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सृजनाभिनंदनम् उत्सव वाङ्गमय कला संगम के तत्वावधान में मनाया गया (अपडेटेड )

भूमिका

हिंदी साहित्य समुदाय के प्रति उत्साह और जुड़ाव बढ़ाने के ध्येय से हिंदी पुस्तकों के विमोचन का एक कार्यक्रम सृजनाभिनंदनम् उत्सव शीर्षक से आयोजित किया गया, जहाँ समाज का प्रबुद्ध वर्ग एकत्र हुआ। इस कार्यक्रम में पुस्तकों और लेखकों का संक्षिप्त परिचय देने के साथ ही साथ पुस्तकों से उद्धृत उल्लेखनीय अंशों का पाठ भी हुआ। इसी के मध्य रचनाकारों और प्रमुख अतिथियों के द्वारा हिंदी साहित्य के महत्व पर चर्चा की गई। यह एक अद्वितीय मानव समागम रहा।

कार्यक्रम समीक्षा (सृजनाभिनंदनम् -2)

तिथि व गंतव्य

१५ सितम्बर,२०२४ 

गांधी शांति प्रतिष्ठान, 

निकट आई.टी.ओ.

नई दिल्ली 

आभार


                              श्री प्रजापति जी

विराट व्यक्तित्व के स्वामी और मृदुल व्यवहार के धनी ट्रू मीडिया के चीफ एडिटर डॉक्टर ओमप्रकाश प्रजापति जी आपके द्वारा मेरे काव्य संकलन 'सत्य से परे' (द पेनमैन प्रेस से प्रकाशित) पर की गई त्वरित समीक्षा इस बात का द्योतक है कि आप एक संवेदनशील, श्रमी उद्यमी हैं। आपने नि:संकोच इस काव्य संकलन के मर्म धर्म को मानस पटल की अंतश: गहराइयों से छुआ है। शब्दों के भावों की गहरी पड़ताल की है। आपकी अध्ययन क्षमता और पारखी नजर से संकलन की कोई रचना अछूती रही नहीं। मैं दाद देता हूं कि जिस तीव्रता से आपने मेरे वर्षों के श्रम का औचित्यपूर्ण आकलन कर, श्रेष्ठ समीक्षा लिखी है वह एक जीवट समीक्षक ही कर सकता है। वास्तव में जो मेरी रचनाओं में निहित है वहीं आपके द्वारा की गई समीक्षा में समाहित हैं। आपके द्वारा शब्दों की अद्भुत संयोजन क्षमता से सारगर्भित समीक्षा गागर में सागर की कहावत चरितार्थ करती है। मेधावी शब्दों की माधुर्यता मेरी रचनाधर्मिता को बल दे गई, जीवंतता प्रदान कर गई। मेरा अतिशय आभारम, अनन्य साधुवाद स्वीकारें। सादर।

💐🌻🙏✍️ राकेश छोकर

समीक्षा

सृजनाभिनंदनम् उत्सव द्वितीय बहुत से कारणों से अद्वितीय समागम उत्सव बन गया। हिन्दी दिवस के अवसर पर सभी क्षेत्रों के मूर्धन्य विद्वानों एवं प्रतिष्ठित महानुभावों का एक मंच पर मंचासीन होना ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो एक पुष्पगुच्छ में विविध क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ पुष्पों को सुसज्जित किया गया हो। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री सम्मान प्राप्त पूर्व डायरेक्टर जनरल, पूर्व कुलाधिपति डॉ. श्याम सिंह 'शशि' जी ने की। उत्सव का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। डॉ. वीणाशंकर शर्मा 'चित्रलेखा' द्वारा स्वरचित सरस्वती वंदना का पाठ किया गया। अतिथियों के स्वागत के उपरांत मुख्य संयोजक अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध श्री राकेश छोकर जी द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। डॉ. रीता नामदेव जी के द्वारा 'सृजनाभिनंदनम् क्यों?' विषय पर चर्चा विस्तार से हुई, कैसे इसका नामकरण हुआ और इस संस्था के उद्देश्य क्या हैं, उस पर प्रकाश डाला।

इस विशेष आयोजन में बारह पुस्तकों का विमोचन हुआ जो इस प्रकार हैं

1. 'यथार्थ का धरातल' 

                  यशवंत भंडारी 'यश' 

2. 'सत्य से परे' 


रचनाकार एवं कार्यक्रम योजनाकार डॉ. राकेश छोकर 

(परिचय योजनाकार का - अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध साहित्यकार एवं पत्रकार डॉ राकेश छोकर के काव्य संकलन "सत्य से परे" का लोकार्पण नई दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में आदरणीय पदम् श्री, पूर्व कुलाधिपति, पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉ श्याम सिंह शशि , खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ यशवीर सिंह , सुप्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ विनय कुमार सिंघल, शिक्षा मंत्रालय के पूर्व निदेशक डॉ विनोद कृष्ण वर्मा, पूर्व मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट श्री ओम सपरा, पूर्व पुलिस उपाधीक्षक श्री रमन पाल सिंह, द पेनमैन प्रेस के निर्देशक श्री वीरेंद्र सिंह पथिक, ट्रू मीडिया के चीफ़ एडिटर डॉक्टर ओमप्रकाश प्रजापति, अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणविद एवं लेखिका डॉक्टर संजीव कुमारी आदि विद्वत विभूतियों के कर कमलों द्वारा एवं अन्य विशिष्ट जनों की उपस्थिति में संपन्न। पुस्तक के श्रेष्ठ और तीव्रता से प्रकाशन के लिए प्रकाशक श्री वीरेंद्र सिंह पथिक जी: निर्देशक 'द पेनमैन प्रेस' (प्रकाशन) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।)

3. 'काव्य गौरवांश'

              श्री रमनपाल सिंह

निम्न पांच पुस्तकें डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्छल' द्वारा रचित हैंः-

4. 'कविता-शतक' भाग -19,

5. 'कविता-शतक' भाग-20,

6. 'कविता-शतक' भाग-21, 


7. 'कविता-शतक' भाग-22,

8. 'संबंधों के आरोह-अवरोह'  (सुमन से सलीब तक)

निम्न पुस्तकें त्रयी-संकलन हैं - 

जिन्हें निम्न तीन लेखकों ने लिखा हैः-

क. डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्छल',

ख. डॉ. वीणाशंकर शर्मा 'चित्रलेखा' व

ग. अंजू कालरा दासन 'नलिनी' 

 9. 'काव्य-स्तुति' 27वीं त्रयी


10. 'काव्य-चेतना' 28वीं त्रयी


11. 'काव्य-सुमन' 29वीं त्रयी


12. 'काव्य-सुधा 30वीं त्रयी


उक्त कार्यक्रम डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्छल' के 'अमृत महोत्सव' को समर्पित किया गया। इस कार्यक्रम की विशेषता इस संदर्भ में भी है कि उच्च पदाधिकारियों के हृदय में हिन्दी और कविता के प्रति विशेष रुझान दिखा, चाहे किसी भी क्षेत्र में कार्यरत रहे हों, भावों का संसार स्वयं ही कोमलकांत पदावलियां बन काव्य रूप में नि:सृत हो ही जाता है, चाहे विधिक सेवा से जुड़े हों, चाहे पर्यावरण अथवा मीडिया से हों और जब पूर्व पुलिस अधीक्षक रमनपाल जी को काव्य का सस्वर पाठ करते सुना, और पूर्व मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ओम सपरा जी को आनन्द में ताली बजाते देखा तो हृदय अभिभूत हो उठा, यह ही नहीं विधिक व्यवसाय से जुड़े डॉ. विनय कुमार सिंघल जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर डाॅ. वीणाशंकर शर्मा ने वार्ता प्रस्तुत की। वार्ता ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया कि वे अभी तक 28,812 कवितायें लिख चुके हैं और आज उनकी नौ पुस्तकों का विमोचन हुआ। पाठक समझ सकते हैं कि कितने समर्पित व्यक्तियों का समागम था इस उत्सव में। 

हिंदी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यक्रम में पुरस्कार वितरण समारोह भी अत्यन्त भव्य रहा। डॉ. संजीव कुमारी, डॉ. राकेश आर्य, की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम का भव्य संचालन हिंदी साहित्य संस्थान की डाॅ. विभाराज 'वैभवी' जी एवं आदरणीय राकेश छोकर जी ने किया। ......विभिन्न अवयवों के समावेश और उनका अभिनन्दन, सुस्वागतम एवं सम्मान स्वयं में एक अद्भुत आयोजन रहा।

अब तक तीस कड़ियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। इस कार्यक्रम के अवसर पर पद्मश्री डॉ. श्याम सिंह शशि जी से सम्मान, आशीर्वाद प्राप्त करना अपने आप में एक उपलब्धि रही जो गौरव की बात है l

इस आयोजन में ऐसा प्रतीत हुआ कि प्रत्येक पुष्प का आकार एवं सुगंध भिन्न है, वातावरण सुगन्धित आशीर्वचनों से गुंजायमान है l

हमारा प्रण और विश्वास है कि सृजनाभिनंदनम् निरंतर प्रगति के शिखर पर रहे।

समीक्षक

डॉ. वीणाशंकर शर्मा 'चित्रलेखा' एवं

अंजू कालरा दासन 'नलिनी' जी

कार्यक्रम विवरण

नई दिल्ली। हिंदी दिवस के उपलक्ष पर वाङ्गमय कला संगम के तत्वावधान में सृजनाभिनंदनम् द्वितीय उत्सव का शानदार आयोजन संपन्न हो गया। इस विशेष आयोजन में देश भर के प्रमुख विद्वानों द्वारा रचित लगभग दर्जन भर पुस्तकों का विमोचन किया गया। वहीं दिग्गज साहित्यकारों एवं प्रेरक हस्तियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रतिष्ठित कवियों के द्वारा घंटों तक काव्य रसधार बहती रही।

नई दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित सृजनाभिनंदनम् द्वितीय उत्सव में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन उपरांत वरिष्ठ कवयित्री डॉ. वीणाशंकर शर्मा 'चित्रलेखा' के द्वारा सरस्वती वंदना की गई। अतिथियों के स्वागत उपरांत मुख्य संयोजक डॉ. राकेश छोकर के द्वारा स्वागत भाषण एवं डॉक्टर रीता नामदेव के द्वारा 'सृजनाभिनंदनम् क्यों?' विषय पर चर्चा की गई। 

कार्यक्रम में मुख्यतः यशवंत भंडारी 'यश' की काव्य पुस्तक 'यथार्थ के धरातल', डॉ. राकेश छोकर की काव्य पुस्तक 'सत्य से परे', रमनपाल 'सिसौनवी' की काव्य पुस्तक 'काव्य गौरवांश', डॉ. विनय कुमार सिंघल, डॉ. वीणाशंकर शर्मा, अंजू कालरा दासन की कविता 'शतक' भाग-19, 'त्रयी-27', 'काव्य-स्तुति', 'त्रयी-28' , 'काव्य-चेतना', 'कविता शतक' भाग-20, 'त्रयी-29' , ' काव्य-सुमन', 'सम्बन्धों के आरोह-अवरोह' (सुमन से सलीब तक), 'कविता शतक' भाग-21, 'त्रयी-30', 'काव्य-सुधा', 'कविता शतक' भाग 22 का तथा डॉ. सुमन सोनी की एक पुस्तक का विमोचन अतिथियों के द्वारा किया गया। इस अवसर पर पुलिस प्रशिक्षक रहे रमन सिसौनवी ने अपनी इस रचना का काव्य पाठ किया - 

कलम अगर खामोश हुई तो, सन्नाटा छा जाएगा। 

मानव भी मानवता वाला, धर्म निभा नहीं पाएगा।

कलम अगर.....

कैसे जाहिर हो मुफ़लिस के, बुरे हाल की गाथा। 

जिक्र गरीबी का नारों के, सिवा नजर न आता।। 

किसे सुदामा की चिंता, क्या कान्हा ही आएगा।।

कलम अगर.....

खबरों में नित प्रतिदिन, चेहरा निर्भया सा आता। 

दुष्कर्मो का क्यूँ नही, आखिर अंत किया जाता।। 

यौन उत्पीड़न झेलेगा जो, जीते जी मर जाएगा।।।

कलम अगर.....

अन्नदाता के कष्टों का क्यूँ, समाधान न हो पाता। 

क्षुधा शांत करता सबकी वो, भूखा है सो जाता।। 

कृषक रहे खुशहाल, देश में खुशहाली लाएगा।।।

कलम अगर.....

इतिहास के हर पन्ने पे, शौर्य शहीदों का है आता। 

देश पे जान लुटाए जो, लिपट तिरंगे में वो आता।। 

सैनिक सोचता है कि वो, देश के काम आएगा।।।

कलम अगर.....

प्रथम एवं द्वितीय सत्र में क्रमशः अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. श्याम सिंह 'शशि', डॉ. राकेश कुमार आर्य की रही। मुख्य आतिथ्य खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. यशवीर सिंह एवं प्रसिद्ध समाजशास्त्री डॉ. राकेश राणा का रहा। सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्चल', ट्रू मीडिया के चीफ एडिटर डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति, यशवंत भंडारी 'यश' रहे। अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्रालय के पूर्व निदेशक डॉ. विनोदकृष्ण वर्मा, पूर्व पुलिस उपाधीक्षक रमनपाल सिंह, पूर्व मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ओम सपरा, इंद्रप्रस्थ लिटरेचर फेस्टिवल के अध्यक्ष डॉ. चंद्रमणि ब्रह्मदत्त, डॉ. वीणाशंकर शर्मा रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में वायर आर्टिस्ट उदित नारायण बैसला, अंजू कालरा दासन उपस्थित रहीं। इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रमुख अतिथियों ने हिंदी भाषा के वर्तमान और भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का कुशल संचालन हिंदी साहित्य संस्थान की अध्यक्षा विभाराज 'वैभवी' और डॉ. राकेश छोकर के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में संयोजन व्यवस्था के तौर पर डॉ. संजीव कुमारी और प्रेमराज भाटी की महती भूमिका रही।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में आयोजकों द्वारा सम्मान के तौर पर अतिथियों को 'श्रीदेव विभूति सम्मान' से सम्मानित किया गया। जबकि प्रेरक हस्तियों के रूप में 'उगता भारत' मीडिया समूह के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह आर्य, हिंदी व सिंधी की वरिष्ठ कवयित्री आशा सिंघल, वरिष्ठ समाजसेवी अश्वनी दासन, वरिष्ठ समाजसेवी संजय शक्ति राज, द पेनमैन प्रेस के निर्देशक वीरेंद्र सिंह 'पथिक', वरिष्ठ समाजसेवी बनवारी लाल बटार को 'सृजनाधार श्री विभूति सम्मान' से सम्मानित किया गया। 'सृजन श्री शौर्य सम्मान' पाने वालों में रमनपाल सिंह, डॉ. विनय कुमार सिंघल, डॉ वीणाशंकर शर्मा, डॉ. संजीव कुमारी, डॉ. राकेश छोकर, डॉ. रीता नामदेव, अंजू कालरा दासन, यशवंत भंडारी 'यश', विभाराज 'वैभवी', डॉ. राकेश कुमार आर्य, डॉ. सुमन सोनी प्रमुख रहे। 

'सृजन श्री विभूति सम्मान' जितेंद्र सिंह, प्रेमराज भाटी, धर्मवीर नागर, मोहित तंवर, यशवीर सिंह भाटी, डॉ. अमरजीत अधाना, जितेंद्र पांडेय, संगीता वर्मा, विनय विक्रम सिंह, मंगल सिंह 'राज', डॉ. राजेश शर्मा, आशा साहनी, शालू वर्मा, आलोक शुक्ला, संजय शेखर, सोनू चौहान, इकराम चौहान, श्यामसुंदर को प्रदान किया गया। आयोजन में अंतिम कड़ी के रूप में कवि एवं कवयित्रियों के द्वारा घंटे तक काव्य की रसधार से उपस्थित श्रोतागण अभिभूत हुए।

सूचना एवं छायाचित्र स्रोत

श्री रमनपाल सिंह जी, श्री राकेश छोकर और श्री (डॉ.) राकेश राणा।

कार्यक्रम चित्रों के झरोखे में





































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