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शिक्षा में ही भविष्य निर्धारित करने वाले श्री गिरिराज प्रसाद जी

भूमिका

सृष्टि भर में युवा वर्ग अपने जीवन यापन के लिए उपयुक्त स्रोत की तलाश करता है और प्रतियोगी परीक्षा में चयनोपरांत उच्च पदस्थ अवसर ही का चयन करता है, लेकिन टोंक जनपद वासी श्री गिरिराज प्रसाद जी ने चयन के बावजूद ऐसे अवसर को छोड़ अध्यापन के अंतर्गत प्रधानाचार्य पद का चयन किया और बालकों के भविष्य के निर्माण का निर्णय लिया।

प्रेरणास्पद परिचय

आदरणीय पाठको,

आज हम आपको टोंक जिले की एक ऐसी शख्सियत से रूबरू करवाने जा रहे हैं। जिनके कृतित्व, व्यक्तित्व व सादगीपूर्ण व्यवहार के चर्चे आजकल बहुत आम हो रहे हैं। वह हैं श्री गिरिराज प्रसाद गुर्जर।ये राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भरथला ब्लॉक निवाई जनपद टोंक राजस्थान में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं। आप शिक्षा व शिक्षण के प्रति पूर्णतया समर्पित मानव संपदा हैं। इसका पुख्ता प्रमाण आपके द्वारा राजस्थान प्रशासनिक सेवा में प्रवर्तन निरीक्षक पद से त्यागपत्र देकर बच्चों की शिक्षा व शिक्षण को अपनी प्राथमिकता में रखा जाना है। आपका विद्यालय वर्तमान समय में जनपद भर में ख्याति प्राप्त है। अभी हाल ही में प्रतिभा निखार हेतु आयोजित राज्य स्तरीय विज्ञान मेले में भी आपकी स्कूल के चार बच्चों ने द्वितीय स्थान व अधीनस्थ विद्यालय राजकीय उच्च प्रातमिल विद्यालय जीवली के साथ कुल ग्यारह मेडल जीतकर जिले के सर्वश्रेष्ठ विद्यालय के रूप में प्रदर्शन किया है। आप स्वयं शैक्षिक नवाचारी प्रकृति के व्यक्ति हैं। शिक्षा में हो रहे नवाचारों पर आपका भरपूर विश्वास है। विद्यालय की तमाम शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक गतिविधियों में समुदाय का जुड़ाव आपके विद्यालय में देखते ही बनता है। अन्य विद्यालयों के लिए आपका विद्या मंदिर निरंतर एक नज़ीर बनता जा रहा है। जो आपका शिक्षा के प्रति समर्पण का द्योतक है। आपका सामाजिक जीवन भी बहुत सफल है। पिछले बारह वर्षों से प्रति वर्ष आप राज्य स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह श्री देवनारायण मंदिर ट्रस्ट देव धाम जोधपुरिया जनपद टोंक के कार्यक्रम में भी संयोजक के रूप में सहभागिता निभाते हुए अब तक 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रतिभा के लिए सम्मानित कर चुके हैं। आप स्वयं भी मोटिवेशनल स्पीकर है। आपके कार्यकाल के नवाचारों और उन्नत कार्यों को देखकर आपके विद्यालय में भामाशाहों, दानदाताओं द्वारा समय-समय पर काफ़ी आर्थिक सहयोग करने से, वर्तमान में आपका यह सरकारी विद्यालय पूर्ण रूप से साधन संपन्न हो गया है। इसी कड़ी में संयुक्त राज्य अमेरिका से प्रवासी वैज्ञानिक सीताराम मीणा द्वारा विद्यालय को अद्भुत सहयोग प्रदान किया गया है। इनके द्वारा विद्यालय को अब तक 2.5 लाख रुपए से अधिक राशि के सहयोग के साथ विभिन्न नवाचारों के लिए अकादमिक मार्गदर्शन और मोटिवेशन करते रहे हैं। श्री गुर्जर राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड के स्थानीय संघ निवाई के सचिव के पद पर रहते हुए स्काउटिंग को जिले, मंडल एवं राज्य में विशिष्ट पहचान दिला चुके हैं। आइए आज हम उनसे कुछ बातचीत कर शिक्षा, दीक्षा व उनकी व्यक्तिगत रुचियों के बारे में जानने का प्रयास करते हैं।














Q































बातचीत 

प्रश्न १. सर, आपका चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा में हो जाने के बाद भी आपने शिक्षा विभाग में ही सेवा करने का निश्चय किया। आखिर क्यों?

उत्तर - "मेरा चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा 2012 में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में प्रवर्तन निरीक्षक के पद पर हुआ था। लगभग अठारह महीने नौकरी करने के बाद अंतरात्मा की आवाज पर बालकों के साथ काम करने में अनंत खुशी महसूस की, उसी के अनुरूप निर्णय लेकर वापस शिक्षा सेवा में आया और 1 जनवरी 2018 से प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भरथला जिला टोंक में कार्यरत हूं।"

प्रश्न २. प्रधानाचार्य के पद पर विभागीय कार्य की अधिकता के बावजूद भी आप अन्य सामाजिक, गैर शैक्षणिक गतिविधियों के लिए समय निकाल लेते हैं।यह सब आप कैसे कर लेते हैं जी?

उत्तर - "प्रधानाचार्य के लिए वर्तमान में कार्य की अधिकता है, परंतु इस प्रकार बात करने से केवल तनाव बढ़ता है। प्रत्येक कार्य को संपूर्ण तन्मयता से करने से खुशी ही महसूस होती है। जो भी कार्य करो, खुशी के साथ करो जिससे आपके मन और मस्तिष्क में सकारात्मकता आएगी और प्रत्येक कार्य बहुत सहज हो जाएगा। यदि हमने किसी कार्य को कठिन या असंभव मान लिया तो, हमारे मस्तिष्क में केवल नकारात्मक विचार ही आएंगे जो उस कार्य में अवरोध को ही और आगे बढ़ाएंगे। अंग्रेजी की कहावत 

"Well begininng is half done."

पर मेरा हमेशा विश्वास रहा है!"

प्रश्न ३. शिक्षा विभाग में लगातार बहुत सारे नवाचार होते रहते हैं।आपकी दृष्टि से क्या शिक्षा की बेहतरी के लिए ये कारगर हैं?

उत्तर - "बिल्कुल नवाचार किसी भी प्रोफेशन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इनसे कार्य की सिद्धि बहुत आसान तरीके से सुनिश्चित हो जाती है। शिक्षा विभाग में भी टोंक जिले के ऐसे सितारे हैं श्री हंसराज हंस बनेठा, दिनकर जी, विजय जयकिशनपुरा, श्री भंवर लाल जी प्रधानाचार्य दूनी, शोभा कंवर जी..... आदि आदि ऐसे सितारों से प्रतिदिन कुछ नया सीखने का मौका मिलता रहता है।"

प्रश्न ४. सर, लिखने-पढ़ने के अतिरिक्त आप अन्य और कौन से क्षेत्र में रुचि रखते हैं। हमें भी बताएं?

उत्तर - "पांच वर्ष की आयु में मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो जाने के बाद भी विपरीत परिस्थितियों में माताजी द्वारा पालन पोषण और शिक्षित कर इस स्थान पर पहुंचाया। हमेशा मन मस्तिष्क में वही दृश्य छाया रहता है कि किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे की शिक्षा धन के अभाव में ना रुके। इसके लिए टीम के साथ लगकर, जन समुदाय को प्रेरित करना, प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन। वर्तमान में समाज का जनपद टोंक के ब्लॉक निवाई में एक छात्रावास के निर्माण में लगे हुए हैं जिसमें अब तक 3 करोड रुपए की लागत से 88 कक्ष,4 बड़े हॉल और विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद 176 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा 1 जनवरी 2025 से उपलब्ध करवाने का लक्ष्य है।"

प्रश्न ५. सर, आपका प्रिय विषय कौन-सा है और क्यों?

उत्तर - "मैं व्याख्याता संस्कृत के रूप में पदस्थापित रहा हूं परंतु वर्तमान में सभी समुदाय के लिए सहज सरल हिंदी विषय की विभिन्न पुस्तकें, कविताएं एवं मोटिवेशनल स्टोरी पढ़ने और साझा करने में खुशी महसूस होती है!"

प्रश्न ६. आप शिक्षा की बेहतरी के लिए विद्याथिर्यों व शिक्षकों को क्या संदेश देना चाहोगे सर?

उत्तर - "सतयुग से लेकर अब तक गुरु की महिमा अनंत है। सभी शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों की अंतर्निहित क्षमताओं को बाहर निकालने के लिए अधिक से अधिक प्रयास करने चाहिए। हम भाग्यशाली हैं कि इतना अच्छा प्रोफेशन हमें मिला है। आज हमें स्मार्ट एजुकेशन के कांसेप्ट को समझते हुए आगे बढ़ना चाहिए। विद्यार्थियों को 'करके सीखने के' अधिक से अधिक अवसर देने चाहिए। साथ ही इस बात को भी समझना है कि प्रत्येक बच्चा यूनिक है - कोई बच्चा पढ़ने में अच्छा है तो कोई गीत संगीत में, कोई खेलकूद में ,कोई ड्राइंग पेंटिंग में, कोई अच्छा स्पीकर तो कोई अच्छा एक्टर। इसलिए सभी को अवसर जरूर देना एक अच्छे शिक्षक की पहचान है। वह बच्चों की पहचान करके उनको आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान करता है। इसके लिए मैं व्यक्तिगत तौर से हमारे सबसे बड़े मोटीवेटर श्री सीताराम जी मीणा वैज्ञानिक संयुक्त राज्य अमेरिका का आभारी हूं। जिन्होंने इस कांसेप्ट को लागू करने में हमारे विद्यालय में बहुत सहायता की है। सभी विद्यार्थी भी विनम्र भाव से गुरु के साथ मन लगाकर अध्ययन करें। गुरु कभी भी किसी भी विद्यार्थी का अहित नहीं चाहता है। बल्कि एक गुरु ही होता है जो अपने शिष्य को स्वयं से आगे बढ़ता हुआ देखकर खुशी महसूस करता है।"

विद्यालय में नवाचारी गतिविधियां

प्रधानाचार्य गिरिराज प्रसाद गुर्जर ने अपनी टीम भरथला के साथ योजना बनाकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और विद्यालय के कायाकल्प की नींव रखी। इसके लिए ग्रामवासियों, भामाशाहों एवं शिक्षकों को प्रेरित कर विद्यालय के लिए आवश्यक सामग्री/ सुविधाएं जुटाना शुरू कीं। विद्यालय में किए गए नवाचार, विकास कार्य, अनुशासित वातावरण की बदौलत यह विद्यालय निवाई तहसील में अलग ही पहचान रखता है। टीम भरथला के द्वारा विद्यालय में करवाए गए विकास कार्यों में सोलह सीसी टीवी से युक्त संपूर्ण परिसर, चार बैटरी इनवर्टर से निर्बाध विद्युत आपूर्ति, विद्यालय भवन का अंदर एवं बाहर से आकर्षक रंग रोगन, शिक्षा सामाजिकता एवं पर्यावरण चेतना का संदेश देती हुई टी एल एम से चित्रित बोलती दीवारें, संपूर्ण परिसर में वृक्षारोपण एवं हरित उद्यान, मौसमी सब्जियां एवं फल से युक्त किचन गार्डन, भव्य एवं दस कंप्यूटरों से सुसज्जित आईसीटी लैब, प्राथमिक एवं माध्यमिक विभाग के लिए अलग-अलग स्मार्ट टीवी, विद्यालय की संगीत आनंदमय प्रार्थना हेतु हारमोनियम, ढोलक एवं साउंड सिस्टम की व्यवस्था, टोंक जिले का ग्रामीण क्षेत्र का प्रथम स्काउट बैंड, सुसज्जित एवं क्रियाशील विज्ञान लैब, शीतल जल हेतु वॉटर प्यूरीफायर एवं वाटर कूलर की व्यवस्था, पर्याप्त मात्रा में शौचालयों एवं मूत्रालयों की व्यवस्था, सर्दी, गर्मी, वर्षा ऋतु में सुरक्षित मध्याह्न भोजन हेतु टिन शेड एवं प्लेटफार्म का निर्माण करवाया गया। विद्यार्थियों हेतु भामाशाहों के सहयोग से फर्नीचर की व्यवस्था, उक्त सभी विकास कार्य विद्यालय के द्वारा मुख्यमंत्री जन सहभागिता योजना से चालीस प्रतिशत अंशदान भामाशाहों के सहयोग से लेकर शेष राज्य सरकार से प्राप्तकर लगभग चौदह लाख के विकास कार्य करवाए गए हैं। 

उक्त समस्त विकास कार्यों के साथ जो नवाचार संपूर्ण जिले में प्रसिद्ध रहे हैं वे ये हैं- 

उत्कृष्ट बोर्ड परीक्षा परिणाम, आपके नेतृत्व में संपूर्ण ग्राम पंचायत के साठ शिक्षकों का एक ही स्वैच्छिक ड्रेस कोड अपनाना, प्रतिवर्ष पंचायत स्तरीय विज्ञान बाल मेले का आयोजन जिसके परिणामस्वरूप प्रतिवर्ष विद्यार्थी जिले एवं राज्य भर में अपना परचम फहराते रहे हैं। पंचायत स्तरीय एथलेटिक्स एवं सांस्कृतिक व साहित्यिक प्रतियोगिताओं से पंचायत के विद्यालयों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं अपनेआप को श्रेष्ठ रखने की भावना का विकास। पंचायत स्तर पर श्रेष्ठ विद्यालय पुरस्कार आदि नवाचारों को अपनाकर भरथला विद्यालय को ही नहीं बल्कि पंचायत को श्रेष्ठतम बनाने की ओर अग्रसर किया है। आपके 2004 से 2016 तक के शिक्षक जीवन में पर्यावरण चेतना हेतु 2007 में तत्कालीन जिला कलक्टर ओंकार सिंह एवं प्रभारी मंत्री श्री प्रभु लाल सैनी के द्वारा जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। इसके बाद 2011 में तत्कालीन जिला कलेक्टर आरुषि मलिक एवं प्रभारी मंत्री बृजेंद्र सिंह जी ओला द्वारा लगातार शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम के लिए सम्मानित किया गया। 2015 में तत्कालीन जिला कलेक्टर टीना कुमार एवं प्रभारी मंत्री श्री राजपाल सिंह शेखावत द्वारा स्काउट गाइड गतिविधियों में उल्लेखनीय उपलब्धियां एवं पर्यावरण चेतना के लिए जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। 2022 में तत्कालीन जिला कलेक्टर चिन्मय गोपाल एवं प्रभारी मंत्री द्वारा विद्यालय के कायाकल्प, कोविड महामारी के दौरान किए गए उल्लेखनीय कार्य एवं शिक्षा आपके द्वार योजना पर जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। आपके नेतृत्व में भरथला विद्यालय की एसडीएमसी को ब्लॉक पर प्रथम स्थान प्राप्त करने पर ₹11,000 एवं जिले पर प्रथम स्थान प्राप्त करने पर 51,000 का पुरस्कार प्राप्त हुआ। श्री प्रसाद ने अपने कार्य कौशल, कठोर परिश्रम, नियमित दिनचर्या के द्वारा अपने अध्यापक जीवन को साक्षात जीने का कार्य किया है।

सूचना स्रोत

श्री हंसराज 'हंस'

प्रस्तुति




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