भूमिका
किसी का हमारे जीवन में महत्व क्या है? यह हमें उसके जाने के बाद समझ आता है। कितना अच्छा हो यदि हम जीते जी ही एक दूसरे के महत्त्व को समझ जाएं उसके जाने के बाद नहीं।
कविता
कल का दिन किसी का
सब कुछ ले गया
किसी का बेटा
तो
किसी का पिता
किसी की जान ले गया।
हाय ! कल का दिन किसी का
सब कुछ ले गया
एक माँ का सहारा
एक पत्नी के सपने
एक बच्चे का बचपन ले गया
हाय ! कल का दिन किसी का सब कुछ ले गया
छोड़ गया एक माँ को रोते-बिलखते
पत्नी की आँखों से नींद ले गया
बहनों की राखी तो अपने बच्चो की सब उम्मीदें ले गया।
हाय ! कल का दिन किसी का सब कुछ ले गया।
बहनो का पीहर,मां की गोद
पत्नी की कलाईयाँ सब सूनी कर गया।
हाय ! कल का दिन किसी
का सब कुछ ले गया।
एक माँ की आखों की चमक
बहनों के होठों की हंसी
किसी की चूडी की खनखन
पायल की छम-छम ले गया।
हाय ! कल का दिन किसी का सब कुछ ले गया।
रचनाकार
ज्योति भड़ाना (संपादिका)
(संक्षिप्त परिचय - ज्योति जी शिक्षा जगत से संबद्ध एक प्रतिभा हैं जो फरीदाबाद में उलझन सुलझन के कार्य दायित्व को संभाल रही हैं। वह एक नियमित लेखिका भी हैं।)
उलझन सुलझन (लेडीज विंग, फरीदाबाद)
नंगला, फरीदाबाद (हरियाणा)

धन्यवाद भईया
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