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गुर्जर महोत्सव के सूत्रधार दिवाकर बिधूड़ी जी से बातचीत

भूमिका

बहुत बड़े स्तर पर होने वाले आयोजन समग्र समाज के लिए नजीर होते है। विगत दो वर्षों से प्रति वर्ष गुर्जर महोत्सव के आयोजन में सूत्रधार की भूमिका का निर्वहन कर रहे श्री दिवाकर बिधूड़ी जी से की गई बातचीत यदि आपके समक्ष प्रस्तुत है तो उसके पीछे मनोभाव है कि ऐसे आयोजनों की प्रक्रिया को हम सभी सीखें।

अतिथि का परिचय

साथियो, आज हमारे मध्य हैं गुर्जर समाज की कला और संस्कृति के संरक्षण की दृष्टि से गठित एक ट्रस्ट के सर्वेसर्वा श्री दिवाकर बिधूड़ी जी।

साथियो, किसी भी समाज की कला और संस्कृति तथा कलाकृतियाँ समाज के इतिहास, परंपराओं और मूल्यों का ना सिर्फ प्रतिनिधित्व करती हैं, बल्कि उनको सहेजने में भी सहायक होती हैं। श्री दिवाकर जी द्वारा गठित ट्रस्ट यह सुनिश्चित करता है कि ऐसी धरोहर विकृत न हों, विस्मृत ना होने पाएं या विनाश जैसी परिस्थिति से भी सुरक्षित रहें और समाज की भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहें।

दिवाकर जी और ट्रस्ट कला और संस्कृति के प्रति सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए प्राणपण से प्रयासरत हैं। इनमें जनता को शामिल करने से संरक्षण प्रयासों के लिए व्यापक सामाजिक प्रतिबद्धता पैदा होती है।

इस ट्रस्ट, इसके स्वयंसेवकों और इसके शुभाकांक्षियों का यह मानना है कि सांस्कृतिक विरासत और कला पर्यटन को आकर्षित कर सकते हैं। इसका उदाहरण राजस्थान स्थित देवमाली गांव है और उस पर आधारित वृत्तचित्र बनाने वाले श्री भरतराज गुर्जर जी। साथ ही ऐसे प्रयास समुदायों के लिए आर्थिक लाभ भी उत्पन्न कर सकते हैं। ट्रस्ट सांस्कृतिक स्थलों और कार्यक्रमों समेत लेखन को बढ़ावा देकर और प्रबंधित करके इस क्षमता का लाभ उठा सकता है तथा स्थानीय और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं में योगदान दे सकता है। यह ट्रस्ट सुनिश्चित कर सकता है कि समाज की ये मूल्यवान संपत्तियां वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों द्वारा संरक्षित हों और सराही जाएं। आइए मिलते हैं श्री दिवाकर बिधूड़ी जी से और जानते हैं उनकी योजनाओं को।



बातचीत

प्रश्न १. बिधूड़ी सर, आपने यह ट्रस्ट बनाने का निर्णय कैसे लिया और इस निर्णय को पुख्ता बनाने में कौन आपके सहयोगी रहे?
उत्तर - "गुर्जर समाज देश के कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इस समाज की समृद्धशाली संस्कृति, विरासत, खानपान, वेशभूषा तथा कला और गुर्जरी भाषा व उस पर आधारित लोकगीत प्रदर्शित करने के उद्देश्य से ट्रस्ट का गठन किया गया है। ट्रस्ट संबंधी निर्णय लेने में बहुत सारे सहयोगी रहे हैं अतः किसी एक का उल्लेख करना अनुचित होगा!"

प्रश्न २. सर, इस ट्रस्ट के माध्यम से कौन-सा एक काम आपकी सर्वोच्च वरीयता पर है और क्यों?
उत्तर - "ट्रस्ट के माध्यम से गुर्जर समाज की समृद्धशाली संस्कृति में सम्मिलित वेशभूषा, खानपान, भाषा, विरासत, लोकगीत, कला और लोक संगीत को देश और दुनिया के सामने लाना मूल उद्देश्य है। गुर्जर समाज संस्कारवान समाज है तो उस परिवार व्यवस्था को स्थापित करना है। हमारा मानना है कि 
"अगर परिवार ख़ुशहाल है तो देश भी ख़ुशहाल रहेगा।"

प्रश्न ३. सर, गुर्जर महोत्सव जैसी बड़ी संकल्पना को आपने मूर्त रूप दिया। क्या आपको नहीं लगता कि यदि इनका आयोजन राज्यवार होता तो कहीं अधिक उपयोगी होता?
उत्तर - "गुर्जर महोत्सव को राज्यवार उत्सव रूप में आयोजित करने का प्लान भी है, लेकिन अभी हमने 'गुर्जर महोत्सव 2022' को दिल्ली थीम पर रखा और 'गुर्जर महोत्सव 2023' को हरियाणा थीम पर रखा तथा प्रस्तावित 'गुर्जर महोत्सव 2024' को हमने उत्तर प्रदेश की थीम पर रखा है। इस तरह हर बार 'गुर्जर महोत्सव' की थीम किसी न किसी राज्य पर रखी जाएगी। 'गुर्जर महोत्सव 2024' में हमको समाज के उद्यम और उद्योग को विशेष हाइलाइट करना है।"

प्रश्न ४. सर, क्या आपके अतिरिक्त आपके समाज को जोड़ने के ध्येय से किन्हीं और सज्जन ने गुर्जर महोत्सव जैसा कोई प्रयास किया है?
उत्तर - "जी, जब हमने गुर्जर महोत्सव पहली बार किया तो उसके बाद मुझे अनेक लोगों ने फ़ोन करके बताया कि इसी प्रकार का कार्यक्रम हम करना चाहते थे, लेकिन नहीं कर पाए, और कई ने तो बताया कि राजेश पायलट साहब भी इसी प्रकार का कार्यक्रम करना चाहते थे लेकिन समय से पहले उनकी देहांत हो गया। कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला जी भी इसी प्रकार का कार्यक्रम करना चाहते थे। और भी कई सारे अन्य लोगों ने भी मुझे कहा कि उन्होंने सोचा लेकिन वो कभी शुरू नहीं करा पाए। मेरा मानना है जिस कार्य का जब कोई समय होता है वह तभी संभव होता है।"

प्रश्न ५. सर, अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं के कारण राजस्थान का देवमाली गांव पर्यटन केंद्र घोषित कर दिया गया है! इसके माध्यम से वहां पर पर्यटन की आपको क्या संभावना लगती है?
उत्तर - "जी, देवमाली गाँव को बेस्ट पर्यटक गाँव घोषित करना समयानुकूल लिया गया बहुत अच्छा क़दम है और अब वहाँ देश के कोने कोने से ही नहीं, विदेश से भी लोग जा रहे हैं। वहाँ टूरिज़्म का और सरकार को रेवेन्यू का अच्छा लाभ मिलेगा। हमारे ऐसी विशेषताओं से युक्त अन्य गुर्जर गांव भी हैं और उनको भी पर्यटन के अनुकूल घोषित किया जा सकता है जैसे कि विजय सिंह 'पथिक' जी की जन्मस्थली गुठावली ग्राम एवं बुलन्दशहर उत्तर प्रदेश में और राजा विजय सिंह जी के कुंजा बहादुरपुर में भी बनाया जा सकता है। ऐसे और भी अनेक गाँव हैं। 1857 की क्रांति से संबद्ध अनेक गाँव हैं जिनको इसी तर्ज पर पर्यटन स्थल घोषित किया जा सकता है तथा गुर्जर इतिहास को उजागर किया जा सकता है।"

प्रश्न ६. गुर्जर महोत्सव के उपरांत अब आपके शेड्यूल में क्या इसी प्रकार का कोई अन्य आयोजन है?
उत्तर - "जी, अभी भी हमारे कई सारे कार्यक्रम गुर्जर आर्ट एंड कल्चर ट्रस्ट की ओर से अस्तित्व में हैं जैसे कि गुर्जर अधिवक्ता परिचर्चा कार्यक्रम चल रहा है जिसमें हम समाज में विवाह की टूटन के कारण व समाधान पर चर्चा कर रहे हैं जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लगभग सभी ज़िलों में किया जाएगा। कार्यक्रम आयोजन के उपरांत हम इसकी समीक्षा बैठक भी की जाती है भूल सुधार करने जैसे उद्देश्य के साथ। अभी तक इस क्रम में हमने 18 अगस्त को नोएडा में और 14 सितम्बर को ग्रेटर नोएडा में परिचर्चा का आयोजन किया है और आगामी 27 अक्तूबर को हम फ़रीदाबाद में गुर्जर अधिवक्ता परिचर्चा का आयोजन कर रहे है। 
इसके अतिरिक्त हमने क्रांति यात्रा का आयोजन भी किया, जिसमें 1857 की क्रांति के शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सम्मानित कर उन्हें अवार्ड दिए। ग्राम यात्रा की हमने। हाँ, 10 मई 2022 को मेरठ की 18 प्रस्तावों में क्रांति हुई उन गांवों से चलकर दिल्ली की राजघाट पहुँचे। 14 मई 2023 को हमने क्रान्ति यात्रा मेरठ से निकालकर दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम पहुँचकर उन क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन कर उनके परिजनों को सम्मानित किया। 
हमने गुर्जर थाली का आयोजन कर उसमें गुर्जर समाज के खानपान को प्रदर्शित किया।
हम प्रतिवर्ष 31 अगस्त को विमुक्त दिवस मनाते हैं जो सत्तावन के क्रांतिकारी और सांबा सेनानियों को समर्पित रहता है।
गुर्जर डॉक्टर चर्चा का भी हम आयोजन करते हैं जिसमें हमारे समाज के डॉक्टर फ़ेसबुक लाइव के माध्यम से विविध रोगों के कारण बताते हैं और उनका निदान भी बताते हैं।"

प्रश्न ७. आप बड़ा आयोजन करा चुके हैं तथा निरंतर कार्यक्रमों में व्यस्त भी रहते हैं तो उस सब के डॉक्यूमेंटेशन कराने के विषय में क्या कभी आपने विचार किया है?
उत्तर - "जी नहीं, डॉक्यूमेंटेशन करा पाने में अभी हम हम विफल रहे हैं, जो बहुत बड़ी कमी है। यह मैं मानता हूँ, लेकिन इस दिशा में हमारा बहुत गंभीर प्रयास है कि हम सभी कार्यक्रमों का डॉक्यूमेंटेशन करें। उनका संकलन करें और बहुत जल्द हम इसके लिए टीम का गठन कर रहे हैं।"

सूचना स्रोत
श्री दिवाकर बिधूड़ी

प्रस्तुति




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