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व्यक्तित्व को आयाम देने वाली प्रतिभा 'ममता मंजुला जी

भूमिका

एक शिक्षिका के रूप में कैरियर को विस्तार देने की आकांक्षी प्रतिभा ममता जाट 'मंजुला' जी ने एक एक कर अपने व्यक्तित्व का विस्तार किया है और आज वो शिक्षिका के साथ साथ कवयित्री, लेखिका और गायिका भी हैं। तो आइए आज मुलाकात करते हैं एक अप्रतिम शक्सियत से।

प्रेरणादायक परिचय

साथियो! हमारे साथ आज हिंदी व उर्दू भाषा में एक से बढ़कर एक गज़लों का सृजन करने वाली व एक शिक्षिका, कवयित्री और लेखिका ममता जाट 'मंजुला' जी हैं। आप वर्तमान में टोंक शहर के ख्यातनाम पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोठी नातमाम ब्लॉक टोंक में शिक्षिका के रूप में पदस्थापित हैं। आपने अपनी शिक्षण सेवा की शुरुआत प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षक के रूप में आज से सत्ताइस वर्ष पहले की थी। आपने इस सेवाकाल में कई अविस्मरणीय कार्य शिक्षा विभाग के लिए किए हैं। आप शिक्षक प्रशिक्षण वर्कशॉप में भी बतौर SRG, KRP व मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका में लगातार कार्य कर रही हैं। राजस्थान राज्य के शिक्षकों के साथ लगातार बीस वर्षों से आप संदर्भ व्यक्ति के रूप में बेहतरीन कार्य कर रही हैं।आपको सदैव पढ़ते-लिखते रहने का शौक है। आपकी सृजन क्षमता और गायन शैली देखते ही बनती है। आपके गायन की विशेषता मधुरता और शब्दों की स्पष्टता है। आपने राजस्थानी‌ भाषा में व हिंदी में कविताओं, दोहों व छंदों की रचना की है। आपके पास जबरदस्त लेखन कौशल है। आप नई शिक्षा नीति 2020 की क्रियान्विति हेतु राजस्थान राज्य के लिए तैयार किए गए राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF) की भी सदस्या रही हैं। इन सारे रचानात्मक कार्यों की बदौलत आप कई बार राज्य व जिला स्तर पर सम्मानित भी हुई हैं। आपको महिला शिक्षारत्न व महिलाओं में जाग्रति लाने हेतु भी सम्मान प्राप्त हुए हैं। आपकी अब तक बहुत ही बेहतरीन काव्य शैली में दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें 'अन्तर्मन के मोती' खासी लोकप्रिय हुई है। आपकी यह खूबी है कि आप टोंक जिले की अन्य नवोदित कलाकारों को निरंतर प्रोत्साहित करती रहती हैं। इसके लिए आपने 'साहित्य सारथी' नाम से जिले में एक मंच भी बनाया हुआ है। आप निरंतर प्रतिभावों के विकास हेतु मासिक काव्य गोष्ठियाँ भी करती रहती हैं। आप सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखती हैं। आपकी प्रेरणा से जिले में अब तक कई शिक्षक व शिक्षिकाएँ लेखन व गायन के क्षेत्र में अपना जलवा बिखेर चुकी हैं। आप मेहनती हैं व नाम के अनुरूप ममता देने वाली हैं। इसमें कतई अतिशयोक्ति नहीं है। इतने कम समय में आपने आकाशवाणी केंद्र जयपुर में भी अपनी ग़ज़लें सुनाकर अपना व टोंक जिले का नाम रोशन किया है तथा DD राजस्थान (दूरदर्शन) में चौपाल कार्यक्रम में वार्ताकार के रूप में भाग ले चुकी हैं। वास्तव में, आपसे नवोदितों को बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। आपके प्रयासों से स्कूली बच्चों में अद्भुत क्षमताओं का विकास हो रहा है। आपका सरल व सौम्य स्वभाव बरबस ही सबको आपकी ओर आकर्षित कर लेता है। आप धार्मिक व सामूहिक नेतृत्व क्षमता में विश्वास रखने वाले सरल व सहज व्यक्तित्व की धनी हैं। आप सदैव दूसरों की सेवा व सहयोग करने के लिए तत्पर रहती हैं। आपने लगभग हर विषय पर रचनाएँ लिखी हैं। आपके इन सब भागीरथी प्रयासों के कारण ही शिक्षा के क्षेत्र में भी आप एक नवाचारी व एनर्जेटिक शिक्षक के रूप में पहचान बनाए हुए हैं। अब आज की बातचीत में हमारे उनसे कुछ प्रश्न हैं। हम चाहेंगे कि आप इनके उत्तर देकर हमारे पाठकों को की जिज्ञासा को शांत कर उनको लाभान्वित करें।



बातचीत

प्रश्न १. मैम, आपको लेखन का शौक अध्यापन के क्षेत्र में आने के पूर्व से ही है या फिर उसके बाद उत्पन्न हुआ? थोड़ा विस्तार से बताइए।

उत्तर - "सभी को नमस्कार। अध्यापन के क्षेत्र में आने से पूर्व भी यदा-कदा मैं लिखा करती थी। पर सतत् लेखन नहीं कर पाती थी। जब भी मन में भावों का ज्वार उठता था तो लिख लिया करती थी। पर वो लिखना अपने तक ही सीमित था। एक आध बार पत्रिका में मेरे आलेख प्रकाशित हुए थे। अध्यापन क्षेत्र में आने के बाद कभी कभार बच्चों को विद्यालय में मनाए जाने वाले उत्सवों के दौरान बालगीत, गीत व कविताएँ लिखकर दिया करती थी। गाने सुनने और शेर ओ' शायरी सुनने का शौक बचपन से बहुत था कभी-कभी शायरी भी किया करती जो आज भी डायरी में सुरक्षित है। कोरोना काल में डर से उबरने व समय का सदुपयोग करने के लिए लिखना शुरू किया इसे सतत किया। अब तो बिना लिखे जैसे नींद भी नहीं आती।"

प्रश्न २. ममता मैम, आपने शासकीय सेवा में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए काफी कार्य किया है, तो हम जानना चाहते हैं कि शिक्षा में गुणवत्ता सुधारों के नाम पर किए जा रहे बदलावों से आप कितनी सहमत हैं? क्या आप अपनी तरफ से इस संदर्भ में कोई संस्तुति करना चाहेंगी?

उत्तर - "जी, सत्ताईस वर्षों के कार्यकाल में लगभग चौबीस साल से मैं शिक्षक प्रशिक्षणों में संदर्भ व्यक्ति के रूप में कार्य कर रही हूँ। शिक्षण की गुणवत्ता हेतु सतत प्रयासरत रहीं हूँ। शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने हेतु शिक्षण प्रक्रियाओं में नवाचार को शामिल करना और बदलाव करना बहुत महत्वपूर्ण है। होना भी चाहिए, लेकिन वो बदलाव बालक की आवश्यकता को ध्यान में रखकर हो। प्रत्येक बालक की आवश्यकता को केंद्र में रखकर हो। शिक्षण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण है बालक के व्यवहार में आए बदलाव को समझना। मेरे दृष्टिकोण से बहुत अधिक बदलाव भी शिक्षा की गुणवत्ता कम करते है। वर्तमान हालात तो ये है की गुणवत्ता हेतु किए जा रहे अधिक बदलावों ने शिक्षा को प्रयोगशाला बनाकर रख दिया है। अति हर कार्य में वर्जित है। प्रत्येक बालक के स्तर और आवश्यकता को ध्यान में रखकर करवाया गया शिक्षण सबसे बेहतर होता है। वो सकारात्मक परिणाम भी देता है।"

प्रश्न ३. ममता जी, हम देखते हैं कि आप छोटे बच्चों के साथ विद्यालय में विभिन्न गतिविधियाँ करवाती रहती हैं। ऐसा क्या है जो आपको यह सब करने के लिए प्रेरित करता है?

उत्तर - "गतिविधियों का अर्थ सिर्फ खेल या मनोरंजन नहीं होता। गतिविधियाँ बालकों को पूर्वज्ञान से जोड़कर तर्क, चिंतन, कल्पना, विश्लेषण व अभिव्यक्ति के अवसर देती है और निष्कर्ष तक पहुँचाती है। अतः गतिविधि आधारित शिक्षण सबसे प्रभावी प्रक्रिया है। साथ ही ये बालकों में शिक्षण के प्रति रुचि बढाती है।"

प्रश्न ४. मैम, आपको हिंदी भाषा के अतिरिक्त और अन्य कौन-सा विषय प्रिय लगता है और क्यों?

उत्तर - "मुझे हिंदी भाषा के अतिरिक्त सामाजिक विज्ञान विषय बहुत प्रिय है। बालकों में सामाजिक गुण विकसित करने, सामाजिक संरचना को समझने और सामाजिक परम्पराओं से जुड़े रहने का बहुत सुंदर माध्यम है यह विषय। साथ ही विभिन्न जानकारियों का स्रोत है।"

प्रश्न ५. ममता जी, हमारी यह जानने की उत्कट अभिलाषा है कि आप निरंतर अध्यापन, घरेलू काम और निरंतर लिखना-पढ़ना व विविध कार्यक्रमों में भागीदारी करती हैं। आखिर ऐसा क्या आकर्षण है जो आपको यह सब करने के लिए आपको प्रेरित करता है?

उत्तर - "हर रोज़ नया कुछ सीखते रहना मुझे अच्छा लगता है। अपने आपको ज्ञान से समृद्ध कर सकूँ। स्वयं में आत्मविश्वास भर सकूँ, तनाव से मुक्त रह सकूँ, स्वयं की क्षमताओं को पहचान सकूँ। इसलिए ये सब करती हूँ। लेखन, गायन, पठन, संगीत, नृत्य मुझे ख़ुशी देता है तनाव से मुक्त रखता है। मुझे घर, परिवार, समाज, मित्र, कार्यक्षेत्र में सामंजस्य बिठाना बेहतरीन तरीके से आता है। मैंने अनुभवों से जीवन जीने की कला सीखी है। मुझे मुस्कुराहट के पीछे ग़म छुपाना बेहतर आता है। कला के प्रति मेरा आकर्षण सदैव रहा है। कला मुझे अपनी और खींचती है और सुकून देती है।"

प्रश्न ६. आजकल आप गज़ल बहुतायत से लिख रही हैं। इसकी कोई खास वजह हो तो बताइए?

उतर - "मैं बहुत भावुक प्रवृति की इंसान हूँ, सच्चे प्रेम की चाहत को कल्पना में जीकर ख़ुशी महसूस करती हूँ। अपना दर्द, ख़ुशी सब ग़ज़ल के भीतर उतार देती हूँ। और! अपने आपको हल्का महसूस करती हूँ। ज़िन्दगी में प्रेम के अधूरेपन को ग़ज़ल से पूरा कर लेती हूँ। इसलिए ग़ज़ल लिख लेती हूँ।"

उपरोक्त वीडियो का लिंक

https://youtu.be/KbU0mMlTtDc?si=4gfaeUsDjzF4Nwi8

सूचना स्रोत


हंसराज हंस

प्रस्तुति



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