भूमिका
हम जीवन को जितना मौलिक और नैसर्गिक विकसित होने देंगे उतनी ही स्पष्टता के साथ हम आने वाले परिणामों को समझ पाएंगे। और! समझ पाएंगे कि जीवन में सकारात्मक और नकारात्मक परिस्थितियों के निर्माण से लेकर परिणामों तक के लिए उत्तरदायी हम ही हैं।
परिचय
ग्राम पाली में आज जाना हुआ कवि विजय सिंह 'पथिक' जी से मिलने तो साथ में उन्नत कृषक श्री प्रकाशचंद जी भी थे। नैसर्गिक कवि जिनकी महारथ है त्वरित काव्य रचना करने में। अरसा पूर्व काव्य रचना लिखकर किया करते थे लेकिन उनके द्वारा संकलित रचनाओं को लेकर आपके साथ एक ऐसी घटना हुई कि उन्होंने काव्य लिखकर करना त्याग दिया और उसके बाद से अब उनका काव्य मौलिक है और संस्कृति को सहेजता हुआ। विषय कोई भी हो सब में सांस्कृतिक मूल्यों की झलक मिलती है। उन्होंने जीवन की कुछ दिलचस्प घटनाएं सुनाईं। ईशकृपा को लेकर भी उन्होंने जीवन की कुछ झलकियां सुनायीं। एक दफा २६ जनवरी के अवसर पर अपनी काव्य रचनाएं किसी शिक्षण संस्थान में सुनाने के ध्येय से अपनी पुत्री की ससुराल दिल्ली गए, लेकिन आकस्मिक कारणों से ऐसा संभव ना हो सका तो निराशा भाव से भर कर लौटने लगे। वापसी में बस यात्रा के दौरान उनको एक युवती मिली जिसने उनसे मोदीनगर में उतरने का आग्रह किया। पथिक जी असमंजस में पड़ गए। और! वे युवती के पुनः किए आग्रह को टाल नहीं सके और युवती के साथ बस से उतर गए। बस से उतर कर युवती उनको स्टेट बैंक की एक शाखा में ले गई और उनसे ध्वजारोहण कराया। ऐसे में आकस्मिक रूप से उनकी मन की मुराद पूरी होने पर ईश्वर का धन्यवाद किया और ध्वजारोहण के उपरांत निम्न कविता बैंक कर्मियों को सुनाई -
मैं देता हूँ धन्यवाद उसे
अपना हर काम छोड़कर
जो गणतन्त्र दिवस पर मिली मुझे
दिल्ली रोड पर
जो मिली दिल्ली रोड पर
वह पर्वत से भी भारी थी
मैं उसके कद को नाप सका ना
वह इतनी ऊंची नारी थी
वह इतनी ऊंची नारी थी
मैं देख उसे हैरान हुआ
हुआ अचंभा मुझको भारी
जब उसने मेरे पैर छुए।
मैंने मन की आँखें खोली थीं
सदा सुखी रहना बेटी
मेरी साफ़ आत्मा बोली थी
बातचीत
प्रश्न १. काव्य रचना का विचार आपके मन में कैसे आया?
उत्तर - "बालपन में मैं अपने दादा जी प्रहलाद सिंह जी से बेहद प्रभावित था, क्योंकि वे होली सुनाया करते थे काव्य रूप में। उन्हीं से मैंने भी सीखने का प्रयास किया और ईश्वर से कामना की कि मैं भी इन्हीं की तरह काव्य रचना कर सकूं। और! अंततः ऐसा हो ही गया जैसे मन में भाव थे।"
प्रश्न २. काव्य रचना में आपका प्रिय विषय क्या है?
उत्तर - "भारतीय संस्कृति ही सर्वोत्तम है और यही मेरा प्रिय विषय भी रही है।"
प्रश्न ३. समाज में प्रचलित वर्तमान काव्य रचना के परिप्रेक्ष्य में आपका क्या विश्लेषण है?
उत्तर - "वर्तमान का काव्य रचना पैसा आधारित होने के कारण बेहद आम होती जा रही है। वर्तमान कवियों में हरिओम पंवार मेरी पहली पसंद है, जो सारगर्भित तरीके से अपने भावों को व्यक्त कर पाते हैं।"
प्रश्न ४. आपकी शिक्षा कितनी है? शिक्षा का काव्य रचना में आपने कितना लाभ उठाया?
उत्तर - "मेरी शिक्षा हाइस्कूल है लेकिन काव्य रचना मौलिक है। मेरे जीवन में ऐसा भी एक समय आया जब काव्य भाव ही मेरे मन में नहीं आते थे, फिर धीरे धीरे मन को संभाला और पुनः काव्य रचना कर पाने में सक्षम हो सका।"
प्रश्न ५. क्या आप किसी भी विषय पर काव्य रूप में बात कर सकते हैं?
उत्तर - "शर्त सिर्फ इतनी सी है कि बात दिल से लगनी चाहिए। यदि ऐसा हो जाए तो विषय को लेकर किसी प्रकार की कोई सीमित नहीं है।"
२७ अक्टूबर २०२४ को फरीदाबाद में काव्य पाठ करते
सूचना स्रोत
श्री विजय सिंह 'पथिक' और श्री नरेश सिंह जी
ग्राम पाली, मवाना, जनपद मेरठ
प्रस्तुति

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