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ए ट्रिप टु अयोध्या-एक यात्रा वृत्तांत (अपडेटेड)

भूमिका

किसी भी धार्मिक यात्रा का वृत्तांत लिखना एक गहरा, भावनात्मक और आत्मीय अनुभव होता है। इस प्रकार की यात्रा अक्सर व्यक्ति को अपने भीतर की शांति और आत्मिक मार्गदर्शन की ओर ले जाती है। लिखते समय व्यक्ति अपनी आस्था, भावनाओं, और उस पवित्र स्थल के अनुभवों को शब्दों में ढालता है। इसके माध्यम से व्यक्ति धार्मिक स्थल की महत्ता, वहां की पवित्रता और वहां प्राप्त शांति का वर्णन करते समय व्यक्ति अपने आध्यात्मिक अनुभवों को साझा करता है।यात्रा के बाद होने वाले जीवन में परिवर्तन और उसे देखने का नया दृष्टिकोण लिखते समय व्यक्ति खुद के अनुभवों को फिर से जीता है। हमारे सर्वप्रिय साथी श्री हंसराज जी हंस द्वारा हमारे आग्रह पर अपनी धार्मिक यात्रा का वृत्तांत लिखना न केवल उस स्थल की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह एक आत्मिक सफर का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत कर रहा है।

विवरण

आराध्य देव श्री रामचंद्र भगवान का नया मंदिर जब से अयोध्या में बना तब से ही बाल रूप भगवान के दर्शन की इच्छा प्रबल हो रही थी। पर यह शाश्वत सत्य है कि बिना ईश्वर के आशीर्वाद आप कुछ भी नहीं कर सकते है।जब उसको बुलाना होता है,तभी जाना सम्भव होता है। ऐसा ही मेरे साथ अभी हुआ।अचानक बैठे-बैठे एक दिन दो-तीन साथी बात कर रहे थे कि क्यों नहीं? अयोध्या चलकर भगवान श्री राम के दर्शन करें। संयोग की बात थी किसी ने भी मना नहीं किया। तुरंत तीनों साथियों ने अपने-अपने तीन-तीन साथियों को और फोन लगाया और बन गई हमारी 9 साथियों की एक टीम।अब साधन की बात आई तो एक भाई ने कहा मैं मेरी बोलेरो गाड़ी खुद ही चला कर ले चलूंगा जी। बस से फिर क्या था? अगले दिन ही यात्र के लिए निकल पड़े।

तिथिवार विवरण

पहला दिन (23 अगस्त, 2024)

प्रातः 6:00 बजे ग्राम बनेठा से हम सभी साथी बोलेरो गाड़ी में श्रीराम दर्शन को निकल गए। सबकी एक इच्छा थी कि पहले सीधे अयोध्या ही चलना है अन्यत्र और कहीं भी नहीं चलना है। सबसे पहले अयोध्या चलकर भगवान श्रीराम के दर्शन करेंगे उसके बाद अन्य स्थानों पर चलेंगे। लंबा सफर था, बीच में गाड़ी को भी ठंडा करना था व चाय, अल्पाहार भी लेना था। सुनहरे मौसम में आनंद लेते हुए गाड़ी में मनोहारी भजन मीठे-मीठे संगीत के साथ सुनते हुए सफ़र कैसे कट रहा था, पता ही नहीं चला। गांव से 50 किलोमीटर दूर चलते ही दिल्ली-मुंबई हाईवे पर हमारी गाड़ी ऐसे दौड़ रही थी जैसे पानी में कोई जहाज। बहुत सुंदर और शानदार बना था यह मेगा हाईवे। सभी साथी अपने-अपने बचपन की यादों का बखान करते जा रहे थे। कोई कह रहा था बहुत दिनों बाद आज ईश्वर ने मेरी इच्छा पूरी की है। कई दिनों से मन में था पर कुछ न कुछ समस्या हमेशा आ ही जाती थी। किस्से- कहानियों के साथ हम सब हाई-वे से प्राकृतिक सौन्दर्य का लुत्फ लेते जा रहे थे। मार्ग में हमने एक जगह हाई-वे स्थित एक रेस्टोरेंट पर 45 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से जायकेदार चाय का भी शौक फरमाया। बाद में दो जगह चाय, अल्पाहार, कॉफी और ली।रात की 10:00 बजे के आसपास हम लखनऊ पहुंच गए थे। वहां पर पहुंचकर सबने होटल पर तवे की सादा रोटी, सब्जी व दाल लेकर खाना खाने का आनंद लिया।

दिन भर सफ़र की थकान होने के कारण रात्रि विश्राम भी इसी होटल में करना तय हुआ क्योंकि वहां से अभी भी अयोध्या 150 किलोमीटर दूर थी। होटल में दो कमरे लेकर सबने अपनी थकान बढ़िया नींद निकालकर उतारी।

दूसरा दिन (24 अगस्त 2024)

सुबह जल्दी 5:00 बजे स्नान आदि दैनिक कार्य से हम सब साथी निवृत्त होकर अयोध्या धाम के लिए रवाना हो गए। सब साथी बहुत आतुर हो रहे थे प्रभु श्रीराम के दर्शन करने के लिए।

हम अयोध्या 9:30 बजे पहुंच गए। गाड़ी मंदिर से दो किलोमीटर पहले ही रोक ली गई तो हमने वहीं से एक गाइड लिया उसने हमको अयोध्या के प्रमुख-प्रमुख स्थल दिखाए। तमिलनाडु से 20 क्विटंल का मंदिर में लगने वाला घंटा भी दिखाया। उसके बाद सीता रसोई के दर्शन करवाए। पर हमारी आंखें तो प्रभु श्रीराम दर्शन हेतु प्यासी थीं। हमने उससे कहा भाई अब 12:30 बज गए हैं। हमें श्रीराम मंदिर लेकर जल्दी चलो। श्रीराम मंदिर पहुंचकर जो दृश्य देखा उसका विवरण शब्दों के माध्यम से करना बहुत कठिन कार्य है। 100 एकड़ क्षेत्र में फैले मंदिर स्थल को देखकर मन प्रसन्न हो गया। वहां की तमाम व्यवस्थाएं चाक-चौबंद थीं। सब यात्रियों को पंक्तिबद्ध ले जाकर पूरी जानकारी देकर दर्शन करवाए जा रहे थे। नि:शुल्क सभी के जूते चप्पल मोबाइल सुरक्षित लॉकर में रखकर आराम से निश्चिंत होकर प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए भेजा जा रहा था। मंदिर निर्माण का नक्शा देखकर तो ऐसा लगा कि अभी 10% ही काम पूरा हुआ है क्योंकि मंदिर तीन मंजिल का बनेगा अभी तो एक ही मंजिल है। साथ ही आसपास के कई सारे मंदिर, देवस्थान बनने का कार्य प्रगति पर है।श्री राम के बालरूप के दर्शन करके मन मंत्रमुग्ध हो गया। सभी साथियों ने मन भरकर आराम से प्रभु श्रीराम के दर्शन किए।

दर्शन पश्चात पंक्ति से अलग होकर पूरे मंदिर परिक्षेत्र में घूमकर सारी जानकारी प्राप्त की। इस दौरान हमें पता चला कि वहां जो कारीगर कार्य कर रहे है। उनमें राजस्थान राज्य के कारीगरों की संख्या सबसे अधिक है। साथ ही यह भी जानकारी मिली कि मंदिर निर्माण में भी सबसे ज्यादा सहयोग राशि भी राजस्थान राज्य से ही आई बताई। यह जानकर सभी साथियों का मन गौरव से गदगद हो उठा। सब अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। मंदिर दर्शन के बाद हनुमानगढ़ी में बालाजी महाराज के विशाल मंदिर जाकर हनुमान जी के दर्शन किए। वहां से आवश्यक सामग्री प्रसाद, दुपट्टे व चित्र आदि लेकर सभी साथी प्रसन्नतापूर्वक रात्रि विश्राम के लिए वापस लखनऊ होटल के लिए रवाना हो गए। होटल आकर सब खाना खाकर विश्राम करने लगे।

तीसरा दिन  (25 अगस्त 2024)

प्रातः 5:00 बजे उठकर सभी साथियों ने आगरा के प्रमुख स्थान देखने की इच्छा जताई। सभी साथी गाड़ी में बैठकर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से आगरा के लिए रवाना हो गए। हम 10:00 बजे आगरा पहुंच गए वहां हमने एक टेम्पू को किराए पर लेकर मीना बाजार, लाल किला और ताजमहल पर्यटन स्थल देखे। साथ ही वहां की प्रसिद्ध मिठाई आगरा का पेठा खाया। सभी साथियों ने वहां कुछ जूते, चप्पल, बैग आदि सामान की खरीददारी की। वहां से हम ठीक 5:00 बजे सायं आगरा-दिल्ली हाईवे होकर मथुरा आ गए। उस दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की पूर्व संध्या थी। पूरी मथुरा नगरी दुल्हन की तरह सजी हुई थी। मार्ग में कृष्ण भक्तों की दर्शनों के लिए बहुत ही मारामारी थी। हम सभी साथी बड़ी मुश्किल से तीन घंटे में श्री कृष्ण जन्मभूमि पहुंचे। रात के 9:00 बज जाने के कारण हमें मंदिर दर्शन तो नहीं हुए पर वहां का माहौल कृष्णमय देखकर सबका मन भक्ति भाव से आनंदित हो गया। उसके पश्चात हम सबने वहां से 25 किलोमीटर दूर गोवर्धन जी महाराज जाकर रात्रि विश्राम करने की सोची। रात के 12:00 बजे गोवर्धन जाकर एक होटल में कमरा किराए पर लेकर सबने खाना खाया और विश्राम किया। 

चौथा दिन (दिनांक 26 अगस्त 2024) 

आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी महापर्व के दिन प्रातः जल्दी सभी साथी अपने दैनिक क्रिया, स्नान आदि करके गिरिराज जी के दर्शन करने हेतु दानघाटी मंदिर पहुंचे। सभी ने आराम से दर्शन करने के बाद टेक्सी से गोवर्धन परिक्रमा करने की इच्छा जताई। तुरंत दो टेक्सी किराए पर लेकर हरि भजन करते हुए 21 किलोमीटर की पूरी परिक्रमा लगाई गई। उसके पश्चात मानसी गंगा में गिरिराज भगवान के आरती करके सबका मन निर्मल व आनंदित हो गया। उसके बाद सभी ने वहां से प्रसिद्ध मावे के पेड़ा, बच्चों के लिए माला, बंशी, खिलौने आदि सामान क्रय किया। उसके बाद भरतपुर होते हुए टोंक के लिए प्रस्थान किया। रास्ते में घाना पक्षी अभयारण्य  स्थल भी देखना था पर कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार होने के कारण सभी ने कहा कि आगामी यात्रा में देखा जाएगा। आज तो सभी को सीधे गांव चलना है।

मार्ग में 3:00 बजे के आसपास सभी ने तंदूरी रोटी, दही व परांठों का लजीज खाना लिया। रात्रि 9:00 बजे सभी साथी हंसी-खुशी सवाई माधोपुर से अलीगढ़ होते हुए, अपने-अपने घर को प्रस्थान कर गए। जाते समय सभी ने कहा कि यह ट्रिप टू अयोध्या धार्मिक यात्रा जीवन में हमेशा याद आती रहेगी। सभी ने अंत में सकुशल यात्रा के लिए प्रभु श्रीराम का आभार प्रकट किया।

लेखक का काव्यात्मक परिचय

नौ जुलाई उन्नीस सौ तहत्तर को,

जन्म हुआ बनेठा गांव में।

पिता हजारी माता सुखपाली देवी, 

पले बढ़े दोनों की छांव में।


     बचपन में ही हुई शादी,

     बिना मिलाए जन्मपत्री।

     पर सौभाग्यशाली मिली,

     फिर भी पत्नी गायत्री।


परिवार को ‌खूब संवारा,

रखा सबका पूरा ध्यान।

उसके सहयोग से ही खूब, 

बढ़ा समाज में मेरा मान।


     वन हटाकर बना था बनेठा,

     जिला टोंक राजस्थान में।

     डिग्गी बहड़ बनेठा‌‌ तीन मंदिर,

     श्री कल्याण‌जी के राजस्थान में।


दसवीं तक शिक्षा ली बनेठा, 

उनियारा से बारहवीं की।

दो वर्ष की एसटीसी टोंक से की, 

बीस की उम्र में ही नौकरी की।    


     बचपन में मिली चुनौतियों से, 

     जीवन में अच्छे मिले संस्कार। 

     हमेशा दूसरों का किया सहयोग, 

     इसलिए नहीं हुआ तिरस्कार।


चार भाई, पांच बहनों में, 

मैं ही था सबसे छोटा।

सबका मिला खूब प्यार, 

खुशियों का नहीं रहा टोटा।


     लिखने-पढ़ने का था शौक,

     कोरोना में मिला खूब अवसर।

     कविताएं व आलेख लिखने में, 

     नहीं छोड़ी कोई कसर।


कविताओं का काव्य संग्रह,

'मन की हूंक' हुआ प्रकाशित। 

अब 'गुरु ज्ञान' के नाम से,

नई पुस्तक हो गई प्रकाशित।


हंसराज 'हंस' 

टोंक (राजस्थान)

यात्रा की स्मृतियां छायाचित्रों के माध्यम से





















अवसर के वीडियो







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