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"उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है उत्पाद के मानक की जानकारी": कपिल देव

भूमिका

समाज में सकारात्मक गतिविधियां भी नित्यप्रति होती हैं, लेकिन उनके प्रस्तुतिकरण और यथावत प्रेस को भेजने में भी तमाम प्रकार की दुश्वारियां होती हैं। परिणामतः प्रेस विज्ञप्ति में कार्यक्रम का ध्येय, वक्तव्यों को समझने का प्रयास और कार्यक्रम का मूल भाव सिर्फ नाम देने के फेर में लुप्त हो जाता है। यदि नामों के साथ साथ ध्येय, वक्तव्यों और मूल भाव का भी संज्ञान ले लिया जाए तो समाज का कायाकल्प हो सकता है।

कार्यक्रम विवरण को प्रसारित करने संबंधी वीडियो



'मेरा वजूद' के सृजक का प्रतिभाग 

(दिनांक ०९.१०.२०२४)

आमंत्रण



कार्यक्रम विवरण

कार्यक्रम

मुजफ्फरनगर। विश्व मानक दिवस शृंखला के तहत बुधवार को मुजफ्फरनगर में मानक महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें सरकारी विभाग, उद्योगों, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, ज्वैलर्स, स्कूली छात्रों व जनसामान्य ने प्रतिभाग किया।




विवरण एवं संबोधन

मुजफ्फरनगर के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कौशल विकास व व्यावसायिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल थे। 


अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को प्रत्येक उत्पाद के मानकों की जानकारी होनी चाहिए, इससे उन्हें कभी भी किसी उत्पाद को लेकर धोखा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आईएसआई पर पूर्ण रूप से भरोसा किया जा सकता है क्योंकि अधिकारी इसका निरीक्षण करते हैं तथा बाजार में बिक रहे उत्पाद की गुणवत्ता जांचते हैं। उन्होंने कहा कि उत्पाद के विषय में उसके पैकेट में जानकारी दी होती है, जिसे पढ़ना चाहिए और खास तौर से बच्चों को इसकी जानकारी होनी चाहिए।


बीआईएस देहरादून शाखा के संयुक्त निदेशक श्याम कुमार ने विश्व मानक दिवस की इस बार की थीम एसडीजी-9 'उद्योग, नवाचार व अवसंरचना' के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्व मानक दिवस के विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बीआईएस अपने हितधारकों से संपर्क कर रहा है और उनके सुझाव भी ले रहा है। उन्होंने कहा कि बीआईएस यह सुनिश्चित करता है कि विभिन्न उत्पादों के लिए हमेशा अच्छे स्तर के मानक बनाए जाएं।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष वीरपाल निर्वाल ने कहा कि सभी उत्पादों के मानक तैयार होने चाहिए तथा व्यक्तिगत जीवन में भी हमें मानकों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से लोगों के बीच मानकों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।

जिला उद्योग केन्द्र की महाप्रबंधक जैसमीन फौजदार ने कहा कि आईएसआई, हॉलमार्किंग व अन्य मानकों के चिन्हों के विषय में सभी को जागरूक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्योगों को आगे बढ़कर स्वयं मानकों को अपनाना चाहिए, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

प्रतिभागिता

कार्यक्रम में एसडी पब्लिक स्कूल, शारदेन पब्लिक स्कूल, होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल तथा लाला जगदीश प्रसाद इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मानक संवर्द्धन में बेहतर कार्य करने वाले मेंटर, उद्योग, ज्वैलर्स, रिसोर्स पर्सन, क्विज विजेताओं आदि को सम्मानित किया गया।


इस दौरान बिंदल्स पेपर्स मिल्स के तपिश भारद्वाज, मनोज पुंडीर तथा बीआईएस के वैज्ञानिक भाविक राजगौर ने तकनीकी सत्र में जानकारियां साझा की। कार्यक्रम में मुज्जफरनगर कॉमर्स एंड इंडस्ट्री फेडरेशन के सचिव अभिनव स्वरूप भी उपस्थित थे।

आयोजन संकल्पना निर्मात्री इकाई


"विश्व कल्याण के लिए भारतीय युवाओं का संस्कारवान होना आवश्यक"- डॉ. राकेश राणा (०७.१०.२०२४)

कार्यक्रम विवरण

कार्यक्रम

आज दिनांक 07.10.2024, दिन सोमवार को 'मेरा वजूद फाउण्डेशन' एवं 'माध्यमिक शिक्षा विभाग मुजफ्फरनगर' के तत्वावधान में ‘विद्यार्थियों की सफलता में स्वस्थ मन एवं संस्कारों की भूमिका’ नाम से एक कार्यशाला का आयोजन लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, मुजफ्फरनगर के सभागार में किया गया। 

शुभारम्भ

कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ. राजेश कुमार श्रीवास (जिला विद्यालय निरीक्षक), मुख्य वक्ता स्वामी तेजाश्वरानंद (शिक्षाविद एवं संन्यासी), समृद्धि त्यागी, कार्यक्रम अतिथि डॉ. राकेश राणा, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. अखिलेश शर्मा, डॉ. रणवीर सिंह, पं. सजीव शंकर, पंकज धीमान, प्रवेन्द्र दहिया, प्रेरक जैन एवं जिला कोर्डिनेटर आशीष द्विवेदी ने दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यशाला में जिले के लगभग एक सौ तीस विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया और सभी को अतिथियों द्वारा कार्यशाला प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रणवीर सिंह ने किया। 

सम्बोधन 

स्वामी तेजाश्वरानंद ने बताया कि आज की शिक्षा में विद्यार्थियों की सफलता में स्वास्थ्य मन व संस्कारों की भूमिका जो दो शब्दों का महत्वपूर्ण आकर्षक है मन और संस्कार। यदि मन स्वस्थ नहीं है तो हम मानसिक रूप् से बीमार रहते है और हमारी सोचने व करने की क्षमता पर प्रभाव पडता है।  संस्कार के विषय में बताते हुए कहा  कि संस्कार कठिन विषय होते हुए भी वार्ता के द्वारा हम सरल बना लेते है। शरीर आत्मा का स्वामी होता है। हम मन के द्वारा अच्छे और बुरे संस्कार ग्रहण करते है। मन एक मशीनरी है और मन हमारा मित्र और शत्रु भी होता है। मन ही बंधन का कारण है और मन  ही मोक्ष का कारण है, उदाहरण देते हुए बताया कि मन के हारे हार, मन जीते जीत। मन दो भागों में बटा हुआ है जड और चेतन। मन तीन कणों से बना होता है सत, रज और तन। अंत में बताते हुए कहा कि यदि मन पर मल आ गया है तो कुसंस्कार जाग्रत होते है। मन के मल को प्रणायामक एवं योग के द्वारा हटाया जा सकता है। 








मुख्य अतिथि राजेश कुमार श्रीवास द्वारा बताया गया कि स्वस्थ मन और सस्कारों का महत्व सबसे पहले माँ ही देती है इसके बाद संस्कार विद्यालय और समाज देता है। 

समृद्धि त्यागी ने बताया कि मन और संस्कार का निर्माण विद्यालय में ही होता है। आज की नई युवा पीढी में संस्कारों की कमी है उदाहरण देते हुए एक लडकी की इच्छा थी कि मैं शादी अपने मन से ही करूगी यदि जब ऐसा नहीं हुआ तो उसने बडों मम्मी, पापा, दादा, दादी को थप्पड मार दिया इसी से पता चलता है कि संस्कारों की बहुत कमी है, संस्कार देने में अभिभावक और अध्यापक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिभावक एवं अध्यापकों को बच्चों की भावना का समझना चाहिए और बच्चों को स्कूल में संस्कारों की शिक्षा देनी चाहिए। एक अच्छा अध्यापक वहीं होता है जो एक अच्छे संस्कार सिखा दे और बच्चे हमेशा याद रखे, तभी आप सफल शिक्षक माने जाते है। 

डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि विद्यार्थियों की सफलता एवं संस्कार ही हमारे देश की नींव को मजबूत करता है। शिक्षक एक मंच का कलाकार भी होता है उदाहरण देते हुए बताया कि जब हम तीन घण्टे फिल्म देखते समय पलक नहीं झपकते उसी प्रकार शिक्षक को कक्षा में शिक्षण करते समय पलक नहीं झपकनी चाहिए और हमें अपने आप में परिवर्तन करना होगा तभी हम छात्र को गलत संगत से बचा सकते है और हम जैसे है वैसे ही दिखने चाहिए। असंभव कुछ नहीं संभव सब कुछ है। यदि जिन्दगी में सफल होना है तो किसी बात को लेकर समझौता नहीं करना चाहिए। अंत में उन्होंने बताया कि छात्रों को अपने बच्चों की तरह प्यार करना चाहिए क्योंकि विद्यार्थियों को जब शिक्षक में अपन्तव लगता है तब वह शिक्षक को अपना आदर्श मानता है साथ ही साथ उसकी डांट फटकार को भी सहन करके शिक्षक से लगाव रखता है। 

डॉ. राकेश राणा ने बताया कि समाज में छोटे बच्चों की अपेक्षा बडों बच्चों को समझाना कठिन होता है भारत एक ऐसा देश है जो संस्कार और स्वास्थ्य की चिंता कर सकता है। अन्य देश ऐसा नहीं सोचते। भारत का एक ध्येय है वह अध्यात्मिक विकास करता है जबकि पूरी दुनिया में ऐसा किसी भी देश में नहीं मिलता, यह भारत की मातृभूमि में ही मिलता है भारत में ही उन्नत और समर्थ और शक्तिशाली सम्बन्ध सामाजिक अनुसंधान का निर्माण करता है। समाज एक बाजार है इस बाजार में हमें अच्छे संस्कारवान एवं स्वास्थ्य वाले बच्चों का निर्माण करना है। 

समापन

अंत में मेरा वजूद फाउण्डेशन के संरक्षक पं0 संजीव शंकर ने सभी अतिथियों, प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरा वजूद फाउण्डेशन समाज में अग्रणी संस्था होकर विभिन्न विद्यालयों में मेंटल हेल्थ एवं संस्कारों के लिए निःशुल्क कार्यक्रम करवा रहा है।










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