहुंचा देता हूं 

जो लेबर हमारे कोल्हू पर गुड़ शक्कर बनती है उनके लिए चाय नाश्ता,खाना बनाती हूं।

प्रश्न २. क्या आपके पीहर में भी आपके परिजनों द्वारा जैविक खेती करते देखकर कोई प्रोत्साहित हुआ?

उत्तर - मेरी भाभी ने घर पर ही जैविक सब्जियां उगाना शुरू कर दी हैं।

प्रश्न ३. क्या जैविक खेती को लेकर आपको प्रोत्साहित करने के ध्येय से आपको भी बुलावा आता है?

उत्तर - जी मुझे दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने जैविक खेती करने के लिए ₹75000 का पुरस्कार व प्रमाण पत्र दिया।

जिले में होने वाली कृषि गोष्टी व कृषि मेलो में जाने के लिए निमंत्रण आता है।

प्रश्न ४. आपके फार्म को देखने आने वाला कौन सा व्यक्ति ऐसा था जो आपको जैविक खेती संबंधी सबसे उपयोगी सलाहें देकर गया?

उत्तर: -एक बार मेरे खेत पर कृषि उपनिदेशक श्री राकेश जी, भूपेंद्र मलिक वह कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉक्टर आई के कुशवाहा अपनी पूरी टीम के साथ आए थे उन्होंने हमें फसलों में कीड़ों की रोकथाम वह बीमारियों की रोकथाम के तरीके बताएं और हमें अपनी फसल बेचने के लिए सीधे उपभोक्ताओं से संपर्क बनाने के लिए कहा

प्रश्न ५. क्या जैविक खेती करके आप अपना जीवनयापन सुचारू और सुगम बनाए रखे हुए हैं?

उत्तर - "जी हां हमारा जीवन यापन अच्छे से चल रहा है। 

हमने 1 जनवरी 2024 से अपने गांव में सभी घरों में निशुल्क पेयजल प्रदान किया है जिस गांव के लोग भी खुश हैं।"

सूचना स्रोत

श्री संजय चौहान

प्रस्तुति









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